Krishna Janmashtami Live: इस समय किया जाएगा कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत का पारण, जानें व्रत खोलने की विधि
Krishna Janmashtami 2022 Vrat Parana Time, Puja Vidhi, Shubh Muhurat: आज पूरे देश में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस बार जन्माष्टमी की तिथि को लेकर भी भ्रम की स्थिति थी। 19 अगस्त को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी मथुरा और वृंदावन के आधार पर मनाई जा रही है।
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- जन्माष्टमी में कई लोग निराहार तो कई लोग फलाहार रखकर व्रत करते हैं। ऐसे में व्रत का पारण करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- जन्माष्टमी व्रत का पारण कान्हा को भोग लगाने के बाद ही करें।
- कान्हा के भोग में अर्पित पंजीरी, पंचामृत और माखन से व्रत खोलें।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सबको प्रसाद वितरित करने के बाद कान्हा केभोग से व्रत खोलना शुभ माना जाता है।
- यह स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उत्तम है।
जिन श्रद्धालुओं ने आज व्रत रखा है वह 20 अगस्त के शुभ मुहूर्त में पारण कर सकते हैं। दरअसल जन्माष्टमी व्रत का पारण अष्टमी तिथि के समापन के बाद किया जाता है। चूंकि मथुरा में आज रात कान्हा का जन्म कराया जाएगा तो अधिकतर लोग इसी आधार पर व्रत खोलेंगे। लेकिन जो लोग अगले दिन यानी 20 अगस्त को व्रत खोलना चाहते हैं उनके लिए भी यहां पारण करने का शुभ समय दिया गया है।
- 19 अगस्त, शुक्रवार का व्रत पारण समय: आज यानी 19 अगस्त को जो श्रद्धालु व्रती हैं वह रात्रि 10:59 मिनट के बाद काभी भी व्रत का पारण कर सकते हैं।
- 20 अगस्त, शनिवार का व्रत पारण समय: जो श्रद्धालु कल अपना व्रत खोलना चाहते हैं तो उनके लिए 20 अगस्त को प्रातः 05:45 बजे के बाद का समय शुभ है।
जन्माष्टमी का शुभ पर्व हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाने वाला त्योहार है। यह दिन कान्हा के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और इसी वजह से मंदिरों में जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के 56 व्यजंनों का भोग तैयार होता है। इन 56 भोगों में कुछ ऐसी विशेष चीजें हैं जो कान्हा को प्रिय है। और मान्यता है कि यदि बालगोपाल को इन चीजों का भोग लगाया जाए तो वह अतिप्रसन्न होते हैं। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, मखाना पाग,खीरा, पंचामृत, लड्डू, पेड़े, खीर आदि चीजों का भोग जरूर लगाना चाहिए।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा पड़ा है। इस विशेष मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ मथुरा स्थित कृष्ण जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ने कान्हा की पूजा की और उनका आशीर्वाद लिया।
Mathura, UP | CM Yogi Adityanath visits Krishna Janamabhoomi on the occasion of Janmashtami pic.twitter.com/gzFALiqEiq
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) August 19, 2022
भगवान कृष्ण के जन्म की पूजा विधि इस प्रकार है-
- मध्याह्न रात के समय काले तिल जल से डाल कर स्नान करें।
- इसके बाद पूजा स्थल पर खीरे के अंदर बाल गोपाल की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- ध्यान रखें इस दिन डंठल और हल्की सी पत्तियों वाले खीरे को कान्हा की पूजा में उपयोग करें।
- रात के 12 बजते ही खीरे के डंठल को किसी सिक्के से काटकर कान्हा का जन्म कराएं।
- इसके बाद शंख बजाकर बाल गोपाल के आने की खुशियां मनाएं और फिर विधिवत कुंज बिहारी की आरती गाएं।
- कान्हा के जन्म के बाद लड्डू गोपाल की मूर्ति को पहले गंगा जल से स्नान कराएं।
- फिर मूर्ति को दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और केसर के पंचामृत से स्नान कराएं।
- अब शुद्ध जल से स्नान कराएं।
- पूजा के बाद खीरे को प्रसाद के तौर पर बांट दिया जाता है।
जन्माष्टमी पर लोग भगवान श्रीकृष्ण को खीरा चढ़ाते हैं। मान्यता है कि खीरे से श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सारे दुख दर्द हर लेते हैं। जन्माष्टमी के दिन ऐसा खीरा लाया जाता है, जिसमें थोड़ा डंठल और पत्तियां लगी होती हैं। जन्माष्ठमी पूजा के खीरे के इस्तेमाल के पीछे की मान्यता है कि जब बच्चा पैदा होता है तब उसको मां से अलग करने के लिए गर्भनाल को काटा जाता है। ठीक उसी प्रकार से जन्माष्टमी के दिन खीरे को डंठल से काटकर अलग किया जाता है। ये भगवान श्री कृष्ण को मां देवकी से अलग करने का प्रतीक माना जाता है। ऐसा करने के बाद ही कान्हा की विधि विधान से पूजा शुरू की जाती है।
पूजा के दौरान जरूर करें श्री कृष्ण की आरती
जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण की आरती के बिना उनकी पूजा अधूरी है। पढ़ें सम्पूर्ण आरती यहांश्रीकृष्ण की आरती
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक
चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की…॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग ग्वालिन संग।
अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।
जटा के बीच,हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद।
