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दिग्गी की तर्ज पर जोगी का संन्यास!

Sat, 28 Dec 2013 11:52 AM IST
जयप्रकाश पाराशर/अमर उजाला, भोपाल
जयप्रकाश पाराशर/अमर उजाला, भोपाल Updated Sat, 28 Dec 2013 11:52 AM IST
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ajit jogi retire from politics for one year

छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम अजीत जोगी ने भी दिग्विजय सिंह की तर्ज पर एक साल तक राजनीति से दूर रहने का नया पैतरा चला है।

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दिग्विजय सिंह ने 2003 में सत्ता से बाहर होने के बाद दस साल तक कोई पद नहीं लेने की घोषणा कर दी थी। अब अजीत जोगी ने एक साल तक कोई चुनाव नही लड़ने की घोषणा करके लोकसभा चुनावों से बचने का दाव चला है।

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस जोगी को बिलासपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ाना चाहती है, जहां से दिलीपसिंह जूदेव के पुत्र रणविजय सिंह भाजपा की ओर से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
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कांग्रेस की राजनीति पर नजर रखने वालों का कहना है कि अजीत जोगी किसी तरह से लोकसभा चुनाव से बचना चाहते हैं। खासकर बिलासपुर से रणविजय सिंह का सामना नहीं करना चाहते।
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कांग्रेस की दिक्कत यह है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में कई नेताओं की नाराजगी झेल रहे अजीत जोगी को अनदेखा भी नहीं किया जा सकता और वहीं दूसरे कांग्रेस नेता उन्हें कांग्रेस संगठन की एकता के लिए हानिकर भी मानते हैं।

कई कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यदि लोकसभा चुनाव में अजीत जोगी को नहीं उतारा गया तो वह दूसरे उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अब अजीत जोगी आध्यात्मिक कार्यों में अपना समय बिताने की बात कर रहे हैं, जब भाजपा छत्तीसगढ़ में पूरी 11 लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में अजीत जोगी के विरोधी माने जाने वाले भूपेश बघेल को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद जोगी काफी खफा दिखाई दे रहे थे और राज्य की राजनीति में उन्हें दरकिनार किए जाने के संकेत मिलने लगे थे। हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार दोषी अजीत जोगी को भी माना गया।

जोगी और दिग्गी
संयुक्त मध्य प्रदेश के कामयाब प्रशासनिक अधिकारी रहे अजीत जोगी और दिग्विजय सिंह की राजनीति में संयोग से बड़ी समानताएं दिखाई दे रही हैं।

मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह भी अजीत जोगी की तरह ही पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह से नजदीकी के कारण ही राजनीति में आए थे। अपने-अपने राज्यों में दोनों को अपरिहार्य भी माना जाता है और कोई उन्हें प्रोजेक्ट भी करने को तैयार नहीं।

दिग्विजय सिंह ने 2003 के बाद लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा है और अब भी वह राजगढ़ से मौजूदा सांसद नारायणसिंह अमलाबी को ही चुनाव लड़ाने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।

हाल ही में दिग्विजय सिंह ने भोपाल की प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पार्टी नेतृत्व उनसे चुनाव लड़ने के लिए कहेगा तो वे तैयार हैं। एक समय दिग्विजय सिंह ने घोषणा कर दी थी कि वह सुषमा स्वराज के मुकाबले में विदिशा से चुनाव लड़ेंगे।

विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के सफाये के बाद कई लोगों का मानना है कि दिग्विजय सिंह शायद ही चुनाव लड़ें। राजगढ़ संसदीय क्षेत्र की सात विधानसभाओं में से पांच पर कांग्रेस हार गई है। दिग्विजय सिंह के खास सिपहसालार प्रियव्रत सिंह और जिला अध्यक्ष रामचंद्र दांगी भी चुनाव हार गए हैं। ऐसी स्थितियों में राजगढ़ से शायद ही दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ना चाहेंगे।

नेता प्रतिपक्ष की तलाश
शिवराज सिंह चौहान का तो पूरा कैंपेन ही दिग्विजय सिंह के दस साल बनाम शिवराज सिंह का कार्यकाल के आसपास तैयार किया गया था। मध्य प्रदेश की गुटीय राजनीति में भी दिग्विजय सिंह ठीक अजीत जोगी की तरह एकाकी हो गए हैं। छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए भूपेश बघेल को संयुक्त मध्य प्रदेश के समय दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता था, लेकिन अब वे अजीत जोगी के विरोधी हैं।


छत्तीसगढ़ में नेता प्रतिपक्ष का चुनाव किया जा रहा है, जिसके लिए पर्यवेक्षक के तौर पर जनार्दन द्विवेदी और ताराचंद बहुगुणा को केंद्रीय नेतृत्व ने भेजा है। विधानसभा का सत्र छह  जनवरी से शुरू हो रहा है। 3 जनवरी को कांग्रेस के विधायक दल की बैठक होने वाली है।

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