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Bhopal: चिकित्सकों को एडवांस केयर का दिया गया प्रशिक्षण, डॉ. राजेश बोले- सिर्फ दो फीसदी नवजात को होती है जरूरत
Mon, 05 Sep 2022 09:36 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Mon, 05 Sep 2022 09:36 AM IST
सार
कई बार सही केयर नहीं मिलने पर बच्चों के लिए खतरा बढ़ जाता है। इसको लेकर डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया गया है। यह प्रशिक्षण प्रदेश में शिशु मृत्यु दर को कम करने में भी महत्वपूर्ण होगा।
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बाल चिकित्सकों को दिया गया एडवांस केयर का प्रशिक्षण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक विभाग में एडवांस एनआरपी प्रोवॉइडर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें 42 बाल चिकित्सों को नवजात के जन्म के बाद एडवांस केयर का प्रशिक्षण दिया गया।
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक और नेयोनेटालॉजी फोरम के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला पीडियाट्रिक विभाग की एचओडी डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित हुई। इसमें लीड इंस्ट्रक्टर सागर मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन प्रोफेसर एके रावत थे। कार्यशाला के कोर्स कॉऑर्डिनेटर डॉ. राजेश टिक्कस थे। डॉक्टर टिक्कस ने बताया कि बाल्य चिकित्सकों को नवजात के जन्म के बाद केयर के लिए प्रशिक्षित किया गया। यह वर्कशॉप हैंड्स ऑन स्किल पर आधारित थी। उन्होंने बताया कि 100 में 90 प्रतिशत नवजात को जन्म के बाद किसी प्रकार के नेयोनेंटल रेसेसिएशनकी जरूरत नहीं होती है। 8 से 9 प्रतिशत को बेसिक केयर की जरूरत होती है। 1 से दो प्रतिशत नवजात को एडवांस केयर की आवश्यकता होती है। इसमें नवजात के जन्म लेने के बाद उसके शरीर का मूवमेंट, रोना जरूरी होता है। कई बार सही केयर नहीं मिलने पर बच्चों के लिए खतरा बढ़ जाता है। इसको लेकर डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया गया है। यह प्रशिक्षण प्रदेश में शिशु मृत्यु दर को कम करने में भी महत्वपूर्ण होगा।
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इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक और नेयोनेटालॉजी फोरम के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला पीडियाट्रिक विभाग की एचओडी डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित हुई। इसमें लीड इंस्ट्रक्टर सागर मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन प्रोफेसर एके रावत थे। कार्यशाला के कोर्स कॉऑर्डिनेटर डॉ. राजेश टिक्कस थे। डॉक्टर टिक्कस ने बताया कि बाल्य चिकित्सकों को नवजात के जन्म के बाद केयर के लिए प्रशिक्षित किया गया। यह वर्कशॉप हैंड्स ऑन स्किल पर आधारित थी। उन्होंने बताया कि 100 में 90 प्रतिशत नवजात को जन्म के बाद किसी प्रकार के नेयोनेंटल रेसेसिएशनकी जरूरत नहीं होती है। 8 से 9 प्रतिशत को बेसिक केयर की जरूरत होती है। 1 से दो प्रतिशत नवजात को एडवांस केयर की आवश्यकता होती है। इसमें नवजात के जन्म लेने के बाद उसके शरीर का मूवमेंट, रोना जरूरी होता है। कई बार सही केयर नहीं मिलने पर बच्चों के लिए खतरा बढ़ जाता है। इसको लेकर डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया गया है। यह प्रशिक्षण प्रदेश में शिशु मृत्यु दर को कम करने में भी महत्वपूर्ण होगा।
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