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आप कुंभ में पहुंच रहे हैं या अर्धकुंभ में? जानिए दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेले की ये रोचक बातें

Wed, 09 Jan 2019 03:49 PM IST
kapil sharma लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: kapil sharma Updated Wed, 09 Jan 2019 03:49 PM IST
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Kumbh Mela 2019: Know it is Full or ardh kumbh?
विश्व का यह सबसे बड़ा धार्मिक सम्मेलन 15 जनवरी से शुरू होगा और 3 मार्च तक चलेगा।
प्रयागराज में कुंभ 2019 की शुरुआत में अब कुछ ही दिन बचे हैं। विश्व का यह सबसे बड़ा धार्मिक सम्मेलन 15 जनवरी से शुरू होगा और 3 मार्च तक चलेगा। भारत के कोने-कोने से श्रद्धालु इस पवित्र सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंच रहे हैं। गंगा, यमुना और सरस्वती नदी के पावन तट पर लगने वाले कुंभ मेले में श्रद्धालु इस मान्यता के साथ आते हैं कि वो एक बार पवित्र जल में स्नान कर लें तो उनके समस्त पाप दूर हो जाएंगे और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी। लेकिन, इस बार मोक्ष की प्राप्ति के साथ ही श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि वो कुंभ में जा रहे हैं या अर्धकुंभ में... 
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Kumbh Mela 2019: Know it is Full or ardh kumbh?
भारत में तीन तरह के कुंभ लगते हैं।
ये कुंभ है या अर्धकुंभ!
कुंभ हिंदू धर्म का सबसे पुराना और पवित्र धार्मिक मेला है। भारत में तीन तरह के कुंभ लगते हैं। ये कुंभ, महाकुंभ और अर्धकुंभ के नाम से जाने जाते हैं। वैसे तो इस बार प्रयागराज में लगने वाला धार्मिक मेला अर्धकुंभ है लेकिन यूपी सरकार ने अर्धकुंभ का नाम बदलकर कुंभ रखा दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में ही कुंभ का लोगो जारी करते हुए अर्धकुंभ का नाम कुंभ रखा था। इससे पहले तक हर छह साल में लगने वाला धार्मिक मेला अर्धकुंभ कहलाता था।

 
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Kumbh Mela 2019: Know it is Full or ardh kumbh?
कुंभ आस्था और परंपरा का मामला है
क्या है अर्धकुंभ को कुंभ करने का तर्क?
12 दिसंबर 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुंभ का लोगो जारी किया और अर्धकुंभ का नाम कुंभ करने की घोषणा की। 22 दिसंबर को यूपी सरकार विधानसभा में 'प्रयागराज मेला अथॉरिटी बिल' पेश किया। अर्धकुंभ को कुंभ करने पर योगी सरकार को विपक्ष की आलोचना भी झेलनी पड़ी। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने यहां तक कहां की सरकार को अर्धकुंभ पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह इतिहास और परंपरा का मामला है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता गोविंद चौधरी ने तो इसे वेद और अन्य पवित्र शास्त्रों का उल्लंघन बताया था। इस पर सूबे की बीजेपी सरकार का कहना था कि कुंभ आस्था और परंपरा का मामला है और किसी भी पार्टी और सरकार से इसका कोई नाता नहीं है। भारत के कोने-कोने से और विदेशों से ज्यादा से ज्यादा लोग इस धार्मिक मेल में आ सकें इसके लिए अर्धकुंभ का नाम कुंभ किया गया है।
 
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Kumbh Mela 2019: Know it is Full or ardh kumbh?
कुंभ का शाब्दिक अर्थ कलश होता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना था कि हिंदू दर्शन में कुछ भी अधूरा नहीं है। इसलिए अर्ध शब्द फिट नहीं बैठता है।  हालांकि कई साधु-संतों को भी अर्धकुंभ को कुंभ बुलाना में एतराज है और उनका मानना है कि कुंभ, कुंभ की जगह और अर्धकुंभ, अर्धकुंभ की जगह रहेगा। दरअसल, अर्धकुंभ हर छह साल और कुंभ 12 साल में होता है जबकि महाकुंभ 144 साल में होता है। 

क्या होता है कुंभ का अर्थ?
भारतकोश के मुताबिक, कुंभ का शाब्दिक अर्थ कलश होता है। कलश के मुख को भगवान विष्णु, गर्दन को रुद्र, आधार को ब्रह्मा, बीच के भाग को समस्त देवियों और अंदर के जल को संपूर्ण सागर का प्रतीक माना जाता है। यानी कुंभ हमारी सभ्यता और सभ्यता का संगम है।

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