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कोरोना फाइटर्सः अपनी जान जोखिम में डाल बचाते हैं दूसरों की जिंदगी, बोले- जरूरतमंदों के लिए कुर्बान है ये जीवन
Tue, 05 May 2020 04:49 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क /अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क /अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 05 May 2020 04:49 PM IST
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अपने काम में दिन-रात जुटे हैं एंबुलेंस सेवा के जीवीके ईएमआरआई के कर्मचारी।
- फोटो : amar ujala
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कोरोना वायरस की महामारी से निपटने में स्वास्थ्य विभाग के तहत चल रहीं एंबुलेंस के कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। संदिग्ध मरीजों को क्वारंटीन में भेजने का जिम्मा भी इन्हीं का है। ऐेसे में कई बार संदिग्ध मरीज को ले जाते वक्त भयभीत भी हुए, लेकिन कर्तव्य के आगे भय कम होता गया। अब वे अपनी जान की परवाह किए बगैर जहां से भी कॉल आती है तत्काल हाजिर हो जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत चल रही एंबुलेंस 108, 102 और एएलएस सेवाएं जीवनदायिनी साबित हो रही हैं।
- फोटो : अमर उजाला
लखनऊ स्थित 108 व 102 सेवा के कॉल सेंटर के कर्मचारी विपरीत परिस्थितियों में भी दिन-रात लगे हुए हैं। सभी जरूरतमंदों को आपातकालीन समय में एंबुलेंस सेवा उपलब्ध करा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में एंबुलेंस सेवा प्रदाता संस्था जीवीके ईएमआरआई के स्टेट हेड किशोर नायडू ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रही एंबुलेंस सेवाओं के कर्मचारी और कॉल सेंटर कर्मचारी युद्धस्तर पर लोगों की सेवा के लिए दिन रात काम कर रहे हैं। आपातकालीन सेवाओं में लगे सभी कर्मचारियों की सुरक्षा के सभी उपाय किए गए हैं। कॉल सेंटर मेें कर्मचारियों के बीच की दूरी बढ़ा दी गई है।
ईआरओ निर्मल आर्या।
- फोटो : amar ujala
परिवार ने कहा, नौकरी छोड़ दो
कोरोना वायरस आने के बाद जब ड्यूटी लगी तो डर गई थी। परिवार ने नौकरी छोड़ने की सलाह दी। लेकिन मुझे लगा कि यह आपातकाल से बड़ी समस्या है। ऐसे में पैर पीछे खींचना देश व समाज के साथ गद्दारी होगी। कई तरह की दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। खुद को बचाते हुए हम लोग यहां 24 घंटे काम कर रहे हैं ताकि लोगों को समय से एम्बुलेंस मिल सके। - निर्मल आर्या, ईआरओ
कोरोना वायरस आने के बाद जब ड्यूटी लगी तो डर गई थी। परिवार ने नौकरी छोड़ने की सलाह दी। लेकिन मुझे लगा कि यह आपातकाल से बड़ी समस्या है। ऐसे में पैर पीछे खींचना देश व समाज के साथ गद्दारी होगी। कई तरह की दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। खुद को बचाते हुए हम लोग यहां 24 घंटे काम कर रहे हैं ताकि लोगों को समय से एम्बुलेंस मिल सके। - निर्मल आर्या, ईआरओ
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ईएमटी संदीप सिंह।
- फोटो : amar ujala
जरूरतमंदों के लिए कुर्बान है ये जिंदगी
जब से कोरोना के संदिग्ध मरीज आने शुरू हुए तब से कोरोना के लिए आरक्षित एंबुलेंस में सेवाएं दे रहा हूं। इस मुश्किल समय में लोगों को सेवाएं देने में गर्व महसूस हो रहा है। एंबुलेंस में आने वाला मरीज पॉजिटिव है या नहीं, यह तय नहीं होता है। इसलिए खुद के संक्रमित होने का डर रहता है। फिर भी मास्क व एप्रन पहनकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाते हैं। - संदीप सिंह, ईएमटी
जब से कोरोना के संदिग्ध मरीज आने शुरू हुए तब से कोरोना के लिए आरक्षित एंबुलेंस में सेवाएं दे रहा हूं। इस मुश्किल समय में लोगों को सेवाएं देने में गर्व महसूस हो रहा है। एंबुलेंस में आने वाला मरीज पॉजिटिव है या नहीं, यह तय नहीं होता है। इसलिए खुद के संक्रमित होने का डर रहता है। फिर भी मास्क व एप्रन पहनकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाते हैं। - संदीप सिंह, ईएमटी
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ईएमटी ओम प्रकाश यादव।
- फोटो : amar ujala
मौका मिला है तो निभाएंगे कर्तव्य
कई हफ्तों से सस्पेक्टेड मरीजों को एयरपोर्ट के अस्पताल ले जा रहे हैं। पहले डर लगता था। परिवार ने घर लौटने की सलाह दी। मां ने जिंदगी की दुहाई दी। लेकिन हमने तय किया कि मौका मिला है तो इसे कर्तव्य मानकर निभाएंगे। लोगों से अपील है कि वे घर पर रहें, उनकी सेवा में हम डटे हैं। -ओम प्रकाश यादव, ईएमटी
कई हफ्तों से सस्पेक्टेड मरीजों को एयरपोर्ट के अस्पताल ले जा रहे हैं। पहले डर लगता था। परिवार ने घर लौटने की सलाह दी। मां ने जिंदगी की दुहाई दी। लेकिन हमने तय किया कि मौका मिला है तो इसे कर्तव्य मानकर निभाएंगे। लोगों से अपील है कि वे घर पर रहें, उनकी सेवा में हम डटे हैं। -ओम प्रकाश यादव, ईएमटी