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Bhopal News: सिटी बसें बीमार, यात्रियों से लगवा रहे धक्का, 350 में से सिर्फ 50 बसें सड़कों पर, सफर बना सजा

Mon, 11 May 2026 05:10 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 11 May 2026 05:10 PM IST
सार

भोपाल में सिटी बस सेवा बदहाल हो चुकी है। 350 बीसीएलएल बसों में से केवल 50 बसें ही सड़कों पर चल रही हैं और उनमें से कई बीच रास्ते में खराब हो रही हैं। हाल ही में एक बस बंद होने पर यात्रियों को धक्का लगाना पड़ा, जिसका वीडियो वायरल हो गया। वहीं 100 इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने के दावे अब तक जमीन पर नहीं उतर पाए हैं।

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Bhopal News: City Buses in Dire Straits—Passengers Forced to Push Them; Only 50 Out of 350 Buses on the Roads,
सिटी बस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी की पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती नजर आ रही है। कभी शहर की सड़कों पर दौड़ने वाली 350 बीसीएलएल बसों का बेड़ा अब सिमटकर करीब 50 बसों तक पहुंच गया है। हालत यह है कि जो बसें चल रही हैं, वे भी बीच रास्ते में जवाब दे रही हैं। ताजा मामले में एक सिटी बस सड़क पर अचानक बंद हो गई, जिसके बाद यात्रियों को खुद उतरकर बस में धक्का लगाना पड़ा।
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बीच सड़क बंद हुई बस, यात्रियों ने संभाला मोर्चा
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में यात्री बस को धक्का देकर सड़क किनारे करते नजर आ रहे हैं। इस घटना ने राजधानी की बदहाल बस सेवा की पोल खोल दी है। लोगों का कहना है कि रोजाना बसों के खराब होने से सफर करना मुश्किल होता जा रहा है।यात्रियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि बसों का समय पर मेंटेनेंस नहीं हो रहा। कई बसें लंबे समय से गैरेज में खड़ी-खड़ी कबाड़ बन चुकी हैं, जबकि जर्जर बसों को अब भी सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। इससे पहले भी चलते समय बसों से धुआं निकलने और तकनीकी खराबी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
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बस स्टॉप पर घंटों इंतजार, ऑटो वालों की चांदी
बसों की भारी कमी का असर अब सीधे यात्रियों पर पड़ रहा है। बोर्ड ऑफिस, न्यू मार्केट, रेलवे स्टेशन और एम्स जैसे प्रमुख स्टॉप पर यात्रियों की लंबी कतारें लग रही हैं। कई रूट्स पर लोगों को एक-एक घंटे तक बस का इंतजार करना पड़ रहा है। मजबूरी का फायदा उठाकर ऑटो चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं।


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गर्मी में भट्टी बनीं बसें और स्टॉप
जो बसें चल रही हैं, उनकी हालत भी खराब है। टूटी सीटें, बंद खिड़कियां और तपते लोहे-फाइबर वाली बसों में सफर करना यात्रियों के लिए परेशानी भरा हो गया है। दूसरी ओर अधिकांश बस स्टॉप पर छाया और ठंडे इंतजाम नहीं हैं। टीन शेड दोपहर में भट्टी की तरह तप रहे हैं।

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इलेक्ट्रिक बसों के वादे हवा में
राजधानी में 100 इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने का दावा जनवरी 2026 तक किया गया था, लेकिन अब तक एक भी बस सड़कों पर नजर नहीं आई। कस्तूरबा नगर, संत हिरदाराम नगर, आरिफ नगर और कोलार में डिपो निर्माण का काम जारी है। अधिकारियों ने 5 बड़े रूट्स पर इलेक्ट्रिक बसें चलाने और 80 हजार यात्रियों को राहत देने का दावा किया था, लेकिन फिलहाल जनता बदहाल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था से जूझ रही है।लगातार खराब हो रही बसों और घटती संख्या ने राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों ने प्रशासन से बसों की नियमित जांच, बेहतर मेंटेनेंस और जल्द नई बसें उतारने की मांग की है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों सुनिश्चित हो सकें।
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