यात्राएं हमारे जीवन में नए-नए अनुभव जोड़ती है। घुमक्कड़ी की आदत न केवल अलग-अलग भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं से आपका परिचय कराती है, बल्कि हर बार यह आपके अनुभवों में एक अलग अध्याय जोड़ती है। देश की सबसे प्राचीन नगरों में शामिल वाराणसी की यात्रा करना अपने आप में एक अनूठा अनुभव होता है। अगर आप वाराणसी जाएं तो अपनी लिस्ट में इन जगहों को जरूर शामिल करें, वरना आपकी यात्रा अधूरी रह जाएगी।
इन जगहों पर घूमे बगैर अधूरी है आपकी काशी यात्रा, अपनी ट्रैवल डायरी में जरूर शामिल करें
वाराणसी को बाबा विश्वनाथ की नगरी कहा जाता है। यह बनारस और काशी के नाम से भी प्रसिद्ध है। यहां की संकरी गलियों में घूमने का अलग ही रोमांच होता है। बनारस के घाटों का नजारा तो अद्भुत होता है। खासकर नावों पर गंगा महाविहार करते हुए महाआरती देखना लोगों के जीवन का यादगार पल बन जाता है। खासकर दशाश्वमेध घाट की आरती का दृश्य अनुपम होता है। कोई वाराणसी जाए और इन जगहों पर नहीं घूमे, तो फिर क्या ही घूमे।
मंदिरों के शहर वाराणसी में लगभग हर सड़क और गली में आपको एक मंदिर जरूर मिल जाएगा। हालांकि घाट किनारे कई ऐसे ऐतिहासिक मंदिर हैं, जो अपनी बनावट, खूबसूरती और पौराणिकता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यहां आकर लोग काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने जरूर पहुंचते हैं। भगवान भोलेनाथ के इस मंदिर की छत पर सोना मढ़ा हुआ है। इसके अलावा लोग संकट मोचन मंदिर, दुर्गा मंदिर और भारत माता मंदिर भी जाना नहीं भूलते।
गंगा में डुबकी नहीं लगाई तो...
गंगा किनारे बसे वाराणसी को घाटों का शहर भी कहा जाता है। यहां यूं तो कुल 84 घाट हैं, लेकिन दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और मणिकर्णिका घाट का ज्यादा महत्व है। श्रद्धालु यहां पवित्र नदी गंगा में डुबकी लगाकर मोक्ष की कामना करते हैं। गंगा घाटों पर मन को अलग ही शांति मिलती है। आपको ऐसा लगेगा जैसे आपकी चिंता दूर हो रही है। गंगा में बोट राइडिंग का भी अलग ही मजा है।
अगर आप भीड़भाड़ से दूर जाना चाहते हैं और सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं तो आप सारनाथ जा सकते हैं। बौद्धों का तीर्थस्थल सारनाथ वाराणसी से 10 किमी की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश यहीं पर दिया था। सारनाथ के आसपास कई खूबसूरत स्तूप और मंदिर भी हैं।