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Bhopal:ACS के निर्देश का नहीं हुआ पालन,सभी कलेक्टरों को 15 दिन के भीतर निजी कॉलेजों में जांच के दिए थे निर्देश
Thu, 16 Jan 2025 10:27 AM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Thu, 16 Jan 2025 10:27 AM IST
सार
उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने 23 दिसंबर 2024 को प्रदेश के सभी कलेक्टरों को पत्र लिख कर निर्देश दिए थे कि 15 दिन के भीतर जांच करें। 22 दिन बाद भी कोई जांच नहीं हुई है।
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एसीएस अनुपम राजन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश के निजी कॉलेजों में गड़बड़ झाले की शिकायत के बाद उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने 23 दिसंबर 2024 को प्रदेश के सभी कलेक्टरों को पत्र लिख कर निर्देश दिए थे कि वे अपने जिलों में संचालित प्राइवेट कॉलेजों का सत्यापन और भौतिक निरीक्षण 15 दिन के भीतर सुनिश्चित करें। लेकिन 22 दिन बीतने के बावजूद न तो किसी कॉलेज का निरीक्षण हुआ और न ही कोई कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
एक ही बिल्डिंग में संचालित होते हैं कई कोर्स
दरअसल मध्य प्रदेश के फर्जी नर्सिंग कॉलेजो का खुलासा होने के बाद अब अन्य कॉलेजों के भी मामले सामने आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश के कई निजी कॉलेज एक ही बिल्डिंग में नियमों को ताक पर रखकर कई कोर्स संचालित कर रहे हैं। कॉलेज की शिकायत उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग अनुपम राजन ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर निर्देशित किया था कि 15 दिन के भीतर सभी निजी कॉलेजों का कमेटी बनाकर भौतिक सत्यापन और जांच करें। लेकिन जानकारी के अनुसार अभी तक किसी भी कलेक्टर ने ऐसी कोई कमेटी नहीं बनाई ना ही निजी कॉलेजों की जांच करवाई गई है।
शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों का भविष्य खतरे
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में हो रहे फर्जीवाड़े को लेकर NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने राज्य सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में सैकड़ों प्राइवेट कॉलेज एक ही बिल्डिंग में नियमों का उल्लंघन करते हुए कई कोर्स चला रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों का भविष्य खतरे में है।परमार ने कहा कि एनएसयूआई द्वारा नर्सिंग कॉलेजों का जो भंडाफोड़ किया उसके बाद भी सरकार जाग नहीं रहीं हैं प्रदेश में नर्सिंग फर्जीवाड़े की तरह ही पैरामेडिकल , फार्मेसी, डीएड, बीएड और पीजीडीएम कॉलेजों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब शिक्षा माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है।
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इन संभागों सबसे ज्यादा फर्जी कॉलेज
परमार ने बताया कि ग्वालियर चंबल और भोपाल संभाग में सबसे ज्यादा फर्जी प्राइवेट कॉलेज संचालित हो रहे हैं। ग्वालियर और चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों में फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मान्यता दी गई, जो प्रदेश की शिक्षा प्रणाली की साख को नुकसान पहुंचा रही है। परमार ने ग्वालियर और चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों की न्यायिक सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई द्वारा दो बार जांच हुई, लेकिन ग्वालियर और चंबल संभाग, जहां सबसे ज्यादा फर्जी नर्सिंग कॉलेज थे, उनकी सीबीआई जांच नहीं हुई। हम सुप्रीम कोर्ट को ग्वालियर और चंबल संभाग के फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की वास्तविकता से अवगत कराएंगे और न्यायिक सीबीआई जांच की मांग करेंगे।
सीबीआई जांच की मांग, मुख्य सचिव से मांगा समय
परमार ने बताया कि दतिया में पहले मात्र 6 कालेज थे लेकिन सत्र 2020-21 में 25 कालेज हो गए वहीं ग्वालियर में 75 कालेज थे जबकि सत्र 2020-21 में 121 कालेज हो गई थे यहीं स्थित भिंड मुरैना शिवपुरी और शिवपुर की हैं लेकिन इन नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई जांच नहीं हुई। परमार ने बताया कि इस गंभीर विषय पर चर्चा और समाधान के लिए उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा है। वे प्रदेश में शिक्षा माफियाओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी बात रखने और समाधान के सुझाव देने के लिए तैयार हैं।
Nsui की मांग
1. फर्जी कॉलेजों को तुरंत बंद किया जाए।
