Budget Session: कर्नाटक में आरक्षण मुद्दे पर दोनों सदनों में हंगामा; विपक्ष ने GST को सरल बनाने पर दिया जोर
Parliament Budget Session Updates In Hindi: संसद के बजट सत्र में आज दोनों सदनों में कर्नाटक में आरक्षण के मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला। वहीं इस हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर तीन बजे ही कल तक के लिए स्थगित हो गई। जबकि लोकसभा की कार्यवाही शाम आठ बजे कल तक के लिए स्थगित हुई।
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लोकसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित
लोकसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित।#LokSabha की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित.#BudgetSession2025 pic.twitter.com/Itfn8ix47I
— SansadTV (@sansad_tv) March 24, 2025
विपक्षी सदस्यों ने सोमवार को सरकार से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को सरल बनाने और कम करने की मांग की, क्योंकि इससे गरीबों पर बोझ पड़ रहा है। वित्त विधेयक 2025 पर बहस में भाग लेते हुए, सुप्रिया सुले (एनसीपी-एसपी) ने कहा कि जीएसटी में बहुत सारे सुधार की जरूरत है, और दरों को कम करने की जरूरत है।
वित्त मंत्री को जवाब देना चाहिए कि भारत कब 'एक राष्ट्र एक कर' बन जाएगा, क्योंकि वर्तमान जीएसटी व्यवस्था में कई स्लैब हैं, उन्होंने लोकसभा में कहा। वहीं अमेरिका की तरफ से प्रस्तावित शून्य टैरिफ नीति पर, सुले ने कहा कि सरकार को कृषि उपज पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। अमेरिका ने 2 अप्रैल से पारस्परिक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है, इस कदम से भारत के कृषि और दवा उत्पादों के निर्यात को नुकसान पहुंचने की संभावना है। ये ऐसे उत्पाद हैं जिनका अमेरिका के साथ उच्च टैरिफ अंतर है।
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, 'भारत जिस आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, उससे निपटने के लिए हमें वित्त मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण की नहीं, बल्कि मनमोहन सिंह की जरूरत है।'
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को उन सुझावों पर सवाल उठाया कि कर्नाटक सरकार मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण पर विचार कर रही है, उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हाल ही में सरकारी अनुबंधों में मुसलमानों को आरक्षण की सुविधा देने के लिए संविधान में बदलाव करने का सुझाव दिया था।
यह मुद्दा सोमवार को लोकसभा में गूंजा और सत्तारूढ़ भाजपा ने इस विचार पर सवाल उठाया और शिवकुमार को हटाने की मांग की। यहां राज्यसभा के प्रशिक्षुओं के एक समूह को संबोधित करते हुए और कर्नाटक का नाम लिए बिना धनखड़ ने कहा कि "एक राज्य" ने संकेत दिया है कि वह "किसी विशेष समुदाय, धार्मिक संप्रदाय के व्यवसाय के क्षेत्र में आने वाले अनुबंधों" के लिए आरक्षण देगा।
राज्यसभा के अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति ने कहा, 'अब संवैधानिक प्रावधानों को देखें। क्या हमारा संविधान धार्मिक विचारों पर किसी आरक्षण की अनुमति देता है? पता करें कि बी आर अंबेडकर ने क्या कहा था, और आपको पता चल जाएगा कि धार्मिक विचारों पर कोई आरक्षण नहीं हो सकता है।' धनखड़ ने कहा कि संविधान में अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए एक सकारात्मक तंत्र प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि संविधान में संशोधन किया गया और आर्थिक मानदंड को आधार बनाया गया, जिसे बाद में अदालतों ने बरकरार रखा।
भाजपा धर्म के आधार पर कानून बना रही है- खरगे
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के संविधान पर दिए गए कथित बयान पर भाजपा के विरोध पर कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, 'भाजपा धर्म के आधार पर कानून बना रही है। हमने कभी धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया...आज बिना किसी कारण के इस मुद्दे को उठाकर सरकार अपने भ्रष्टाचार के मामलों को छिपाना चाहती है...हमारी कांग्रेस पार्टी और कर्नाटक की अन्य पार्टियों ने मिलकर 1994 में शुरू किए गए आरक्षण को स्वीकार किया। तब से वह आरक्षण चला आ रहा है...आज तक जारी है। लेकिन उनकी समस्या क्या है? उनकी समस्या यह है कि हमारी 5 गारंटी कर्नाटक में लोगों तक पहुंच रही है और इसलिए वे बहुत दुखी हैं कि कांग्रेस की लोकप्रियता बढ़ रही है'।#WATCH | On BJP's protest over Karnataka Deputy CM DK Shivakumar's reported statement on the Constitution, Congress chief Mallikarjun Kharge says, "...BJP is making laws on the basis of religion. We have never given reservation on the basis of religion...by raising this issue… pic.twitter.com/o9IUZuRdcF
— ANI (@ANI) March 24, 2025
जेपी नड्डा और खरगे के साथ जगदीप धनखड़ की बैठक
राज्यसभा में पक्ष के नेता जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के साथ बैठक के बाद, उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, 'हमने न्यायपालिका के मन में उठ रहे मुद्दे पर सार्थक विचार-विमर्श किया। स्वतंत्रता के बाद यह पहली बार है कि किसी मुख्य न्यायाधीश ने पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से अपने पास उपलब्ध सभी सामग्री को सार्वजनिक डोमेन में रखा है और न्यायालय के साथ कुछ भी छिपाए बिना इसे साझा किया है...खरगे जी की ओर से एक बहुत ही विचारशील सुझाव आया कि संसदीय परंपरा के अनुरूप, इस मुद्दे पर सदन के नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया जाना चाहिए और सुझाव को उचित पाते हुए तथा हम तीनों की पूर्ण स्वीकृति के बाद, तदनुसार एक बैठक निर्धारित की जाएगी, जिसमें मैं राज्य सभा के सदन के नेताओं को इस पर विचार करने के लिए आमंत्रित करूंगा...'।#WATCH | After his meeting with Leader of the House (Rajya Sabha) JP Nadda and LoP (Rajya Sabha) Mallikarjun Kharge, Vice-President and Chairman, Rajya Sabha Jagdeep Dhankhar said, "We had meaningful deliberation about the issue that is agitating the mind of Judiciary. It is for… pic.twitter.com/inHI9vV5xm
— ANI (@ANI) March 24, 2025