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Raksha Bandhan Date, Time Live: रक्षाबंधन पर भद्रा इस समय होगी खत्म, फिर कल 7.05 तक ही तिथि

Thu, 11 Aug 2022 06:25 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 11 Aug 2022 06:25 PM IST
खास बातें

Raksha Bandhan 2022 Date Time Tithi Puja Muhurat in Hindi : आज रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है। लेकिन आज ही भद्राकाल भी शुरू हो चुकी है। पूर्णिमा तिथि 10 बजकर 38 मिनट पर आरंभ हो गई है। भद्रा रात 08 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी। 11 अगस्त को भद्रा समाप्त होने पर रात 08 बजकर 54 मिनट से रात 09 बजकर 49 मिनट तक राखी बांध सकते हैं। लेकिन हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार सूर्यास्त के बाद राखी बांधना वर्जित है। इस कारण से कुछ लोग 12 अगस्त को भी रक्षाबंधन मना रहे हैं।
 

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Raksha Bandhan 2022 Date Bhadra Time Live Updates Tithi Puja Vidhi Muhurat and Wishes in Hindi
रक्षाबंधन की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala

लाइव अपडेट

06:18 PM, 11-Aug-2022

2023 में भी रक्षाबंधन पर भद्रा काल की रहेगी ऐसी स्थिति

आज रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है, लेकिन कई लोग कल यानी 12 अगस्त को भी राखी का पर्व मना रहे हैं। दरअसल भद्रा के कारण आज रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त भद्रा के खत्म होने के बाद है। भद्रा रात 8 बजकर 51 मिनट पर खत्म होगी फिर इसके बाद भद्रारहित काल में राखी बांधी जा सकेगी। लेकिन कई का मत है कि रात के समय में राखी नहीं बांधनी चाहिए। ऐसे में 12 अगस्त को पूर्णिमा तिथि के रहते सुबह जल्दी राखी का शुभ मुहूर्त है। इस तरह संयोग अगले वर्ष भी बन रहा है। जब राखी पर भद्रा काल का साया रहेगा।
03:58 PM, 11-Aug-2022

रक्षाबंधन के बाद कृष्ण जन्माष्टमी भी दो दिन 

अब रक्षाबंधन के बाद भगवान श्रीकृ्ष्ण का जन्मोत्सव भी दो दिन का होगा। जिस तरह से इस बार रक्षाबंधन 11 और 12 अगस्त को है उसी प्रकार 18 और 19 अगस्त को जन्माष्टमी की त्योहार भी मनाया जाएगा। पंचांग गणना के मुताबिक 18 अगस्त को भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि रात को करीब 9 बजकर 22 मिनट से आरंभ हो जाएगी जो अगले दिन यानी 19 अगस्त को रात करीब 11 बज रहेगी। 
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02:24 PM, 11-Aug-2022

रक्षाबंधन के दिन इन नियमों का रखें ध्यान

- रक्षाबंधन के दिन भूलकर भी राहुकाल और भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। शास्त्रों में इन दोनों काल में किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।
- बहनों को इस बात का विशेष ध्यान देना चाहिए कि कभी भी भाईयों का खंडित या टूटी हुई राखी न बांधे।
- राखी में शुभ चिन्ह जरूर बना होना चाहिए
01:36 PM, 11-Aug-2022

राखी बांधने का शुभ चौघड़िया मुहूर्त


रक्षाबंधन पर भद्रा का साया बना हुआ है लेकिन भद्रा के पाताल में वास होने के कारण सावन पूर्णिमा तिथि पर राखी बांधी जा सकती है। आइए जानते हैं राखी बांधने के लिए शुभ चौघड़िया का मुहूर्त काल

चर- सुबह 10.45 बजे से 12.24 बजे तक 

लाभ- दोपहर 12.24 बजे से 14.04 तक 

अमृत- दोपहर 2.04 बजे से 15.43 बजे तक 

शुभ- शाम 5.22 बजे से 7.02 बजे तक 
01:08 PM, 11-Aug-2022

रक्षाबंधन पर करें ये ज्योतीष उपाय

शास्त्रों के अनुसार रक्षाबंधन के दिन कुछ ज्योतिषीय उपाय करने पर भाई बहन के जीवन में प्रेम और सुख-समृद्धि आती साथ ही नकारात्मकता भी खत्म होती है।

- पूजा की थाली में राखी के साथ रखें फिटकरी
- गुलाबी रंग का एक छोटा सा कपड़ा का टुकड़ा और अक्षत
-  सुपारी और चांदी का लक्ष्मी-गणेश का सिक्का
12:32 PM, 11-Aug-2022

जानिए रक्षाबंधन पर कौन सा मंत्र का जाप करना चाहिए 

रक्षाबंधन पर और कलाई में रक्षासूत्र बांधते वक्त इस अभीष्ट मंत्र का जरूर करें जाप


ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।


अर्थ- जिस रक्षासूत्र को महान शक्तिशाली दानवेंद्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षाबंधन से मैं तुम्हे बांधती हूं, यह तुम्हारी हमेशा रक्षा करें और संकट में तुम मेरी रक्षा करना।