टेर सुन दीन दुखारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
- मेष राशि के जातक लगाएं कृष्ण जन्माष्टमी के दिन माखन मिश्री का भोग।
- कृष्ण जन्माष्टमी के दिन वृष राशि के जातकों को लड्डू गोपाल को माखन का भोग लगाना चाहिए।
- मिथुन राशि के जातकों को जन्माष्टमी के दिन कान्हा का चंदन से तिलक करके भोग में दही अर्पण करना चाहिए।
- कर्क राशि के जातकों को जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को दूध और केसर का भोग लगाना चाहिए।
- सिंह राशि के जातक प्रसाद में कान्हा को माखन-मिश्री चढ़ाएं।
- कन्या राशि के लोग कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को मावे का भोग जरूर लगाएं।
- तुला राशि के जातक जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल को घी का भोग लगाएं।
- वृश्चिक राशि के जातक भगवान श्रीकृष्ण को जन्माष्टमी पर माखन या दही चढ़ाएं।
- धनु राशि के जातक जन्माष्टमी पूजा पर कान्हा को पीले रंग की मिठाई चढ़ाएं।
- मकर राशि के जातक जन्माष्टमी के दिन कान्हा को मिश्री का भोग लगाएं।
- कुंभ राशि के जातक जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को बालूशाही का भोग लगाएं।
- मीन राशि के जातक भगवान श्रीकृष्ण को जन्माष्टमी के दिन भोग में केसर और बर्फी चढ़ाएं।
जन्माष्टमी के उत्सव की धूम चारों ओर देखने को मिल रही है। इसी क्रम में तेलंगाना के इस्कॉन मंदिर में श्रद्धालुओं ने कान्हा के दर्शन किए और जन्माष्टमी उत्सव मनाया।
Telangana | Devotees throng the ISKCON temple in Hyderabad on the occasion of Janamashtami pic.twitter.com/CFpBZyYX2H
— ANI (@ANI) August 19, 2022
श्री कृष्ण चालीसा का पाठ दिलाएगा हर काम में सफलता
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण की चालीसा पाठ करने से भगवान श्री कृष्ण की विशेष कृपा बनी रहती है। यहां पढ़ें सम्पूर्ण कृष्ण चालीसा
कृष्ण चालीसा पाठ
॥ दोहा ॥
बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम।
अरुण अधर जनु बिम्बा फल,पिताम्बर शुभ साज॥
जय मनमोहन मदन छवि,कृष्णचन्द्र महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय,राखहु जन की लाज॥
चौपाई
जय यदुनन्दन जय जगवन्दन।जय वसुदेव देवकी नन्दन॥जय यशुदा सुत नन्द दुलारे।जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥
जय नट-नागर नाग नथैया।कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया॥
पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो।आओ दीनन कष्ट निवारो॥
वंशी मधुर अधर धरी तेरी।होवे पूर्ण मनोरथ मेरो॥
आओ हरि पुनि माखन चाखो।आज लाज भारत की राखो॥
गोल कपोल, चिबुक अरुणारे।मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥
रंजित राजिव नयन विशाला।मोर मुकुट वैजयंती माला॥
कुण्डल श्रवण पीतपट आछे।कटि किंकणी काछन काछे॥
नील जलज सुन्दर तनु सोहे।छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥
मस्तक तिलक, अलक घुंघराले।आओ कृष्ण बांसुरी वाले॥
करि पय पान, पुतनहि तारयो।अका बका कागासुर मारयो॥
मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला।भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला॥
सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई।मसूर धार वारि वर्षाई॥
लगत-लगत ब्रज चहन बहायो।गोवर्धन नखधारि बचायो॥
लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई।मुख महं चौदह भुवन दिखाई॥
दुष्ट कंस अति उधम मचायो।कोटि कमल जब फूल मंगायो॥
नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें।चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें॥
करि गोपिन संग रास विलासा।सबकी पूरण करी अभिलाषा॥
केतिक महा असुर संहारयो।कंसहि केस पकड़ि दै मारयो॥
मात-पिता की बन्दि छुड़ाई।उग्रसेन कहं राज दिलाई॥
महि से मृतक छहों सुत लायो।मातु देवकी शोक मिटायो॥
भौमासुर मुर दैत्य संहारी।लाये षट दश सहसकुमारी॥
दै भिन्हीं तृण चीर सहारा।जरासिंधु राक्षस कहं मारा॥
असुर बकासुर आदिक मारयो।भक्तन के तब कष्ट निवारियो॥
दीन सुदामा के दुःख टारयो।तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो॥
प्रेम के साग विदुर घर मांगे।दुर्योधन के मेवा त्यागे॥
लखि प्रेम की महिमा भारी।ऐसे श्याम दीन हितकारी॥
भारत के पारथ रथ हांके।लिए चक्र कर नहिं बल ताके॥
निज गीता के ज्ञान सुनाये।भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये॥
मीरा थी ऐसी मतवाली।विष पी गई बजाकर ताली॥
राना भेजा सांप पिटारी।शालिग्राम बने बनवारी॥
निज माया तुम विधिहिं दिखायो।उर ते संशय सकल मिटायो॥
तब शत निन्दा करी तत्काला।जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥
जबहिं द्रौपदी टेर लगाई।दीनानाथ लाज अब जाई॥
तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला।बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥
अस नाथ के नाथ कन्हैया।डूबत भंवर बचावत नैया॥
सुन्दरदास आस उर धारी।दयादृष्टि कीजै बनवारी॥
नाथ सकल मम कुमति निवारो।क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥
खोलो पट अब दर्शन दीजै।बोलो कृष्ण कन्हैया की जै॥
॥ दोहा ॥
यह चालीसा कृष्ण का,पाठ करै उर धारि।
अष्ट सिद्धि नवनिधि फल,लहै पदारथ चारि॥