Monsoon Session: सरकार बोली- साइबर अपराधियों से 2400 करोड़ से अधिक बचाए; सहारा के जमाकर्ताओं को 362 करोड़ वापस
Parliament Monsoon Session 2024 Live News in Hindi: संसद के मानसून सत्र का आज तीसरा दिन है। कल यानी मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश किया। आज संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में बजट पर चर्चा हो रही है, लेकिन बजट के खिलाफ विपक्ष के रुख के चलते सदन में हंगामा देखने को मिला।
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साइबर अपराध के मामलों में 2,400 करोड़ से अधिक बचाए
एक लिखित प्रश्न के उत्तर में गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा को अहम जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और धोखेबाजों की ओर से धन की हेराफेरी को रोकने के लिए 'सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' को स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से 7.6 लाख से अधिक साइबर अपराध मामलों में 2,400 करोड़ रुपये से अधिक की बचत की गई।
सहारा के जमाकर्ताओं को अब तक 362 करोड़ वितरित- अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को संसद में बताया कि इस वर्ष 16 जुलाई तक सहारा समूह की सहकारी समितियों के 4.2 लाख से अधिक जमाकर्ताओं को 362.91 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। शाह ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि यह वितरण सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल के माध्यम से सुगम बनाया गया है, जिसे 29 मार्च, 2023 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्थापित किया गया था। वर्तमान में, आधार से जुड़े बैंक खाते के माध्यम से सत्यापित दावों के खिलाफ प्रत्येक वास्तविक जमाकर्ता को केवल 10,000 रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है।
प्रेस की स्वतंत्रता का मूल्यांकन करने वाले संस्थानों की कार्य प्रणाली विश्वसनीय नहीं- अश्विनी वैष्णव
केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि दुनिया भर में प्रेस की स्वतंत्रता का मूल्यांकन करने वाले संस्थानों की कार्य प्रणाली विश्वसनीय नहीं है। लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय मंत्री ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कुछ संस्थानों ने बहुत कम उदाहरणों का इस्तेमाल कर भारत में प्रेस की स्वतंत्रता का मूल्यांकन किया है। वैष्णव के अनुसार, मूल्यांकन से साफ पता चलता है कि ऐसे संस्थानों को भारत के लोकतंत्र की समझ नहीं है। ऐसे संस्थानों की कार्य प्रणाली भरोसा करने लायक नहीं है। आपको बता दें कि एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में भारत को 180 देशों में 159वें स्थान पर रखा है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि भारत सरकार संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्या सिर्फ दो राज्यो के लिए था बजट?- कुमारी सैलजा
कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा ने बजट को जुमलों का संग्रह करार दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सदस्यों नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को भले ही इस समयबजट से एक बड़ा हिस्सा मिला है लेकिन, बदलाव में अधिक समय नहीं लगेगा। संसद की कार्यवाही के दौरान कुमारी सैलजा ने सवाल पूछा कि यह बजट किसके लिए है? उन्होंने कहा, ‘यह बजट सिर्फ दो राज्यों के लिए था या पूरे देश पर के बारे में भी कुछ सोचा गया था? ऐसा लगता है कि बजट में भाजपा शासित दो राज्यो के बारे में ही सोचा गया।
विपक्ष पर बरसे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, ‘नीति आयोग संघीय ढांचे की महत्वपूर्ण संस्था है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ विपक्षी पार्टियां नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार करने के बारे में सोच रही हैं। विपक्षी पार्टियां यह बताना चाहती हैं कि उनकी व्यक्तिगत सोच और राजनीति देश से ऊपर है। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन इंडिया के सदस्यों को बेबुनियाद कारणों से बहिष्कार करने की आदत पड़ गई है। वे आरोप लगा रहे हैं कि कुछ राज्यों को बजट में पैसा नहीं मिला है। मुझे लगता है कि या तो उन्हें बजट पढ़ना नहीं आता या फिर वे इसे पढ़ना नहीं चाहते।’
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी का भाजपा पर निशाना
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल के 100 दिनों के कामों और आवास योजना के लिए धनराशि कब और कितनी दी? उन्होंने कहा, ‘अगर भाजपा 10 पैसे का भी प्रमाण देती है, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। मैं हजारों बार कह चुका हूं कि भाजपा को एक श्वेत पत्र में इस बात की जानकारी देनी चाहिए कि उन्होंने बीते तीन वित्त वर्षों में बंगाल के लिए क्या 10 पैसा भी दिया।’
बजट में स्पष्ट रूप से भेदभाव- मनीष तिवारी
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का कहना है कि अगर बजट में कोई भेदभाव नहीं है तो एक बार फिर से शब्दकोष में जाकर 'भेदभाव' शब्द का अर्थ जांचना होगा। उन्होंने कहा, ‘बजट में स्पष्ट रूप से भेदभाव नजर आ रहा है। यह एक ऐसा बजट है जो मौजूदा एनडीए सरकार की मजबूरियों का संकेत है।’
किसान नेताओं ने राहुल गांधी से की मुलाकात
किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के तत्वावधान में देशभर से 12 किसान नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल आज संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिला। बैठक में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा, गुरजीत सिंह औजला, धर्मवीर गांधी, डॉ. अमर सिंह, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और जय प्रकाश भी मौजूद थे। किसान नेताओं से मुलाकात के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, 'हमने अपने घोषणापत्र में कानूनी गारंटी के साथ MSP का जिक्र किया है। हमने आकलन किया है और इसे लागू किया जा सकता है। हमने अभी एक बैठक की, जिसमें तय किया गया कि हम INDIA गठबंधन के दूसरे नेताओं से बात करेंगे और सरकार पर दबाव डालेंगे कि देश के किसानों को MSP की कानूनी गारंटी दी जाए।'#WATCH किसान नेताओं से मुलाकात के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, "हमने अपने घोषणापत्र में कानूनी गारंटी के साथ MSP का जिक्र किया है। हमने आकलन किया है और इसे लागू किया जा सकता है। हमने अभी एक बैठक की, जिसमें तय किया गया कि हम INDIA गठबंधन के दूसरे नेताओं से बात… pic.twitter.com/0IIiqM5xir
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 24, 2024
लोकसभा में उठा गुजरात में चांदीपुरा वायरस के प्रकोप का मुद्दा
गुजरात में चांदीपुरा वायरस से अब तक 37 बच्चों की मौत होने का दावा करते हुए कांग्रेस की सांसद गनीबेन नगाजी ठाकोर ने केंद्र सरकार से इस विषाणु के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जल्द से जल्द सख्त कदम उठाने की मांग की और कहा कि इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो दोबारा कोरोना महामारी जैसी भयानक स्थिति पैदा हो सकती है।ठाकोर ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा, ‘मेरे संसदीय क्षेत्र बनासकांठा समेत पूरे गुजरात में इस समय चांदीपुरा वायरस का संक्रमण खतरनाक रूप लेता जा रहा है। गुजरात के अलग-अलग जिलों में अब तक 84 मामले इस वायरस के संक्रमण के आ चुके हैं। इससे अब तक 37 बच्चों की जान जा चुकी है।’ उन्होंने कहा कि आंकड़ों को देखें तो ऐसा लगता है कि इस वायरस से संक्रमित 100 में से केवल 15 प्रतिशत मरीजों को ही बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गुजरात के अहमदाबाद, वड़ोदरा, सूरत और बनासकांठा समेत अधिकतर जिलों में इस वायरस का प्रकोप देखने को मिल रहा है जो दिन प्रतिदिन घातक हो