{"_id":"5f034d54a3532553160383e4","slug":"kinner-kailash-trek-distance-yatra-history-a-mythical-abode-of-lord-shiva","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"हिमालय की बर्फीली चोटियों में स्थित है किन्नर कैलाश, 14 किमी की चढ़ाई के बाद होते हैं भोलेनाथ के दर्शन","category":{"title":"Travel","title_hn":"यात्रा","slug":"travel"}}
हिमालय की बर्फीली चोटियों में स्थित है किन्नर कैलाश, 14 किमी की चढ़ाई के बाद होते हैं भोलेनाथ के दर्शन
Thu, 06 Aug 2020 09:09 AM IST
योगेश जोशी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: योगेश जोशी
Updated Thu, 06 Aug 2020 09:09 AM IST
विज्ञापन
किन्नर कैलाश हिमाचल के किन्नौर जिले में स्थित है- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
हिमालय की बर्फीली चोटियों में कई देव स्थान हैं। इनकी धार्मिक मान्यताएं भी बहुत अधिक है। ऐसा ही एक पर्वत है, किन्नर कैलाश। किन्नर कैलाश हिमाचल के किन्नौर जिले में स्थित है। ये शिवलिंग 79 फिट ऊंचा है। इसके आस-पास बर्फीले पहाड़ों की चोटियां हैं। जो इसकी खूबसूरती की में चार चांद लगाते हैं।
Trending Videos
किन्नर कैलाश शिवलिंग का आकार त्रिशूल जैसा लगता है- फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
किन्नर कैलाश शिवलिंग का आकार त्रिशूल जैसा
- किन्नर कैलाश शिवलिंग का आकार त्रिशूल जैसा लगता है। किन्नर कैलाश पार्वती कुंड के काफी नजदीक है जिस वजह से भी इसकी मान्यता बहुत अधिक है।
यहां पर स्थित शिवलिंग बार-बार रंग बदलता है- फाइल फोटो
- फोटो : social media
बार-बार रंग बदलता है शिवलिंग
- किन्नर कैलाश की खास बात ये है कि यहां पर स्थित शिवलिंग बार-बार रंग बदलता है। कहा जाता है कि यह शिवलिंग हर पहर में अपना रंग बदलता है। सुबह के समय इसका रंग अलग होता है और दोपहर के समय सूरज की रोशनी में इसका रंग बदला हुआ दिखता है और शाम होते ही इसका रंग फिर से बदल जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ट्रेकिंग करने का सबसे अच्छा समय मई से अक्टूबर तक होता है- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
ट्रेकिंग करने का सबसे अच्छा समय
- यहां पर ट्रेकिंग करने का सबसे अच्छा समय मई से अक्टूबर तक होता है क्योंकि इस समय इसकी खूबसूरती अलग ही होती है और दूसरी बात सर्दियों के महीने में यहां बर्फ बहुत रहती है, जिस वजह से ट्रेकिंग करना आसान नहीं। यहां पर बारिश भी बहुत ज्यादा होती है जिस वजह से मानसून में यहां आने के लिए मना किया जाता है।
विज्ञापन
यहां पर चढ़ाई करना बेहद मुश्किल है- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
चढ़ाई करना बेहद मुश्किल
- यहां पर चढ़ाई करना बेहद मुश्किल है। क्योंकि यहां 14 किलोमीटर लंबे इस ट्रेक के आस-पास बर्फीली चोटियां हैं। लेकिन यहां कि खूबसूरती देखते ही बनती है। यहां के सेब के बगान के साथ यहां की सांग्ला और हंगरंग वैली के नजारो की बात ही अलग है। इस ट्रेक का सबसे पहला पड़ाव तांगलिंग गांव जो सतलुज नदी के किनारे बसा है। यहां से 8 किलोमीटर दूर मलिंग खटा तक ट्रेक करके जाना पड़ता है। इसके बाद 5 किलोमीटर दूर पार्वती कुंड तक जाते हैं। यहां से तकरीबन एक कलोमिटर की दूरी पर किन्नर कैलाश स्थित है।