अमेरिकी लड़की ने अकेले ही घूम लिए 196 देश, जानें क्या होती है सोलो ट्रैवलिंग
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घूमने-फिरने का शौक किसे नहीं होता। आज के समय में ट्रैवल शौक बनता जा रहा है और युवाओं के बीच सोलो ट्रैवल क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा है। अगर घूमना बिना पैसे का हो तो फिर क्या ही कहने। लेकिन दुनिया घूमने का शौक रखने वाली एक लड़की ऐसी भी है जो घर से अकेली पूरी दुनिया घूमने अकेली निकली और उसने तकरीबन 196 देशों को घूम लिया। खास बात यह थी कि यात्रा के दौरान उसके पैसे खत्म हो गए लेकिन उसने अपना सफर खत्म नहीं किया। आइए जानते है आखिर कौन है वह साहसी लड़की और कैसे अकेले ही घूम ली उसने पूरी दुनिया।
कैसी 29 साल की अमेरिकन लड़की है। पेशे से कैसी लेखक और ट्रेवलर है। कैसी दुनिया के हर कोने में घूमना चाहती है। 18 महीनों में 196 देशों में घूमने वाली कैसी का कहना है अभी तो यात्रा की शुरूआत हुई है। यह खत्म कहां होगी यह मुझे भी नहीं पता। इसके साथ ही सबसे तेज ट्रैवलर का रिकॉर्ड बना भी बना चुकीं है। कैसी ने अपने टूर के दौरान 40 देशों में 16 हजार यूनिवर्सिटी का दौरा किया है। अलग-अलग देशों के बच्चों से मिलना कैसी के लिए अच्छा अनुभव रहा; हालांकि इतनी लंबी यात्रा का कोई खास मकसद नहीं था।
यात्रा के दौरान एक ऐसा समय आया जब कैसी के पैसे खत्म हो गए, लेकिन उसने हार नहीं मानी और वह घूमती रही। कुछ लोगों ने कैसी की मदद की जिससे यात्रा में रुकावट नहीं आई। बता दें कैसी को घूमने के साथ-साथ योगा और नेचर से भी लगाव है।
आप भी घूम सकते हैं अकेले, जानिए क्या होती है सोलो ट्रैवलिंग
इन दिनों सोलो ट्रैवलिंग का क्रेज लड़को में ही नहीं लड़कियों में भी बढ़ता जा रहा है। सोलो ट्रैवलिंग करने का जितना मजा है उतना ही इसमें खुद के प्रति सावधानी बरतनी पड़ती है। अकेले सफर करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना होता है। सोलो ट्रैवलिंग के दौरान अपने डेस्टिनेशन पर पहुंचने की प्लानिंग सही तरीके से करें।
कोशिश करे कि दिन में ही वहां पहुंचे। यात्रा के दौरान नए लोगों से बात करें लेकिन ज्यादा घूलने मिलने की कोशिश न करें। नए लोगों के साथ ड्रिंक न करें यह आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है, जिस होटल में रुकें वहां के आस -पास के बारे में पूरी जानकारी लें। आपको अकेले घूमने जाने के स्वास्थ सही होना चाहिए तथा मन शांत होना चाहिए । अगर आप अपने पार्टनर से ब्रेकअप करके या किसी निजी परेशानियों के कारण घूमने जाती है। तो आप इजॉय नहीं कर पाएंगी,आपका मन हमेशा अशांत रहेगा।
कहां कहां होती है सोलो ट्रैवलिंग
सोलो घूमने का अपने आप में एक अलग मजा होता है। लेकिन इसके लिए आप गोवा,नैनीताल और अंडमान जैसी जगहों पर अकेले घूमने से ज्यादा अच्छा ग्रुप में घूमना है। सोलो घूमने के लिए आपको एक बेहतर जगह की प्लानिंग करनी होगी। जहां आप खुद को सुरक्षित महसूस करें।तो आज हम आपको बताते है सोलो घूमने के बेहतर जगह
तमिनलाडू का महाबलिपूरम एक ऐसी जगह है जहां घूमने के साथ रहने की भी अच्छी व्यवस्था है।
महाबलिपूरम की मंदिर और किले की खूबसूरती पूरे दुनिया में फेमस है।
यहां घूमने वाली जगह
कृष्णा बटर बॉल
शोर टेंपल
कृष्णा मंडपम
पंचरथ
चोमामदल आर्टिस्ट गांव
घड़ियाल बैंक
कैसे जाएं इस जगह
चेन्नईसे डेढ़ घंटे का सफर तय करने पर महाबलिपुरम पहुंच सकते है। यहां जाने के लिए चेन्नई से बस और ट्रेन की मदद से पहुंच सकते है।
कब जाएं
यहां घूमने के लिए अगस्त और सितंबर का महीना सबसे अच्छा होता है। समुद्र तट के किनारे बसा यह शहर बहुत ही खुबसूरत है।
रिसर्च: इंटरनेट या गाइड बुक्स की मदद से सारी जानकारी इकट्ठी कर लें। अपने डेस्टिनेशन तक पहुंचने के लिए ट्रेन से लेकर बस जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बारे में सही जानकारी के साथ ठहरने के लिए कौन से होटल होंगे अच्छे इन बातों की भी सही जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा आप जहां जाने का प्लान कर रहे हैं वहां मोबाइल नेटवर्क कैसा होगा और इमरजेंसी में आपको कहां से मदद मिल सकती है। आपको इन सभी बातों के बारे में अच्छी तरह से जानकारी लेने के बाद ही यात्रा शुरू करनी चाहिए।
जितना कम सामान उतना अच्छा- यात्रा करते समय आपके पास जितना कम सामान होगा ट्रैवलिंग का मजा उतना ज्यादा आएगा। अगर आपके पास सामान ज्यादा होगा तो घूमने से पहले आप सामान रखने के लिए होटल ढूंढने में ही वक्त और पैसा खर्च कर देंगे।
धोखा खाने से बचें: अकेले घूमते हुए गलतियों की आशंका ज्यादा रहती है, लेकिन गलतियों से ही हम सीखते हैं। यात्रा पर निकलने से पहले की गई रिसर्च आपको परेशानियों से बचा सकती है।
सोलो ट्रैवलिंग के फायदे
मनमर्जी का मौका: सोलो ट्रैवलिंग करने का सबसे पहला फायदा यह होता है कि आपको न तो किसी की खुशामद करने का झंझट होता है न किसी का इमोशनल प्रेशर। जब मन किया घूमने निकल जाओ, जब तक मन करे होटल में सुस्ताते रहो। वरना ग्रुप में घूमते हुए आपको बाकी लोगों की इच्छाओं का भी ध्यान रखना पड़ता है। कितनी बार ऐसा होता है कि जब आपका मन म्यूजियम या आर्ट गैलरी देखने के बजाय सामने वाले पहाड़ पर चढ़ने को मचल रहा होता है, अपने दोस्तों की खातिर मन मारकर रह जाना पड़ता है।
माहौल का बेहतर अनुभव: साथ में कोई 'अपना' न हो तो हम खुद-ब-खुद आसपास के माहौल का हिस्सा बनने की कोशिश करते हैं। अनजान लोगों से अपने आप बातचीत करने लगते हैं। माहौल को किसी और के नजरिए से समझने के बजाय खुद उसका सामने से अनुभव कर पाते हैं।
ज्यादा कॉन्फिडेंस: सोलो ट्रैवलिंग में आपको मिलने वाले हर सुख-दुख के लिए आप खुद जिम्मेदार होते हैं। कोई गलती हुई तो उसका ठीकरा किसी और पर आप नहीं फोड़ सकते। लेकिन गलतियों से हम सीखते हैं और अकेले घूमते हुए हम ज्यादा जल्दी सीखते हैं।