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एम्स की चेतावनी: सर्दी में जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, फेफड़ों तक पहुंच रहा संक्रमण, इन्हें ज्यादा खतरा
Fri, 06 Nov 2026 04:53 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 06 Nov 2026 04:53 PM IST
सार
सर्दी के मौसम में इन्फ्लूएंजा और वायरल निमोनिया जैसे सांस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। एम्स भोपाल ने चेताया है कि सामान्य सर्दी-खांसी समझकर लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सर्दी शुरू होते ही खांसी-जुकाम और बुखार को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। मौसम में बदलाव के साथ सांस के वायरस सक्रिय होते हैं और संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। इसे देखते हुए एम्स भोपाल ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। संस्थान के मुताबिक, समय पर टीकाकरण और शुरुआती लक्षणों को पहचानना गंभीर संक्रमण से बचने में अहम भूमिका निभाता है। एम्स भोपाल के चिकित्सकों ने बताया कि तापमान में गिरावट और नमी में बदलाव के साथ सर्दियों में लोग ज्यादा समय बंद कमरों में बिताते हैं। कम हवादार जगहों पर एक-दूसरे के संपर्क में आने से इन्फ्लूएंजा और दूसरे सांस के वायरस फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सामान्य दिखने वाला संक्रमण भी कुछ लोगों के लिए गंभीर हो सकता है।
इन लोगों के लिए ज्यादा खतरा
बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को संक्रमण के प्रति विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। धूम्रपान करने वालों के साथ दमा, सीओपीडी, मधुमेह और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए भी खतरा अधिक रहता है। कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण पहले से मौजूद बीमारी को बिगाड़ सकता है और गंभीर निमोनिया का रूप ले सकता है।
हर साल फ्लू का टीका लगवाने की सलाह
एम्स भोपाल ने बचाव के लिए हर साल इन्फ्लूएंजा का टीका लगवाने की सलाह दी है। खासकर जोखिम वाले लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को टीकाकरण पर ध्यान देना चाहिए। उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार निमोनिया से बचाव का टीका लगवाने पर भी डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।
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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
इन्फ्लूएंजा होने पर अचानक बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, बदन दर्द, गले में खराश, खांसी और अत्यधिक थकान हो सकती है। यदि तेज बुखार लगातार बना रहे, सांस फूलने लगे, सीने में दर्द हो, मरीज भ्रम की स्थिति में पहुंचे या होंठ नीले पड़ने लगें तो तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए। ऑक्सीजन का स्तर कम होना भी गंभीर संकेत है।
मास्क और साफ हवा से भी होगा बचाव
संक्रमण से बचने के लिए भीड़भाड़ और कम हवादार जगहों पर ठीक से फिट होने वाला मास्क पहनने, घर के कमरों में हवा की आवाजाही बनाए रखने और नियमित रूप से हाथ धोने की सलाह दी गई है। खांसते या छींकते समय मुंह ढकें। धूम्रपान और घर के भीतर के प्रदूषण से बचें। खानपान, पर्याप्त पानी और नींद का भी ध्यान रखें।
यह भी पढ़ें-भोपाल में धनतेरस: एक हजार करोड़ से ज्यादा के कारोबार की उम्मीद, सोना-चांदी से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक बरसेगा धन
वायरल संक्रमण में खुद से न लें एंटीबायोटिक
एम्स ने स्पष्ट किया है कि एंटीबायोटिक दवाएं वायरल संक्रमण पर असर नहीं करतीं। इन्हें केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। इन्फ्लूएंजा में एंटीवायरल दवाएं शुरुआती समय में शुरू करने पर ज्यादा फायदा पहुंचा सकती हैं। अस्पताल में भर्ती और जोखिम वाले मरीजों को देर से इलाज शुरू होने पर भी लाभ मिल सकता है। इसलिए लक्षण बढ़ने का इंतजार करने के बजाय समय पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
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इन लोगों के लिए ज्यादा खतरा
बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को संक्रमण के प्रति विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। धूम्रपान करने वालों के साथ दमा, सीओपीडी, मधुमेह और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए भी खतरा अधिक रहता है। कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण पहले से मौजूद बीमारी को बिगाड़ सकता है और गंभीर निमोनिया का रूप ले सकता है।
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हर साल फ्लू का टीका लगवाने की सलाह
एम्स भोपाल ने बचाव के लिए हर साल इन्फ्लूएंजा का टीका लगवाने की सलाह दी है। खासकर जोखिम वाले लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को टीकाकरण पर ध्यान देना चाहिए। उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार निमोनिया से बचाव का टीका लगवाने पर भी डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।
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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
इन्फ्लूएंजा होने पर अचानक बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, बदन दर्द, गले में खराश, खांसी और अत्यधिक थकान हो सकती है। यदि तेज बुखार लगातार बना रहे, सांस फूलने लगे, सीने में दर्द हो, मरीज भ्रम की स्थिति में पहुंचे या होंठ नीले पड़ने लगें तो तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए। ऑक्सीजन का स्तर कम होना भी गंभीर संकेत है।
मास्क और साफ हवा से भी होगा बचाव
संक्रमण से बचने के लिए भीड़भाड़ और कम हवादार जगहों पर ठीक से फिट होने वाला मास्क पहनने, घर के कमरों में हवा की आवाजाही बनाए रखने और नियमित रूप से हाथ धोने की सलाह दी गई है। खांसते या छींकते समय मुंह ढकें। धूम्रपान और घर के भीतर के प्रदूषण से बचें। खानपान, पर्याप्त पानी और नींद का भी ध्यान रखें।
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वायरल संक्रमण में खुद से न लें एंटीबायोटिक
एम्स ने स्पष्ट किया है कि एंटीबायोटिक दवाएं वायरल संक्रमण पर असर नहीं करतीं। इन्हें केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। इन्फ्लूएंजा में एंटीवायरल दवाएं शुरुआती समय में शुरू करने पर ज्यादा फायदा पहुंचा सकती हैं। अस्पताल में भर्ती और जोखिम वाले मरीजों को देर से इलाज शुरू होने पर भी लाभ मिल सकता है। इसलिए लक्षण बढ़ने का इंतजार करने के बजाय समय पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
