फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Live

Shardiya Navratri 2026 Live: शारदीय नवरात्रि शुरू, जानें घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि-भोग और आरती

Sun, 11 Oct 2026 09:25 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा कुमारी Updated Sun, 11 Oct 2026 09:25 AM IST
खास बातें

Shardiya Navratri 2026 Live Ghatasthapana Muhurat in Hindi: हर वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस साल 11 अक्तूबर 2026 से नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मान्यता है कि नौ दिनों तक व्रत, मंत्र जाप और विधि-विधान से पूजा करने पर माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं नवरात्रि के पहले दिन का महत्व।
 

विज्ञापन
shardiya navratri 2026 live ghatasthapana muhurat puja vidhi samagri mantra wishesin hindi
Shardiya Navratri 2026 - फोटो : अमर उजाला AI

लाइव अपडेट

09:20 AM, 11-Oct-2026

मां शैलपुत्री की जन्म कथा


माँ दुर्गा अपने पहले स्वरुप में 'शैलपुत्री' के नाम से पूजी जाती हैं।पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा ।अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं तब इनका नाम सती था।इनका विवाह भगवान शंकर जी से हुआ था।एक बार प्रजापति दक्ष ने बहुत बड़ा यज्ञ किया जिसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया किन्तु शंकर जी को उन्होंने इस यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया,सती ने जब सुना कि हमारे पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं,तब वहां जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा।अपनी यह इच्छा उन्होंने भगवान शिव को बताई। 
09:00 AM, 11-Oct-2026

मां शैलपुत्री की पूजा विधि

 

  • नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से कलश स्थापना करें और मिट्टी के पात्र में जौ बोएं।
  • इसके बाद मां शैलपुत्री को फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीप और फल अर्पित करें।
  • मां को सफेद रंग के फूल और सफेद रंग की मिठाई अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • इसके बाद मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें और श्रद्धापूर्वक दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
  • अंत में मां की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
विज्ञापन
08:35 AM, 11-Oct-2026

मां शैलपुत्री की पूजा क्यों की जाती है?

मां शैलपुत्री को नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। इसी कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। मां शैलपुत्री के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल सुशोभित होता है। वे वृषभ यानी बैल पर सवार रहती हैं। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि उनकी आराधना से भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मां की कृपा से जीवन में सकारात्मकता आती है और भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

08:15 AM, 11-Oct-2026

Shardiya Navratri 2026: मां दुर्गा के नौ रूप और उनके प्रतीक

शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। जिनमें प्रथम दिन शैलपुत्री: पर्वतराज हिमालय की पुत्री। वृषभ पर सवार। स्थिरता और मन की दृढ़ता प्रदान करती हैं। द्वितीय ब्रह्मचारिणी: कठोर तपस्या का प्रतीक। ज्ञान, वैराग्य और संयम की अधिष्ठात्री हैं। तृतीय चंद्रघंटा: मस्तक पर अर्धचंद्र से सुशोभित। इनकी आराधना से भय का नाश और शत्रु बाधा दूर होती है। चतुर्थ कूष्मांडा: अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली। आयु, यश और आरोग्य देने वाली हैं।पंचम स्कंदमाता: भगवान कार्तिकेय की माता। संतान सुख और वात्सल्य की प्रदायिनी हैं। षष्ठम कात्यायनी: महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में अवतरित। दांपत्य जीवन में सुख और शत्रुओं पर विजय दिलाती हैं। सप्तम देवी दुर्गा कालरात्रि अंधकार का नाश करने वाली हैं। भक्तों को अभय प्रदान कर ग्रह बाधा को दूर करती हैं।अष्टम महागौरी: गौर वर्ण, श्वेत वस्त्र धारिणी। पापों का क्षय कर शुद्धता और समृद्धि देती हैं। नवम सिद्धिदात्री: सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। इनकी कृपा से साधक को मोक्ष और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
07:50 AM, 11-Oct-2026

