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Vrindavan Tourist Places: ये हैं वृंदावन के छह अद्भुत स्थल, जो कृष्ण लीलाओं के हैं साक्षी

Sat, 18 Jan 2025 05:45 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sat, 18 Jan 2025 05:45 PM IST
सार

वृंदावन की संकरी गलियों में स्थित राधैा श्याम सुंदर मंदिर, भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए अद्वितीय स्थान है। इस मंदिर की स्थापना श्री श्यामानंद जी ने की थी।

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Vrindavan Tourist Places To Visit Cultural And Historical Places in Vrindavan Mandir
Prem mandir - फोटो : Instagram

विस्तार

गोकुल-वृंदावन भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का साक्षी है। वृंदावन की हर गली और नुक्कड़ में उनकी लीलाओं को आज भी महसूस किया जा सकता है। श्रीकृष्ण से जुड़ी ये नगरी अनगिनत अद्भुत स्थलों से भरी हुई है। यहां ऐसे स्थान भी हैं जो प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शामिल हैं, साथ ही इन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता अत्यधिक है। आइए जानते हैं वृंदावन के 6 अनमोल स्थलों के बारे में, जो एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करते हैं।

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1. राधा श्यामसुंदर मंदिर

वृंदावन की संकरी गलियों में स्थित राधैा श्याम सुंदर मंदिर, भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए अद्वितीय स्थान है। इस मंदिर की स्थापना श्री श्यामानंद जी ने की थी। यह राधा रानी का प्रिय मंदिर है, जहां उनकी विशेष कृपा मानी जाती है। मंदिर में श्री श्याम सुंदर की विग्रह को राधारानी ने स्वयं श्यामानंद जी को भेंट किया था, यह ऐतिहासिक तथ्य इस स्थान को विशेष बनाता है। यहाँ के अलौकिक श्रृंगार और पूजा अनुष्ठान इस मंदिर को और भी अद्भुत बनाते हैं।
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क्या करें जब आप यहां जाएं

इस मंदिर की चार परिक्रमा करें, जिससे भक्त राधा रानी के चरणों की प्राप्ति कर सकें। साथ ही यहाँ होने वाले दिव्य श्रृंगार के दर्शन अवश्य करें, जो अत्यंत मनोहारी होते हैं।
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2. सेवा कुंज

वृंदावन के बीचोबीच स्थित सेवा कुंज स्थल भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र है। यह स्थल भगवान श्रीकृष्ण की रास स्थली के रूप में जाना जाता है और यहाँ रात के समय प्रवेश निषेध है। इसके पीछे मान्यता है कि रात्रि के समय श्रीकृष्ण और राधा रानी यहां अपनी लीलाएं करते हैं। यहाँ पर श्रीकृष्ण ने श्रीमती राधारानी के पांव दबाए थे, जिससे इसका नाम सेवा कुंज पड़ा। ऐतिहासिक दृष्टि से यह स्थान वैष्णव भक्तों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

क्या करें जब आप यहां जाएं

सुबह 5:30 बजे मंगला आरती में शामिल हों, जहाँ आपको श्रीकृष्ण और राधारानी के द्वारा उपयोग किए गए बिस्तर, पान, और दातुन के दर्शन होंगे। इस अनमोल अवसर का आनंद लें और अपनी भक्ति को गहराई दें।

3. वृंदावन चंद्रोदय मंदिर

ये स्थान वृंदावन के प्रमुख क्षेत्र में स्थित है। यह मंदिर आने वाले समय में दुनिया का सबसे ऊँचा मंदिर बनने जा रहा है। वृंदावन चंद्रोदय मंदिर, भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके प्रति समर्पण के प्रतीक के रूप में तैयार हो रहा है। इसका निर्माण इस उद्देश्य से किया जा रहा है कि दुनियाभर में भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का प्रसार हो। यहाँ की आधुनिक तकनीक और भव्य स्थापत्य इसे भविष्य में एक प्रमुख धार्मिक केंद्र बनाएगी।

क्या करें जब आप यहां जाएं

मंदिर की अद्भुत संरचना का अनुभव करें और यहां बनने वाले आध्यात्मिक केंद्र की जानकारी प्राप्त करें। भविष्य में यहाँ बनने वाले थीम पार्क और सांस्कृतिक केंद्र भी आपकी यात्रा को और खास बनाएंगे।

4. राधा गोकुलानंद मंदिर

वृंदावन की पुरानी गलियों में स्थित यह मंदिर एक अनूठी आध्यात्मिक धरोहर है। इस मंदिर में ठाकुर राधा गोकुलानंद, राधा विजय गोविंद और राधा विनोदिलाल जी की अद्भुत विग्रह हैं। इसके साथ ही यहाँ श्री चैतन्य महाप्रभु की लकड़ी से बनी विग्रह और उनका अंगूठे का निशान भी स्थापित है। इसके अतिरिक्त, यहाँ पर कई महान वैष्णव आचार्यों की समाधियां भी स्थित हैं, जिन्होंने राधा-कृष्ण की भक्ति में अपना जीवन समर्पित किया।


क्या करें जब आप यहां जाएं

आचार्यों की समाधि पर भजन और कीर्तन करें। यहाँ की भक्ति ऊर्जा और ध्यान से आप अपने आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध कर सकते हैं।

5. श्री चैतन्य महाप्रभु की बैठक (विश्राम वाट)

वृंदावन परिक्रमा मार्ग पर स्थित यह स्थल भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह स्थान वह पवित्र स्थल है जहां श्री चैतन्य महाप्रभु ने विश्राम किया था और अपने भक्तों के साथ राधा-कृष्ण के गुण गाए थे। यहाँ जगन्नाथ जी की अद्वितीय विग्रह के दर्शन होते हैं, जो अन्यत्र दुर्लभ हैं। यह स्थान वैष्णव परंपरा में एक विशेष स्थान रखता है, और यहाँ पर श्री चैतन्य महाप्रभु की भक्ति और प्रेम की गहराई को अनुभव किया जा सकता है।

क्या करें जब आप यहां जाएं

यहां जगन्नाथ जी के दुर्लभ दर्शन करें और इस आध्यात्मिक स्थल की परिक्रमा करें। यहाँ पर श्री चैतन्य महाप्रभु की उपस्थिति का अनुभव करें और भक्तिमय माहौल का आनंद लें।

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