आज के समय में अधिकतर लोग स्वास्थ्य की वजह से परेशान रहते हैं। हर व्यक्ति को किसी न किसी बीमारी की वजह से काफी कुछ झेलना पड़ता है। हालांकि इस परेशानी की जड़ आपकी अस्त-व्यस्त जीवनशैली ही है। ऐसे में जीवनशैली को सुधारने की जरूरत तो है ही साथ में, अस्पताल के चक्कर न काटने पड़े इसके लिए आप योग अपनाएं। जिन लोगों को खर्राटे और थायरॉइड की समस्या है उनके लिए हम बाबा रामदेव का एक ऐसा योग बताने जा रहे हैं, जिसको नियमित करने पर खुद असर दिखने लगेगा।
पहला तरीका-सुखासन में बैठ कर मुंह को बंद करके नाक के दोनों छेद से तब तक सांस अन्दर खींचें जब तक फेफड़े हवा से पूरी तरह भर न जाएं। फिर कुछ देर सांस अंदर रोक कर रखें। शुरुआत में जितना हो सके उतना ही करें। इसे धीरे-धीरे 1 से 2 मिनट तक कर सकते हैं।
फिर नाक के दाएं छिद्र को बंद करके बाएं छिद्र से वायु को धीरे-धीरे बाहर निकाल दें। वायु को अंदर खींचते व बाहर छोड़ते समय गले से खर्राटें की आवाज निकलनी चाहिए। इस तरह इस क्रिया का पहले 5 बार अभ्यास करें और धीरे-धीरे अभ्यास की संख्या बढ़ाते हुए 20 बार तक ले जाएं।
दूसरा तरीका- गले को सिकोड़ कर सांस इस प्रकार लें व छोड़ें की इस क्रिया की आवाज आए। पांच से दस बार सांस इसी प्रकार लें और छोड़ें। फिर इसी प्रकार से सांस अंदर भरकर गले को सिकोड़ना शिथिल करें और फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ दें।
उज्जयी प्राणायाम के लाभ
शास्त्रों में बताया गया है कि नियमित रूप से उज्जयी प्राणायाम का अभ्यास करने से लंबे समय तक उम्र का प्रभाव नहीं पड़ता है। यह थाइरोइड रोगियों के लिए बहुत उपयुक्त प्राणायाम है। इसे करने से गर्दन में मौजूद पैराथाइरॉइड भी दूरुस्त रहता है। यह प्राणायाम मस्तिष्क से गर्मी दूर कर आराम पहुंचाता है। इसके नियमित अभ्यास से पाचन शक्ति बढ़ती है। यह गले से बलगम को हटाता है और फेफड़े की बीमारियों को रोकता है। यह हृदय रोगियों के लिए बहुत अच्छा प्राणायाम है। इसे करने से खर्राटों की समस्या भी दूर हो जाती है।