Ganesh Chaturthi 2021: महाराष्ट्र में है अष्टविनायक गणपति, ऐसे करें जाने की प्लानिंग, पूरी होती है मनोकामना
गणेश चतुर्थी का त्योहार इस साल 10 सितंबर से शुरु होकर अगले 10 दिनों तक चलेगा। लोग इस दिन भगवान गणपत्ति की भक्ति में खोए रहते हैं। घर पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है और पूरे विधि-विधान से 10 दिन तक पूजा-अर्चना की जाती है, जिसके बाद बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है। वहीं, इस खास मौके पर लोग भगवान गणेश के मंदिर भी जाते हैं, जिनमें अष्टविनायक मंदिर में लोग काफी जाते हैं। यहां बप्पा अलग-अलग रूपों में विराजते हैं और यहां की महिमा बेहद निराली है। इन मंदिरों को स्वयंभू मंदिर कहा जाता है, जिसका मतलब है कि यहां भगवान गणेश की सारी प्रतिमाएं स्वयं प्रकट हुई हैं। ऐसे ही अगर आप भी चाहें तो इस गणेश चतुर्थी के मौके पर अष्टविनायक मंदिर जा सकते हैं। इसके लिए आपको लगभग पांच दिन का महाराष्ट्र का टूर बनाना पड़ेगा, और इतने दिनों में आप अपने परिवार व दोस्तों संग अष्टविनायक के दर्शन कर सकते हैं।
विघ्नेश्वर अष्टविनायक मंदिर
इस मंदिर के नाम से पता चलता है और यहां की मान्यता भी है कि यहां आने वाले भक्तों के दुखों को विघ्नहर्ता गणेश जी हर लेते हैं। इसलिए यहां गणेश चुतुर्थी के मौके पर और बाकी समय भी भक्तों की काफी भीड़ रहती है। ये मदिर पुणे-नासिक रोड़ पर लगभग 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
बल्लालेश्वर मंदिर
रायगढ़ के पाली गांव में स्थित ये बल्लालेश्वर मंदिर काफी प्रसिद्ध है, और हर साल यहां काफी संख्या में बप्पा के भक्त पहुंचते हैं। कहा जाता है कि भगवान गणेश के परम भक्त बल्लाल के नाम पर इस मंदिर का नाम है। अपने भक्त की भक्ति से खुश होकर भगवान गणेश ने यहीं बल्लाल को दर्शन दिए थे। आप यहां दर्शन करके मनोकामना मांग सकते हैं।
वरदविनायक मंदिर
रायगढ़ के कोल्हापुर में ये मंदिर स्थित है। यहां एक दीपक है, जो कई सालों से प्रज्वलित है और इसे नंददीप कहा जाता है। यहां दर्शन करने वाले भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। इसलिए आप भी यहां दर्शन करने जा सकते हैं।
मयूरेश्वर मंदिर
ये मयूरेश्वर मंदिर पुणे के मोरगांव में स्थित है और इस मंदिर में चार द्वार हैं, जिन्हें सतयुग, द्वापर, त्रेता और कलयुग यानी चारों युगों का प्रतीक माना गया है। यहां गणपति बप्पा बैठी हुई मुद्रा में हैं, जिनके तीन नेत्र और चार भुजाएं हैं। आप यहां इस गणेश चतुर्थी के मौके पर दर्शन करने जा सकते हैं।
सिद्धिविनायक मंदिर
पुणे से इस मंदिर की दूरी लगभग 200 किलोमीटर है। यहां भगवान गणेश की तीन फीट ऊंची और ढाई फीट चौड़ी प्रतिमा है, साथ ही इस प्रतिमा में गणपति की सूंड दांई तरफ है। वहीं, इस मंदिर का इतिहास लगभग 200 साल पुराना बताया जाता है। मंदिर की मान्यता है कि यहां मांगी गई मन्नत पूरी होती है।
महागणपति मंदिर
राजणगांव में स्थित महागणपति मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर का मुख पूर्व दिशा की तरफ से हैं और इस मंदिर का मुख्य द्वार देखने में बहुत ही आकर्षक है। आप इस गणेश चतुर्थी यहां जाकर बप्पा का आशीर्वाद ले सकते हैं।
गिरिजात्मल अष्टविनायक
गिरिजात्मल अष्टविनायक मंदिर में 18 गुफाएं हैं, जिसकी आठवीं गुफा में भगवान गणेश विराते हैं। यहां जाकर आप अष्टविनायक जी का आशीर्वाद ले सकते हैं और यकीनन आपकी मनोकामना भी यहां जाने से पूर्ण हो सकती है। ये मंदिर लेण्याद्री गांव में स्थित है, पुणे से लगभग 90 किलोमीटर की दूर पर स्थित है।
चिंतामणी मंदिर
मान्यता है कि इस मंदिर में जाकर बप्पा के भक्तों की चिंताए दूर होती हैं। अगर आपके मन में कोई दुख, कोई परेशानी है और किसी समस्या का समाधान नहीं मिल रहा है, तो आप चिंतामणी मंदिर में जाकर दर्शन कर सकते हैं।