नवरात्रि पूजा सामग्री

  • लोटा, जल, गंगाजल, मौली, सुपारी, दूर्वा और जटा नारियल।
  • लाल चुनरी, वस्त्र और माता के श्रृंगार की सामग्री जैसे बिंदी, सिंदूर, गजBB  रा और चूड़ियां।
  • फूल-माला, पान, सूखा नारियल और साफ-साबुत चावल।
  • पीतल का दीया, रुई की बत्ती, घी या तिल का तेल, कपूर और धूप-बत्ती।
  • कंघी, शीशा, पायल, इत्र, मेहंदी और अन्य श्रृंगार सामग्री।
  • मिट्टी, मिट्टी का पात्र, जौ, कलावा, बताशे, फल और मिठाई।
  • अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान की सामग्री भी रख सकते हैं।
07:30 AM, 11-Oct-2026

Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन पूजा विधि

  • सबसे पहले एक साफ चौकी पर माता रानी की मूर्ति स्थापित करें। 
  • इसके बाद देवी मां का विधि-विधान से श्रृंगार कर उन्हें लाल चुनरी अर्पित करें। 
  • माता को फूल और इत्र चढ़ाएं। साथ ही फल, मिठाई, मेवे और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
  • इसके बाद जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें और उसके ऊपर नारियल व लाल चुनरी रखें। 
  • कलश स्थापना के साथ जौ भी बोएं।
  • फिर दीप जलाकर देवी मां की पूजा-अर्चना करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। 
  • अंत में माता रानी की आरती करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
07:20 AM, 11-Oct-2026

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन, श्रद्धालु काली मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

07:00 AM, 11-Oct-2026

Navratri Kalash Sthapana 2026: घर पर ऐसे करें कलश स्थापना

 

  • कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें।
  • इसके बाद वहां मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • अब जिस स्थान पर जौ बोने हैं, वहां साफ मिट्टी से एक छोटा पात्र तैयार करें।
  • इसमें जौ के बीज डालकर ऊपर से हल्की मिट्टी डाल दें।
  • इसके बाद कलश तैयार करें।
  • कलश के बाहर मौली बांधें और उस पर रोली से तिलक लगाएं।
  • अब कलश में स्वच्छ जल और थोड़ा गंगाजल डालें।
  • इसमें सुपारी और सिक्का भी रखा जा सकता है।
  • इसके बाद कलश के मुंह पर आम या अशोक के पत्ते रखें।
  • ऊपर जटा वाला नारियल स्थापित करें।
  • नारियल को लाल कपड़े या चुनरी में लपेटकर कलश पर रखा जाता है।
  • कलश और जौ की स्थापना के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और विधि-विधान से पूजा करें।
  • नवरात्रि के दौरान जौ में नियमित रूप से आवश्यकता के अनुसार पानी का छिड़काव करते रहें।
06:45 AM, 11-Oct-2026

हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन

मां दुर्गा का आगमन इस बार हाथी पर होगा। देवी भागवत पुराण के अनुसार हाथी पर देवी का आगमन शुभ माना जाता है। हाथी को शक्ति, स्थिरता, धैर्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है, इसलिए माता का हाथी पर आगमन देश में अच्छी वर्षा, कृषि समृद्धि और सुख-शांति का संकेत देता है।
06:30 AM, 11-Oct-2026

Shardiya Navratri 2026: कलश स्थापना में चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग

  • शास्त्रों में प्रातःकाल में देवी आह्वान और घटस्थापना का विधान है। 11 अक्तूबर को चित्रा नक्षत्र रात्रि 10:32 बजे तक और वैधृति योग रात्रि 09:05 बजे तक रहेगा।
  • शास्त्रों के अनुसार चित्रा नक्षत्र के शुरुआती दो चरणों को छोड़कर अथवा अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना श्रेष्ठ मानी गई है।
  • कलश स्थापना (घटस्थापना) का शुभ मुहूर्त
  • चौघड़िया मुहूर्त: प्रातः 10 बजकर 4 मिनट से दोपहर 11 बजकर 55 मिनट तक बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11 बजकर 32 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक
Load More
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed