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भोपाल: आदिवासी समाज पर अभद्र टिप्पणी करना थाना प्रभारी को पड़ा भारी, पुलिस कमिश्नर ने सस्पेंड किया

Wed, 14 Oct 2026 02:24 PM IST
भोपाल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: भोपाल ब्यूरो Updated Wed, 14 Oct 2026 02:24 PM IST
सार

आदिवासी समाज के प्रति अभद्र टिप्पणी के मामले में मिसरोद थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है। शिकायत के बाद डीसीपी जोन-2 ने विभागीय जांच की, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस कमिश्नर ने कार्रवाई की।

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Bhopal: Misrod SHO Suspended Over Alleged Inappropriate Remarks Against Tribal Community
निलंबित थाना प्रभारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आदिवासी समाज के प्रति कथित अभद्र टिप्पणी करना मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह को भारी पड़ गया। शिकायत और विभागीय जांच के बाद पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि आदिवासी छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन के दौरान निरीक्षक ने समाज को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। मामला सामने आने पर पुलिस कमिश्नर ने इसे गंभीरता से लेते हुए डीसीपी जोन-2 विकास सहवाल को जांच के निर्देश दिए थे। जांच के बाद हुई इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में अनुशासन और आचरण को लेकर सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। 

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जानकारी के अनुसार पिछले दिनों आदिवासी छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह पर आदिवासी समाज के प्रति अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगा। शिकायत मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर ने मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। डीसीपी जोन-2 ने विभागीय जांच की। इसके बाद थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया। पुलिस विभाग का स्पष्ट रुख है कि पुलिसकर्मियों से सभी वर्गों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। किसी समुदाय के प्रति कथित अभद्र आचरण को गंभीरता से लिया जाएगा। मामले में जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।
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अतिरिक्त जिम्मेदारियों से बढ़ रहा काम का दबाव
एक ओर पुलिस मुख्यालय स्तर पर अनुशासन और जवाबदेही को लेकर सख्ती की जा रही है, वहीं दूसरी ओर राजधानी के थानों में विवेचना अधिकारियों की कमी पुलिसिंग के लिए चुनौती बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक शहर के कई थानों में एक-एक सब इंस्पेक्टर के पास दर्जनों मामलों की जांच की जिम्मेदारी है। स्टाफ की कमी के कारण प्रकरणों की विवेचना से लेकर चालान पेश करने तक की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसका असर मामलों के निराकरण और पीडि़तों को समय पर न्याय मिलने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार कुछ थानों में जांच संबंधी जिम्मेदारियों के लिए उपलब्ध अमले पर अतिरिक्त निर्भरता है। विवेचना का दबाव बढऩे से अधिकारियों के लिए मामलों की जांच के साथ-साथ क्षेत्र में निगरानी और कानून-व्यवस्था से जुड़े कामों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। आने वाले दिनों में पुलिसकर्मियों की पदस्थापना, लाइन अटैचमेंट और विवेचना अधिकारियों की तैनाती में बदलाव किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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