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मदरसों को टारगेट करने का आरोप: भड़के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, बोले- जांच करो, बदनाम मत करो

Thu, 29 Oct 2026 05:54 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Thu, 29 Oct 2026 05:54 PM IST
सार

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने ग्वालियर में बच्चों को बाल गृह में रखे जाने और मदरसों की जांच को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने बाल आयोग से बच्चों की सुविधाओं और संस्थानों की व्यवस्था सुधारने पर ध्यान देने की मांग की। 

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Allegations of targeting madrasas: Congress MLA Arif Masood lashes out, says—conduct an investigation, but do
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में मदरसों को लेकर चल रही कार्रवाई और ग्वालियर में बच्चों को बाल गृह में रखे जाने के मामले पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सवाल उठाए हैं। भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा कि बाल आयोग को जांच करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल बच्चों की सुविधाएं और व्यवस्था सुधारने के लिए होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और जांच के बाद जिस तरह प्रचार किया जाता है, उससे मदरसों की छवि खराब होती है। मसूद ने कहा कि मदरसों और गुरुकुलों में शिक्षा देने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। संविधान के अनुच्छेद 29 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा की इन परंपराओं को लेकर समानता के साथ विचार किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी संस्थान में कमियां मिलने पर कार्रवाई का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार होना चाहिए, न कि उसे लेकर ऐसा माहौल बनाना जिससे पूरे संस्थान पर सवाल खड़े हों।

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ग्वालियर में बच्चों को तीन दिन बाद घर पहुंचाने का दावा
आरिफ मसूद ने ग्वालियर में बच्चों को बाल गृह में रखे जाने के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि बच्चों को लगातार दो दिन तक वहां रखा गया। उन्होंने स्थानीय प्रशासन, आजाद पार्टी, विभिन्न समाजों के नेताओं और जिला वक्फ बोर्ड के लोगों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी के प्रयासों से बच्चों को करीब तीन दिन बाद घर पहुंचाया जा सका। मसूद ने दावा किया कि इस दौरान कुछ बच्चों की तबीयत भी बिगड़ी। उन्होंने आशंका जताई कि बच्चों को हुई परेशानी की एक वजह उनके साथ हुआ कथित उत्पीड़न हो सकती है। उन्होंने कहा कि बच्चों के मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए और उनकी सुरक्षा तथा स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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किताबों को लेकर छपी खबर पर भी जताई आपत्ति
 मसूद ने मदरसे से मिली पुस्तकों को लेकर प्रकाशित खबर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन पुस्तकों का उल्लेख किया गया, उनमें से एक के लेखक स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य और दूसरी पुस्तक ‘कल्कि के अवतार और मोहम्मद’ के लेखक वेद प्रकाश उपाध्याय बताए गए हैं। मसूद ने दावा किया कि संबंधित पुस्तकें प्रतिबंधित नहीं थीं। उन्होंने कहा कि पुस्तकों के नाम और सामग्री को जिस तरह प्रस्तुत किया गया, उससे गलत संदेश गया। उन्होंने संबंधित अखबार के संपादक से इस मामले में खंडन प्रकाशित करने की अपील की। मसूद ने कहा कि किसी सामग्री को लेकर सवाल हों तो तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए और बिना उचित संदर्भ के उसका प्रचार नहीं किया जाना चाहिए।
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कमियां मिलें तो नोटिस दें, सुधार का समय भी दें
कांग्रेस विधायक ने बाल विकास से जुड़े अधिकारियों से कहा कि वे मदरसों और छात्रावासों का निरीक्षण करते समय बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि बच्चों को पर्याप्त भोजन, साफ-सफाई और बेहतर छात्रावास सुविधा मिलना जरूरी है। मसूद के मुताबिक, यदि किसी संस्थान में व्यवस्थाएं खराब मिलती हैं तो संबंधित संचालकों को नोटिस देकर कमियां दूर करने का समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाल आयोग और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और उनकी सुविधाएं सुनिश्चित करना है। उन्होंने मांग की कि जांच की प्रक्रिया नियमों के अनुसार हो और बच्चों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। मसूद ने कहा कि संस्थानों में सुधार के लिए कार्रवाई की जाए, लेकिन जांच के नाम पर ऐसा प्रचार नहीं होना चाहिए जिससे किसी पूरे शैक्षणिक संस्थान की छवि प्रभावित हो।
 

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