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2019 में अप्रैल-दिसंबर के बीच सरकारी बैंकों में 1.17 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी : आरटीआई
Fri, 14 Feb 2020 03:03 AM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, इंदौर
पीटीआई, इंदौर
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 14 Feb 2020 03:03 AM IST
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सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त एक जानकारी के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों, अप्रैल-दिसंबर, 2019 के दौरान 18 सरकारी बैंकों में कुल 1.17 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 8,926 मामले सामने आए। प्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने बृहस्पतिवार को बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने उन्हें सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी दी है।
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आरटीआई के तहत मुहैया कराए गए आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा वित्तीय वर्ष के शुरूआती नौ महीनों में देश का शीर्ष वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) धोखाधड़ी का सबसे बड़ा शिकार बना। आलोच्य अवधि में एसबीआई की ओर से 30,300.01 करोड़ रुपये की बैंकिंग धोखाधड़ी के 4,769 मामले सूचित किए गए। यह राशि इस अवधि में सरकारी बैंकों में बैंकिंग धोखाधड़ी के सूचित मामलों की कुल रकम 1,17,463.73 करोड़ रुपये की करीब 26 फीसदी है।
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पंजाब नेशनल बैंक द्वारा अप्रैल से दिसंबर तक बैंकिंग धोखाधड़ी के 294 मामले सूचित किए गए जिसमें 14,928.62 करोड़ रुपये की धनराशि शामिल है। इस अवधि के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा में कुल 11,166.19 करोड़ रुपये के 250 मामले सामने आए।
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आलोच्य अवधि के दौरान इलाहाबाद बैंक में 6,781.57 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 860 मामले, बैंक ऑफ इंडिया में 6,626.12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 161 मामले, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 5,604.55 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 292 मामले, इंडियन ओवरसीज बैंक में 5,556.64 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 151 मामले और ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में 4,899.27 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 282 मामले सूचित किए गए।
केनरा बैंक, यूको बैंक, सिंडिकेट बैंक, कॉर्पोरेशन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक, युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक में 1,867 मामले सामने आए जिसमें कुल 31,600.76 करोड़ रुपये की धनराशि शामिल है।
आरबीआई की ओर से आरटीआई के तहत मुहैया करायी गयी जानकारी में बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों की प्रकृति और छल के शिकार बैंकों या उनके ग्राहकों को हुए नुकसान का विशिष्ट ब्योरा नहीं दिया गया है।
