{"_id":"5bab60fa867a557f5f41a276","slug":"benefits-of-doing-makara-mudra","type":"story","status":"publish","title_hn":"नींद न पूरी होने से आंखों के नीचे पड़ गए हैं काले गड्ढे, इस मुद्रा को करने से होगा जादुई असर","category":{"title":"Yoga and Health ","title_hn":"योग","slug":"yoga-and-health"}}
नींद न पूरी होने से आंखों के नीचे पड़ गए हैं काले गड्ढे, इस मुद्रा को करने से होगा जादुई असर
ऊर्जा डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 27 Sep 2018 10:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शरीर में रक्त संचार ठीक न होने की वजह से आंखों के आसपास की त्वचा ढीली पड़ने लगती है, जिसकी वजह से वहां डार्क सर्कल दिखाई देने लगते हैं। अगर आप भी डार्क सर्कल से परेशान हैं, तो इस जादुई मुद्रा के अभ्यास से इन्हें ठीक किया जा सकता है।इसका प्रतिदिन एक महीने तक अभ्यास करने पर आप खुद अपने चेहरे पर फर्क महसूस कर पाएंगे।
रक्त संचार ठीक न होने और पृथ्वी तत्व की कमी से आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स बनने लगते हैं। मकर मुद्रा लौह-तत्व या रक्त की कमी को दूर कर डार्क सर्कल्स से मुक्ति दिलाती है। यह मुद्रा एरोमाथेरेपी का काम करती है। दाईं हथेली को बाईं हथेली के नीचे तिरछा करके रखें।
दाईं हथेली के अंगूठे को बाईं हथेली की कनिष्ठा और अनामिका उंगलियों के बीच से निकालकर बाईं हथेली के बीच में लगाएं। बाईं हाथ के अंगूठे और अनामिका के अग्रभाग को मिला लें। इसी प्रकार बाईं हाथ को भी नीचे रखकर यह मुद्रा बनाएं। इसे धीमी-लंबी-गहरी सांस के साथ रोजाना 5 से 10 मिनट के लिए दिन में तीन बार दोनों हाथों से बारी-बारी से करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
रक्त संचार ठीक न होने और पृथ्वी तत्व की कमी से आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स बनने लगते हैं। मकर मुद्रा लौह-तत्व या रक्त की कमी को दूर कर डार्क सर्कल्स से मुक्ति दिलाती है। यह मुद्रा एरोमाथेरेपी का काम करती है। दाईं हथेली को बाईं हथेली के नीचे तिरछा करके रखें।
विज्ञापन
दाईं हथेली के अंगूठे को बाईं हथेली की कनिष्ठा और अनामिका उंगलियों के बीच से निकालकर बाईं हथेली के बीच में लगाएं। बाईं हाथ के अंगूठे और अनामिका के अग्रभाग को मिला लें। इसी प्रकार बाईं हाथ को भी नीचे रखकर यह मुद्रा बनाएं। इसे धीमी-लंबी-गहरी सांस के साथ रोजाना 5 से 10 मिनट के लिए दिन में तीन बार दोनों हाथों से बारी-बारी से करें।
विज्ञापन