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Janmashtami 2025: नाथद्वारा में कान्हा को चढ़ती है 56 व्यंजनों की थाली, देखिए भव्य नजारा

Fri, 08 Aug 2025 03:11 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Fri, 08 Aug 2025 03:11 PM IST
सार

Shrinathji temple Nathdwara: नाथद्वारा, वैष्णव परंपरा के पुष्टिमार्ग का प्रमुख केंद्र है। यहां के श्रीनाथजी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण को श्रीनाथजी के रूप में पूजा जाता है। जन्माष्टमी पर यहां घंटों तक चलने वाली भजन-कीर्तन, विशेष सजावट और अद्भुत श्रंगार देखने लायक होता है।

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Janmashtami 2025 Nathdwara chhappan-bhog Shrinathji temple Rajasthan Janmashtami Celebration
श्रीनाथ जी मंदिर नाथद्वारा - फोटो : Instagram

विस्तार

Janmashtami 2025: राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित नाथद्वारा सिर्फ एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि भगवान श्रीनाथजी की भक्ति, संस्कृति और परंपराओं का अनोखा संगम है। यहां जन्माष्टमी का पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचकर कान्हा के जन्मोत्सव में शामिल होते हैं। नाथद्वारा की खासियत है छप्पन भोग यानी 56 प्रकार के स्वादिष्ट और लाजवाब व्यंजन, जो भगवान को अर्पित किए जाते हैं। नाथद्वारा, वैष्णव परंपरा के पुष्टिमार्ग का प्रमुख केंद्र है। यहां के श्रीनाथजी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण को श्रीनाथजी के रूप में पूजा जाता है। जन्माष्टमी पर यहां घंटों तक चलने वाली भजन-कीर्तन, विशेष सजावट और अद्भुत श्रंगार देखने लायक होता है।

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श्रीनाथजी मंदिर का इतिहास 


नाथद्वारा में श्रीनाथजी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा होती है। यहां कान्हा का बाल रूप श्रीनाथ जी की मूर्ति के तौर पर विराजमान है।  मान्यता है कि श्रीनाथजी की मूर्ति गोवर्धन पर्वत से स्वयं प्रकट हुई थी। 17वीं शताब्दी में औरंगजेब के शासनकाल में जब हिंदू मंदिरों और मूर्तियों को नष्ट किया जा रहा था, जब श्रीनाथ जी की मूर्ति को वृंदावन से सुरक्षित ले जाया गया। रास्ते में रथ का पहिया नाथद्वारा के पास सिंगार गांव में कीचड़ में फंस  गया। जिससे ये संकेत मिला की भगवान यहीं रहना चाहते हैं तो मंदिर का निर्माण इसी स्थान पर कराया गया।

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छप्पन भोग की खासियत

नाथद्वारा की छप्पन भोग परंपरा के पीछे मान्यता है कि जब गोवर्धन पूजा के समय श्रीकृष्ण ने लगातार 7 दिन तक गोवर्धन पर्वत को उठाया, तब उनकी भूख मिटाने के लिए मां यशोदा ने 56 व्यंजन बनाए। नाथद्वारा में हर जन्माष्टमी पर यह परंपरा आज भी निभाई जाती है जिसमें मिठाई, स्नैक्स, पेय और मुख्य भोजन के कई प्रकार शामिल होते हैं।


जन्माष्टमी की रात का भव्य आयोजन

प्रति वर्ष जन्माष्टमी की मध्य रात्रि 12 बजे भगवान का जन्मोत्सव मंगल आरती के साथ मनाया जाता है। भक्त फूल, चांदी और सोने के आभूषणों से सजाए गए श्रीनाथजी के दर्शन करते हैं। ढोल-नगाड़े, शंख और घंटियों की ध्वनि माहौल को भक्तिमय बना देती है।



नाथद्वारा यात्रा पर कैसे जाएं

नाथद्वारा उदयपुर से लगभग 48 किमी दूर बसा है, जहां से आप बस या टैक्सी के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं। नाथद्वारा में ठहरने के लिए धर्मशालाओं से लेकर होटलों तक के कई विकल्प मिल जाएंगे। यहां यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय जन्माष्टमी का होता है। इसके अलाना कार्तिक और होली पर भी यहां विशेष आयोजन होते हैं। 

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