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Valmiki Jayanti 2024: आज है महाकाव्य रामायण रचयिता ऋषि वाल्मीकि की जयंती, उनकी दृष्टि से देखिए श्रीराम की छवि

Thu, 17 Oct 2024 09:24 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Thu, 17 Oct 2024 09:24 AM IST
सार

अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि के मुताबिक इस साल प्रकट दिवस यानी वाल्मीकि जयंती 17 अक्तूबर 2024 को मनाई जा रही है। वाल्मीकि जंयती के शुभ अवसर पर जानिए वाल्मिकी जी के अनुसार प्रभु श्री राम कैसे दिखते होंगे।
 

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Valmiki Jayanti 2024 Date kab hai valmiki jayanti who wrote Ramayana
वाल्मीकि जयंती 2024 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Valmiki Jayanti 2024 Date : ऋषि वाल्मीकि जी को संस्कृत रामायण का रचियता माना गया है। उन्हें आदिकवि के नाम से भी जाना जाता है। ऋषि वाल्मीकि ने जिस रामायण की रचना की वो वाल्मीकि रामायण के नाम से जानी जाती है। उन्होंने पहले महाकाव्य की रचना की जिसे रामायण के नाम से जानते हैं।

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ऐसा माना जाता है कि अपने वनवास के समय भगवान श्री राम  वाल्मीकि के आश्रम भी गए थे। वाल्मीकि जी को भगवान राम के जीवन मे घटित घटनाओं की जानकारी थी। कहा जाता है कि ऋषि वाल्मीकि को तीनों कालों सतयुग, त्रेता और द्वापर का ज्ञान था। महाभारत काल मे भी वाल्मीकि जी का उल्लेख मिलता है।
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महर्षि वाल्मीकि का जन्म अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। वाल्मीकि जयंती को प्रकट दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग सभा करते हैं और शोभा यात्रा निकालते हैं। उनके मंदिर को सजाया जाता है और उत्साह के साथ वाल्मीकि जयंती मनाते हैं। अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि के मुताबिक इस साल प्रकट दिवस यानी वाल्मीकि जयंती 17 अक्तूबर 2024 को मनाई जा रही है। वाल्मीकि जंयती के शुभ अवसर पर जानिए वाल्मिकी जी के अनुसार प्रभु श्री राम कैसे दिखते होंगे।

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मुख, आंखे और बाल

ऋषि वाल्मीकि जी कहते है कि भगवान राम का चेहरा चंद्रमा की तरह चमकदार और सुंदर है। उनकी आंखों की तुलना कमल से की गई। आंखों के कोणों के ताम्र रंग को ताम्राक्ष और लोहिताश के रूप में व्यक्त किया है। ऋषि वाल्मीकि के अनुसार भगवान श्री राम के बाल लंबे और घने थे।


नाक और कान

ऋषि वाल्मीकि के अनुसार, भगवान राम की नाक उनके चेहरे की तरह लंबी और सुडौल थी। उन्होंने भगवान राम को महानासिका वाला बताया है। महानासिका से तात्पर्य उन्नत और दीर्घ नासिका से है। वहीं प्रभु श्री राम के कानों के लिए उन्होंने टीकारों ने चतुर्दशसमद्वन्द और दशवृहत् जैसे शब्दों का प्रयोग किया है। जिसका अर्थ है कानों का सम और बड़ा होना। वाल्मीकि ने उनके कानों के लिए शुभ कुंडलों का प्रयोग भी किया है।


हाथ और चरण

महर्षि वाल्मीकि के अनुसार, प्रभु के हाथ के अंगूठे में चारों वेदों की प्राप्ति सूचक रेखा थी, जिसके चलते उन्हें चतुष्फलक कहा गया है। राम के चरणों के लिए चतुर्दशसमद्वन्द्व और दशपदम विश्लेषण का प्रयोग हुआ है यानी श्रीराम के चरण सम और कमल के समान बताए गए हैं।

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