याद्दाश्त बढ़ाने के साथ ही कई सारे फायदों का एक साथ लाभ उठाने के लिए जरूर करें ये आसन
सिर के बल किए जाना वाला आसन शीर्षासन कहलाता है। शीर्षासन कई सारी समस्याओं का एक इलाज है। मानसिक समस्याओं में तो यह बहुत ही प्रभावशाली है। युवावस्था में शीर्षासन जरूर करना चाहिए। इसके अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है, साथ ही शरीर का पॉश्चर भी अच्छा रहता है। दिल व सांस संबंंधी समस्याओं का समाधान भी शीर्षासन से होता है। आइए जानते हैं शीर्षासन से जुड़ी अन्य लाभदायक जानकारी।
शीर्षासन करने का तरीका-
शीर्षासन करने के लिए घुटनों को जमीन पर टिका दें। अब अपने दोनों हाथों को जमीन पर मजबूती से रखें। सिर को अपने दोनों हाथों के बीच में लाएं। अब धीरे-धीरे अपने पैरों की उंगलियों को जमीन से ऊपर की तरफ उठाएं। फिरअपने पैरों को ऊपर की ओर बढ़ाएं। उन्हें जमीन से ऊपर बिल्कुल सीधा रखें। समान रूप से बाजुओं पर अपने वजन को संभालें। इस बीचअपनी पीठ को एकदम सीधा रखें। कम से कम 20-30 सेकंड के लिए इस मुद्रा में रहें। साथ में लंबी गहरी सांस को लेते और छोड़ते रहना है।
नोट- यदि आप पहली बार शीर्षासन करने जा रहे हैं, तो दिवार का सपोर्ट या किसी व्यक्ति की मदद लेकर इस योगासन को पहले ट्राई करें और फिर धीरे-धीरे करने की आदत डालें।
शीर्षासन के लाभ-
शीर्षासन करने से सिर में रक्तसंचार बढ़ता है, जिससे कि मस्तिष्क अच्छे से कार्य करने लगता है और सभी इन्द्रिय-अंगों (आंख, कान,नाक आदि) के लिए लाभप्रद है। यह याददाश्त को सुधारने के साथ ही एकाग्रता को बढ़ाता है। महिलाओं में रजोनिवृत्ति से संबधित समस्याओं को भी यह सुधारता है। शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ ही मानसिक सुकून भी पहुंचाता है।
शीर्षासन करते वक्त न करें ये गलतियां-
कोहनी बहुत चौड़ी रखना
कंधों के पीछे कूल्हों को लाना
सिर का गलत स्थान
हाथ और पैरों में समान्य गैप न रखना
श्वास का बहुत तेज होना
स्पाइनल पर अधिक भार देना
सावधानी-
महिलाएं रजोधर्म की अवधि में शीर्षासन न करेंं। यदि उच्च रक्तचाप की समस्या है, बार-बार चक्कर आते हैं तब भी इसे करने से बचें। गर्दन और रीढ़ संबंधी समस्याओं में बिना किसी योग प्रशिक्षक की मौजूदगी में इसका अभ्यास करने से बचें।