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Hartalika Teej Live: कल सूर्योदय से पूर्व होगी शिव गौरी की पूजा, इस विधि से करें हरतालिका व्रत का पारण

Mon, 18 Sep 2023 06:37 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 18 Sep 2023 06:37 PM IST
खास बातें

Hartalika Teej Quotes, Vrat Puja Vidhi, Samagri, Teej Katha Live Updates : आज देशभर में हरतालिका तीज जिसे तीजा भी कहा जाता है मनाया जा रहा है। यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इस व्रत में सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखते हुए शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।

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Happy Hartalika Teej 2023 Live: Hartalika Teej Vrat Katha, Puja Vidhi, Muhurat, Shiv Ji Ki Aarti In Hindi
Hartalika Teej Wishes 2023 - फोटो : Amar Ujala

लाइव अपडेट

06:26 PM, 18-Sep-2023

हरतालिका तीज व्रत पारण में क्या खाएं?

  • हरतालिका तीज व्रत का पारण करने के लिए भगवान को चढ़ाया गया भोग ही अच्छा माना जाता है।
  • इसलिए पूजा में चढ़ाए गए भोग से ही अपना व्रत खोलें। 
  • इसके बाद आप भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
06:21 PM, 18-Sep-2023

हरतालिका तीज व्रत पारण विधि

  • हरतालिका तीज व्रत के अगले दिन सूर्योदय से पूर्व जागें और स्नान के बाद शिव गौरी की पूजा करें।
  • इसके बाद प्रसाद में चढ़ाए मिष्ठान और जल से व्रत का पारण करें।
  • इस बात का ध्यान रखें कि व्रत का पारण कभी भी नमकयुक्त या तले हुए भोजन से नहीं किया जाता है। 
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06:15 PM, 18-Sep-2023

हरतालिका तीज पर न करें ये काम

  • हरतालिका तीज के दिन व्रती महिलाओं का सोना वर्जित होता है।
  • हरतालिका तीज व्रत में गलती से भी जल ग्रहण न करें।
  • हरतालिका तीज के दिन महिलाएं अपने पति के साथ किसी तरह के वाद-विवाद से बचें।
  • इस दिन मन में किसी भी तरह की गलत भावना न लाएं।
  • व्रत के दौरान क्रोध करने से भी बचें।
06:05 PM, 18-Sep-2023

Hartalika Teej 2023 Shopping: हरतालिका तीज पर करें ये खरीदारी

हरतालिका तीज पर खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन सोने के आभूषण खरीदना और सुहाग से जुड़ी चीजें खरीदना काफी शुभ माना जाता है। इसके साथ ही इस दिन मोबाइल फोन, प्रॉपर्टी, घर की बुकिंग, किराए पर मकान लेना और गैजेट आदि लेना भी अच्छा माना गया है।
05:55 PM, 18-Sep-2023
इन राशियों की महिलाएं अर्पित करें ये चीजें
  • मेष, सिंह और धनु राशि की सुहागिन महिलाएं आज हरतालिका तीज पर लाल चूड़ियां, सिंदूर और बिंदी अर्पित करें।
  • वृषभ, कन्या और मकर राशि की महिलाएं मां पार्वती को इत्र, सुगंध और लाल वस्त्र अर्पित करें।
  • मिथुन, तुला और कुंभ राशि की महिलाओं के लिए चांदी की बिछिया अर्पित करना शुभ होगा।
  • कर्क, वृश्चिक और मीन राशि की महिलाओं को आज के दिन मां पार्वती को लाल फूल जरूर अर्पित करना चाहिए। 
05:25 PM, 18-Sep-2023

Hartalika Teej 2023 Aarti: हरतालिका तीज आरती

शिव जी की आरती 
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
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05:24 PM, 18-Sep-2023

Hartalika Teej 2023 Puja Muhurat: हरतालिका तीज पर पूजा के 4 प्रहर का शुभ मुहूर्त

पूजा का पहला प्रहर:  शाम 06:23 से रात 09:02 तक
पूजा का दूसरा प्रहर:   रात 09:02 से रात 12:15 तक
पूजा का तीसरा प्रहर:  19 सितंबर रात 12:15 से प्रात: 03:12 तक
पूजा का चौथा प्रहर:  19 सितंबर प्रात: 03:12 से सुबह 06:08 तक
05:05 PM, 18-Sep-2023
हरतालिका तीज व्रत से महिलाओं को मिलता है ये फल
हरतालिका तीज पर स्त्रियां व्रत रखकर भगवान गणेश एवं शिव-पार्वती का पूजन करती हैं, जिससे उनका दांपत्य जीवन सुखद रहता है एवं परिवार में खुशियां बनी रहती हैं। इस व्रत को निर्जल रहकर किया जाता है। रात में महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती के गीतों पर नृत्य भी करती हैं। अगर अविवाहित कन्याएं हरतालिका तीज का उपवास करती हैं तो उन्हें अच्छा जीवनसाथी मिलता है। वहीं सुहागिन महिलाओं के पति की आयु दीर्घ होती है। इस अवसर पर महिलाएं पूरा श्रृंगार करके नए वस्त्र और आभूषण पहनकर लोकगीत गीत गीती हैं। इस पारंपरिक पर्व से जीवन नए उमंग-उल्लास और प्रेम के रंग में रंग जाता है।
04:45 PM, 18-Sep-2023

Hartalika Teej 2023 Aarti: हरतालिका तीज आरती

पार्वती माता की आरती
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
 
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
 
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
 
शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता
 
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
 
देवन अरज करत हम चित को लाता
गावत दे दे ताली मन में रंगराता।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता
 
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।
जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।
04:26 PM, 18-Sep-2023

Hartalika Teej 2023 Vrat Katha: हरतालिका तीज कथा

शिवमहापुराण के अनुसार कई जन्मों से माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाना चाहती थीं। इसलिए बाल अवस्था में ही माता पार्वती ने हिमालय पर्वत के गंगा तट पर अधोमुखी होकर तपस्या की थी। इस दौरान उन्होंने अन्न और जल का सेवन भी नही किया था। वह केवल सूखे पत्ते खाकर तप करती थीं। पार्वती जी को इस अवस्था में देख उनके माता पिता बहुत दुखी रहते थे। एक दिन उनके पिता के पास भगवान विष्णु की तरफ से पार्वती जी के विवाह का प्रस्ताव आया। यह जानकर माता पार्वती काफी दुखी हो गईं। उनके पिता चाहते की पार्वती जी का विवाह भगवान विष्णु के साथ हो जाए। इस पर माता पार्वती की सहेली ने उन्हें वन में जाने की सलाह दी, जिसके बाद पार्वती जी एक गुफा में जाकर शिव जी की तपस्या में लीन हो गईं। माता पार्वती ने भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन रेत से शिवलिंग बनाकर उनकी स्तुति की। पार्वती जी की इतनी कठोर तपस्या देख भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया।
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