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बालिका वधू बनने से बची हंसा
इंदौर/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 01 Feb 2013 10:12 AM IST
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प्रशासन और पुलिस के वक्त रहते हरकत में आने से एक 15 वर्षीय लड़की बालिका वधू बनने से बच गई। इस लड़की का गैर कानूनी बाल विवाह रुकवा दिया गया और दूल्हे और बारातियों को चेतावनी देकर लौटा दिया गया।
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महिला और बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी जय श्रीवास्तव ने बताया कि महकमे के दल ने पुलिस की मदद से बिचौली मर्दाना क्षेत्र में कक्षा नौ की छात्रा हंसा की शादी रुकवा दी। विभाग को उसके बाल विवाह को लेकर बुधवार रात शिकायत मिली थी। उन्होंने बताया कि हंसा को उसके परिजन रिश्तेदारों की मदद से शादी के बंधन में बांधने जा रहे थे।
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बारातियों के साथ दूल्हा उसके घर पहुंच चुका था और गुरुवार शाम को ही वह फेरों की रस्म निभाने वाली थी। जब हंसा के परिवारवालों से उसकी उम्र को लेकर पूछताछ की गई, तो वे ऐसा कोई दस्तावेज मुहैया नहीं करा सके जिससे साबित होता हो कि वधू की उम्र 18 वर्ष है।
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श्रीवास्तव के मुताबिक जब लड़की के स्कूल से उसकी जन्मतिथि की जानकारी ली गई, तो पता चला कि उसकी उम्र महज 15 वर्ष है। उन्होंने बताया कि हंसा का बाल विवाह रुकवाते हुए वर और वधू पक्ष के लोगों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
इससे पहले, लड़की के पिता रामप्रसाद ने अधिकारियों को लिखकर दिया कि वह तब तक अपनी बेटी को विवाह के बंधन में नहीं बांधेंगे, जब तक वह पूरे 18 बरस की नहीं हो जाएगी। देश में 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के और 18 साल से कम आयु की लड़की की शादी बाल विवाह की श्रेणी में आती है, जो कानूनन अपराध है।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत दोषी को दो वर्ष तक के सश्रम कारावास अथवा एक लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों सजाओं का प्रावधान है।
