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लंदन: पूरी दुनिया में चर्चित है बिना कर्मचारियों का मेट्रो स्टेशन

Sat, 03 Nov 2018 01:25 PM IST
भूपेंद्र कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
भूपेंद्र कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 03 Nov 2018 01:25 PM IST
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लंदन अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन - फोटो : Pixabay

लंदन शहर में अंडरग्राउंड यानी मेट्रो के निर्माण में कमाल की कारीगरी दिखती है। इसे स्थानीय लोग ट्यूब के नाम से जानते हैं। महानगर में कहीं भी आने-जाने के लिए यह सबसे सुविधाजनक तरीका है। दिलचस्प यह कि लंदन ट्यूब के स्टेशन पूरी तरह आटोमैटिक हैं, टिकट से लेकर सवार होने तक किसी कर्मचारी की जरूरत नहीं है। लंदन अंडरग्राउंड जैसा नाम से जाहिर है, इसका बड़ा हिस्सा जमीन के अंदर काफी गहराई तक बना है। लंदन अंडरगाउंड का इतिहास जानना बेहद रोचक हो सकता है। लंदन अंडरग्राउंड से आसपास के कुछ शहर जैसे बकिंघमशायर, एसेेक्स और हर्टफोर्डशायर भी जुडे़ हैं।

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लंदन अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन - फोटो : Pixabay

लंदन अंडरगाउंड का इतिहास
यह दुनिया की पहली भूमिगत रेल प्रणाली है जिसकी शुरुआत मेट्रोपोलिटन रेलवे के नाम से 1863 में हुई थी। 1890 में इलेक्ट्रिक ट्रेन की शुरुआत हुई। इसका नेटवर्क अब 11 लाइनों का है। इन लाइनों पर रोजाना करीब 48 लाख यात्री सफर करते हैं। यह दुनिया का 11वां सबसे व्यस्त मेट्रो सिस्टम है। कुल 270 स्टेशन हैं और लगभग 400 किलोमीटर लंबा पटरियों का नेटवर्क है। फिलहाल 45 फीसदी स्टेशन भूमिगत हैं। जब यह प्रणाली बनी तो अलग-अलग लाइन को अलग निजी कंपनियां चलाती थीं। 20वीं सदी की शुरुआत में इन कंपनियों को मिलाकर अंडरग्राउंड ब्रांड बनाया गया। फिलहाल इसे लंदन अंडरग्राउंड लिमिटेड चलाती है। इसे चलाने का 92 फीसदी खर्च यात्रियों के टिकटों से निकलता है।

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लंदन अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन - फोटो : Pixabay

भाप के इंजन से शुरुआत
1863 में जब अंडरग्राउंड की शुरुआत हुई तो डिब्बों में गैस से रोशनी की जाती थी और इंजन भाप से चलता था। यह डिब्बे लकड़ी के बने होते थे। पहली ट्रेन पैडिंगटन और फैरिंगडन के बीच चली थी। पहले दिन इसमें 38 हजार लोगों ने सफर किया था। लेकिन कोयले से चलने वाले इंजन से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें होनी शुरू हो गईं। इसके बाद ही बिजली के  इंजन का पहली बार 1890 में इस्तेमाल किया गया था।

लिफ्ट और एस्केलेटर
शुरू में अंडरग्राउंड के गहरे स्टेशनों में जाने के लिए लिफ्ट का ही इस्तेमाल किया जाता था। लिफ्ट में ही टिकट की भी व्यवस्था थी। बहरहाल, पहला एस्केलेटर लंदन अंडरग्राउंड में 1911 में लगाया गया। इससे यात्रियों को काफी सुविधा हो गई। 1921 में एस्केलेटर में सवाल लोगों को रिकॉर्ड की गई आवाज से सूचित किया जाता था कि वे दाईं और खड़े हों ताकि कोई स्वचालित सीढ़ियों पर तेजी से आगे निकलना चाहें तो उसे दिक्कत नहीं हो। नेटवर्क में कुल 426 एस्केलेटर हैं। सबसे लंबा एस्केलेटर 60 मीटर का एंजेल स्टेशन पर है।

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बाथ-कभी रोमन रहते थे
लंदन से लगभग दो घंटे यानी 156 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बाथ शहर की खूबसूरती देखते ही बनती है। एवन नदी की घाटी में स्थित इस शहर का पुराना इतिहास रहा है। लगभग दो हजार साल पहले रोमनों ने इस शहर को बसाया और यहां एक पूजा स्थल बनाया। यहां सल्फर युक्त गरम पानी के झरने हैं जिनके किनारे रोमनों ने हमाम बनाए। फिलहाल बाथ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। यहां की यूनिवर्सिटी काफी प्रसिद्ध है। इस शहर को म्यूजियम और गिरजाघरों के लिए भी जाना जाता है। शहर में जगह-जगह बगीचे भी हैं।

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