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12:08 PM, 11-Aug-2022

जानिए शुभ मुहुर्त के प्रकार


अभिजीत मुहूर्त- सभी मुहूर्तों में अभिजित मुहूर्त अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है। अभिजित मुहूर्त प्रत्येक दिन दोपहर से करीब 24 मिनट पहले शुरू होकर दोपहर के 24 मिनट बाद समाप्त हो जाता है।

चौघड़िया- मुहूर्त शास्त्र में चौघड़िया मुहूर्त का विशेष स्थान होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी शुभ और मांगलिक कार्य के लिए कोई शुभ मुहूर्त न मिले तो उस अवस्था में चौघड़िया मुहूर्त में उस कार्य को किया जा सकता है।
होरा-अगर कोई शुभ कार्य करना अत्यंत ही जरूरी हो, लेकिन उस दौरान शुभ मुहूर्त का अभाव हो तो ज्योतिष में होरा चक्र की व्यवस्था बनाई गई है।
 


लग्न तालिका- विवाह मुहूर्त, मुंडन संस्कार और गृह प्रवेश मुहूर्त समेत सभी शुभ कार्यों के मुहूर्त के लिए शुभ लग्न तालिका देखा जाता है।

गौरी शंकर पंचांगम- गौरी शंकर पंचांगम को नल्ला नेरम भी कहा जाता है जिसका अर्थ शुभ समय होता है। यह मुहूर्त श्रेष्ठ फलदायी होता है।

गुरु पुष्य योग- जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बने तो इसे गुरु पुष्य योग कहा जाता है।गुरु पुष्य योग सभी योगों में प्रधान है। इस योग में किया गया हर एक कार्य शुभ होता है। 

रवि पुष्य योग- रविवार और पुष्य नक्षत्र के संयोग को रवि पुष्य योग कहा जाता है। रवि पुष्य योग समस्त शुभ कार्यों के प्रारंभ के लिए उत्तम माना गया है। 

अमृत सिद्धि योग- अमृत सिद्धि योग भी शुभ मुहूर्तों में एक होता है।इस योग में किए गए सभी कार्य पूरे होते हैं। मांगलिक कार्य के शुभ मुहूर्त के लिए इस योग को पहले स्थान पर रखा जाता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग -यह योग सभी तरह के मनोकामनाओं का पूरा करने वाला शुभ योग कहलाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग एक निश्चित वार और निश्चित नक्षत्र के संयोग से बनता है। किसी भी तरह के शुभ कार्य को इस योग में किया जा सकता है।
11:59 AM, 11-Aug-2022

अभिजीत मुहूर्त जारी, बांधी जा सकती है इसमें राखी

अब रक्षाबंधन तिथि पर भद्रा काल का साया शुरू हो चुका है जोकि रात को खत्म होगा। लेकिन जिन्हें किसी कारणवश आज ही राखी बांधनी है वे लोग अभिजीत मुहूर्त में राखी बांध सकते हैं। इस समय अभिजीत मुहूर्त जारी है। मुहूर्त शास्त्र के अनुसार अभिजीत मुहुर्त में किसी भी तरह का शुभ कार्य किया जा सकता है।
 
11:41 AM, 11-Aug-2022

राखी बांधते समय दिशा का रखें ध्यान 

राखी बांधते समय दिशा का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। जब भी आप अपने भाई को राखी बांधें तो उसे पूर्व दिशा की तरफ बिठाकर राखी बांधे। ध्यान रखें बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर हो।  जब भी बहन भाई को राखी बांधे उस समय बहनों को दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर और भाइयों को उत्तर-पूर्व दिशा की ओर देखना चाहिए। राखी बांधने के दौरान किसी अन्य दिशा में गलती से भी ना देखें। गलती से भी उत्तर-पश्चिम दिशा में बैठकर राखी ना बांधे। राखी बांधने के लिए यह सही दिशा नहीं है।
 
11:30 AM, 11-Aug-2022

रक्षा सूत्र या राखी बांधने का ज्योतिष महत्व 

राखी या रक्षा सूत्र बांधते समय कई बातों का ध्यान रखना चाहिए। राखी बांधने का ज्योतिषीय महत्व भी है। ज्योतिष शास्त्र कर अनुसार राखी बांधते समय तीन गांठें बांधनी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मणिबंध से भाग्य की और जीवन की  रेखा शुरू होती है। मान्यताओं के अनुसार इन मणिबंधो में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश  और त्रिशक्ति शक्ति, लक्ष्मी और सरस्वती का वास रहता है। जब आप राखी या रक्षासूत्र बांधते हैं तो यह सूत्र त्रिशक्तियों और त्रिदेव को समर्पित माना जाता है।
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