2. शिक्षा माफियाओं और कालेज संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
3. फर्जी कालेजों को मान्यता और संबंद्धता देने वाले अधिकारियों को उनके पदों से हटाया जाए।
4. फर्जी कालेजों में अध्यनरत छात्रों की तत्काल फीस वापस करवाएं जाएं ।
5. छात्रों की छात्रवृत्ति की जांच करवाएं जाएं ।
6. पीजीडीएम कोर्स में फर्जी छात्रवृत्ति के माध्यम से करोड़ो अरबो रुपए कमाने वाले कॉलेजो की गहनता से जांच की जाए एवं उनसे उत्तीर्ण छात्र छात्राओ के रिकॉर्ड खंगाले जाए।
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एक ही बिल्डिंग में संचालित होते हैं कई कोर्स
दरअसल मध्य प्रदेश के फर्जी नर्सिंग कॉलेजो का खुलासा होने के बाद अब अन्य कॉलेजों के भी मामले सामने आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश के कई निजी कॉलेज एक ही बिल्डिंग में नियमों को ताक पर रखकर कई कोर्स संचालित कर रहे हैं। कॉलेज की शिकायत उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग अनुपम राजन ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर निर्देशित किया था कि 15 दिन के भीतर सभी निजी कॉलेजों का कमेटी बनाकर भौतिक सत्यापन और जांच करें। लेकिन जानकारी के अनुसार अभी तक किसी भी कलेक्टर ने ऐसी कोई कमेटी नहीं बनाई ना ही निजी कॉलेजों की जांच करवाई गई है।
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शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों का भविष्य खतरे
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में हो रहे फर्जीवाड़े को लेकर NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने राज्य सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में सैकड़ों प्राइवेट कॉलेज एक ही बिल्डिंग में नियमों का उल्लंघन करते हुए कई कोर्स चला रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों का भविष्य खतरे में है।परमार ने कहा कि एनएसयूआई द्वारा नर्सिंग कॉलेजों का जो भंडाफोड़ किया उसके बाद भी सरकार जाग नहीं रहीं हैं प्रदेश में नर्सिंग फर्जीवाड़े की तरह ही पैरामेडिकल , फार्मेसी, डीएड, बीएड और पीजीडीएम कॉलेजों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब शिक्षा माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है।
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इन संभागों सबसे ज्यादा फर्जी कॉलेज
परमार ने बताया कि ग्वालियर चंबल और भोपाल संभाग में सबसे ज्यादा फर्जी प्राइवेट कॉलेज संचालित हो रहे हैं। ग्वालियर और चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों में फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मान्यता दी गई, जो प्रदेश की शिक्षा प्रणाली की साख को नुकसान पहुंचा रही है। परमार ने ग्वालियर और चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों की न्यायिक सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई द्वारा दो बार जांच हुई, लेकिन ग्वालियर और चंबल संभाग, जहां सबसे ज्यादा फर्जी नर्सिंग कॉलेज थे, उनकी सीबीआई जांच नहीं हुई। हम सुप्रीम कोर्ट को ग्वालियर और चंबल संभाग के फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की वास्तविकता से अवगत कराएंगे और न्यायिक सीबीआई जांच की मांग करेंगे।
सीबीआई जांच की मांग, मुख्य सचिव से मांगा समय
परमार ने बताया कि दतिया में पहले मात्र 6 कालेज थे लेकिन सत्र 2020-21 में 25 कालेज हो गए वहीं ग्वालियर में 75 कालेज थे जबकि सत्र 2020-21 में 121 कालेज हो गई थे यहीं स्थित भिंड मुरैना शिवपुरी और शिवपुर की हैं लेकिन इन नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई जांच नहीं हुई। परमार ने बताया कि इस गंभीर विषय पर चर्चा और समाधान के लिए उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा है। वे प्रदेश में शिक्षा माफियाओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी बात रखने और समाधान के सुझाव देने के लिए तैयार हैं।
Nsui की मांग
1. फर्जी कॉलेजों को तुरंत बंद किया जाए।
2. शिक्षा माफियाओं और कालेज संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
3. फर्जी कालेजों को मान्यता और संबंद्धता देने वाले अधिकारियों को उनके पदों से हटाया जाए।
4. फर्जी कालेजों में अध्यनरत छात्रों की तत्काल फीस वापस करवाएं जाएं ।
5. छात्रों की छात्रवृत्ति की जांच करवाएं जाएं ।
6. पीजीडीएम कोर्स में फर्जी छात्रवृत्ति के माध्यम से करोड़ो अरबो रुपए कमाने वाले कॉलेजो की गहनता से जांच की जाए एवं उनसे उत्तीर्ण छात्र छात्राओ के रिकॉर्ड खंगाले जाए।
