Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन कल, जानें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का शुभ मुहूर्त
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Sun, 30 Mar 2025 05:03 PM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Sun, 30 Mar 2025 05:03 PM IST
खास बातें
Chaitra Navratri 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार कल 31 मार्च को चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है। कल मां की पूजा के लिए शुभ अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से लेकर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भक्त मां भगवती के दूसरे स्वरूप में देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा कर सकते हैं।
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Chaitra Navratri 2025
- फोटो : अमर उजाला
लाइव अपडेट
04:48 PM, 30-Mar-2025
Chaitra Navratri 2025: इस साल चैत्र नवरात्रि 9 नहीं 8 दिनों की
इस साल चैत्र नवरात्रि के दौरान द्वितीया और तृतीया तिथि एक ही दिन है, जिस कारण नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 8 दिनों की होगी।
04:41 PM, 30-Mar-2025
Chaitra Navratri 2025 Upay: नवरात्रि में लौंग चढ़ाने की विधि
नवरात्रि में लौंग चढ़ाने का खास महत्व है। इससे मां दुर्गा की कृपा मिलती है, नकारात्मकता का नाश होता है, सकारात्मकता का संचार होता है। नवरात्रि के 9 दिनों तक आप रोजाना शाम के समय दीप में लौंग के जोड़े को डालकर दीप जलाएं और इसे धुएं को पूरे घर में दिखाएं।आरती करते हैं भी कपूर में लौंग के जोड़े को डालकर आरती कर सकते हैं।
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04:26 PM, 30-Mar-2025
Navratri 2025 Rules for 9 days: नवरात्रि के 9 दिनों में क्या न करें
नवरात्रि के 9 दिनो में इन नियमों का करें पालन
- मांस-मछली या मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें।
- बाल-दाढ़ी और नाखून कटवाने या काटने से बचें।
- घर पर कलह-क्लेश जैसी स्थिति उत्पन्न न करें और वाद-विवाद से दूर रहें।
- साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और घर को गंदा बिल्कुन न रखें।
04:01 PM, 30-Mar-2025
Navratri 2025 9 Days Puja Mantra: चैत्र नवरात्रि में 9 दिनों के 9 मंत्र
- ॐ शैलपुत्र्यै नमः
- ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः
- ॐ चंद्रघंटायै नमः
- ॐ कूष्माण्डायै नमः
- ॐ स्कंदमातायै नमः
- ॐ कात्यायन्यै नमः
- ॐ कालरात्र्यै नमः
- ॐ महागौरिये नमः
- ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः
03:25 PM, 30-Mar-2025
Shri Durga Chalisa Path: चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए करें दुर्गा चालीसा पाठ
श्री दुर्गा चालीसा
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुँलोक में डंका बाजत॥
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तन बीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥
आभा पुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो। काम क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें। रिपु मुरख मोही डरपावे॥
शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।।
जब लगि जियऊं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
॥इति श्रीदुर्गा चालीसा सम्पूर्ण॥
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुँलोक में डंका बाजत॥
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तन बीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥
आभा पुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो। काम क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें। रिपु मुरख मोही डरपावे॥
शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।।
जब लगि जियऊं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
॥इति श्रीदुर्गा चालीसा सम्पूर्ण॥
02:59 PM, 30-Mar-2025
Chaitra Navratri 2025 Wishes
- फोटो : अमर उजाला
मंगलमय कामनाओं के साथ
आप और आप के परिवार को नवरात्रि की हार्दिक मंगल कामनाएं
चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
2.लक्ष्मी का हाथ हो,
सरस्वती का साथ हो,
गणेश का निवास हो,
और मां दुर्गा के आशीर्वाद से
आपके जीवन में प्रकाश ही प्रकाश हो…।
चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
3.मैंने शरण जो मां की पाई
मेरी चिंता मां ने मिटाई
नाचूं गाऊं बजाऊं मैं ताली
मेरे घर में है हर दिन दिवाली
चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
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02:41 PM, 30-Mar-2025
वास्तु दोष दूर करने के लिए करें ये उपाय
घी का दीपक जलाएं
देवी-देवताओं की आरती करते समय घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। नवरात्र के दौरान इस दीपक को दाहिने हाथ की तरफ रखें। इससे घर में मां दुर्गा का आगमन होता है और वास्तु दोष दूर होता है।
अखंड ज्योत जलाएं
नवरात्र में अखंड ज्योत जलाने का विशेष महत्व है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दीपक को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखने से घर के सभी दोष समाप्त होते हैं और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
घी का दीपक जलाएं
देवी-देवताओं की आरती करते समय घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। नवरात्र के दौरान इस दीपक को दाहिने हाथ की तरफ रखें। इससे घर में मां दुर्गा का आगमन होता है और वास्तु दोष दूर होता है।
अखंड ज्योत जलाएं
नवरात्र में अखंड ज्योत जलाने का विशेष महत्व है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दीपक को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखने से घर के सभी दोष समाप्त होते हैं और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
02:26 PM, 30-Mar-2025
नहीं रख पा रहे हैं नवरात्रि के सारे व्रत, बस कर लें ये काम
चालीसा पाठ करें
यदि व्रत नहीं रख सकते तो मां दुर्गा का ध्यान करें और दुर्गा चालीसा और सप्तशती का पाठ करें।
नौ दिनों तक जागरण करें
अगर व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो नौ दिनों तक रात में मां दुर्गा के भजन सुनें या परिवार के साथ मिलकर जागरण करें।
प्रसाद बांटें
पूजा के बाद, घर के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरण करें। यह मां दुर्गा की कृपा पाने का एक तरीका है।
01:58 PM, 30-Mar-2025
Chaitra Navratri 2025
- फोटो : freepik
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। प्रत्येक दिन एक देवी का पूजन किया जाता है, और हर देवी के स्वरूप में अलग-अलग प्रकार की शक्ति और आशीर्वाद समाहित होते हैं।
| दिन | तिथि | वार | देवी पूजा |
| प्रतिपदा | 30 मार्च 2025 | रविवार | मां शैलपुत्री |
| द्वितीया | 31 मार्च 2025 | सोमवार | मां ब्रह्मचारिणी |
| तृतीया | 31 मार्च 2025 | सोमवार | मां चंद्रघंटा |
| चतुर्थी | 1 अप्रैल 2025 | मंगलवार | मां कूष्मांडा |
| पञ्चमी | 2 अप्रैल 2025 | बुधवार | मां स्कंदमाता |
| षष्ठी | 3 अप्रैल 2025 | गुरुवार | मां कात्यायनी |
| सप्तमी | 4 अप्रैल 2025 | शुक्रवार | मां कालरात्रि |
| अष्टमी | 5 अप्रैल 2025 | शनिवार | मां महागौरी |
| नवमी | 6 अप्रैल 2025 | रविवार | मां सिद्धिदात्री |
01:50 PM, 30-Mar-2025
चैत्र नवरात्रि पर इन राशि वालों को मिल सकता है लाभ
इस बार 30 मार्च 2025 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। इससे एक दिन पहले यानी 29 मार्च को न्याय के देवता शनि मीन राशि में प्रवेश कर गए हैं। ऐसे में इन राशि वालों के लिए चैत्र नवरात्रि का समय बेहद कल्याणकारी हो सकता है।
कन्या राशि
यह समय कन्या राशि वालों के लिए और भी खास है। आपको नौकरी में सम्मान की प्राप्ति होगी। किसी नए के आने से जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। कोई अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है।
तुला राशि
नवरात्रि में आपके घर में किसी महंगी वस्तु का आगमन हो सकता है। निवेश के लिए समय शुभ रहेगा। किसी के आने से आपको विशेष लाभ होगा।
मकर राशि
नवरात्रि में देवी की कृपा से लंबे समय से अटके काम पूरे होंगे। आपको सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिलेगा। उधार दिया हुआ धन वापस मिलेगा।