SPECIAL: जानिए कैसा होना चाहिए डिनर और क्या कहता है आपका टेबल?
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यदि डिनर टाइम 8 बजे का है, तो आप 7 बजे स्टार्टर परोसिए। इससे आपके गेस्ट डिनर की तरफ कूदेंगे नहीं और डिनर का स्वाद ले पाएंगे। खाने की थीम देसी है, तो स्टार्टर में टोमैटो सूप, फिर कबाब, समोसा, पकौड़ा, आलू फ्राई चिप्स, फ्राइड इडली रख सकते हैं। इनका फ्लेवर बढ़ाएं धनिया या इमली चटनी या खजूर और अंजीर चटनी से।
मेन कोर्स में दाल मखनी, पनीर पसंदा, बैंगन भरता, फ्राई गोभी, जीरा राइस, पाइनएप्पल रायता, पापड़, तंदूरी रोटी और स्वीट डिश में गाजर का हलवा, रसगुल्ला, फ्रूट क्रीम या गुलाब जामुन रख सकते हैं। इस बाबत न्यूटि्रशनिस्ट गीतू अमरनानी का कहना है कि डिनर इंडियन हो, लेकिन उसमें हेल्थ भी हो।
जहां फ्राई की जगह बेक और स्टीम की आॅप्शन हो, उसे आजमाएं। मैदा की जगह गेहूं और ओट्स के आटे का प्रयोग करें। पूरी की जगह तंदूरी रोटी हेल्थी आॅप्शन है। जितना हो सके क्रीम की ग्रेवी से बचें। इससे कैलोरी और कोलेस्ट्राॅल बढ़ेगा। कुकिंग के हेल्दी ऑप्शन आजमाएं।
खाने को एरोमैटिक और हेल्दी बनाएं। हर्ब्स से, जैसे रतनजोत, राधुनी, कबाबी चीनी, पंचफोरन, व्हाइट चिलीज, पोस्ता पेस्ट, मराठी मोग्गू आदि।
मुंबइया डिनर पार्टी है जुदा-जुदा
यूं तो डिनर पार्टी हर जगह होने लगी है। लेकिन मुंबई की डिनर पार्टी अलग होती है। वहां बाॅलीवुड के लोग थीम पार्टी आयोजित करने में काफी आगे हैं। एकता कपूर की डिनर पार्टी कई बार उनके ड्रेस कोड को लेकर चर्चा में रहती है, तो वहीं खान बंधुओं की डिनर पार्टी आपसी खुन्नस के कारण अखबारों की हेडलाइन्स बनती है।
बीते साल मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी की डिनर पार्टी काफी चर्चा में रही। पिछले दिनों गणेश उत्सव के दौरान मुकेश अंबानी के घर पेज-3 के लिए पार्टी आयोजन किया गया था। जहां बॉलीवुड स्टार्स अपने अंदाज में नजर आए। इस पार्टी में ऋतिक रोशन, करण जौहर, जाह्नवी कपूर जैसे स्टार्स मौजूद थे।
करीना यहां अपनी बहन करिश्मा के साथ आई हुई थीं। दोनों बहनें ब्लैक ड्रेस में बेहद खूबसूरत नजर आ रही थीं। करीना पहले से ज्यादा फिट और ग्लैमरस लगीं। वहीं करिश्मा भी पहले से ज्यादा हसीं नजर आईं। मलाइका अपने अंदाज में नजर आईं।
बेहद बोल्ड और ग्लैमरस अवतार, सबकी निगाहें उन्हीं पर टिकी हुई थी। शाहिद की पत्नी मीरा यहां अकेले दिखाई दीं। मीरा अपने अट्रैक्टिव लुक में बेहद क्लासी नजर आ रही थीं।
और वह टाइटैनिक का अंतिम डिनर...
14 अप्रैल 1912 की शाम टाइटैनिक के डूबने से ठीक पहले इस आलीशान जहाज के फर्स्ट क्लास के यात्रियों ने 'अला कार्ते' रेस्तरां में टेन कोर्स डिनर किया था। आप सोच रहे होंगे कि थ्री कोर्स मील और फाइव कोर्स मील के अलावा टेन कोर्स मील भी होता है! जी हां, दुनिया के सबसे आलीशान जहाज पर टेन कोर्स मील हुआ करता था।
इस जहाज के पहली श्रेणी के यात्री अपने दिन के चार से पांच घंटे इस तरह के डिनर में लगा देते थे। यहां हर कोर्स के साथ कोई-न-कोई ड्रिंक जैसे वाइन या पंच रोमेन ( जोकि कई पेय वाइन, रम और शैम्पेन जैसे पेय का मिश्रण होता है) भी जरूर रहता था। इन पेय का इस्तेमाल इसलिए भी किया जाता था कि अगले कोर्स से पहले मुंह में पिछले कोर्स का कोई भी स्वाद न रहे और अगले कोर्स के व्यंजनों के स्वाद का लुफ्त उठाया जा सके।
इस खास डिनर में सामान्य खाद्य साम्रगी ओइस्टर, फिले मिनॉन (एक फ्रेंच डिश) लैम्ब, डकलिंग और सेलेरी का भी प्रयोग किया जाता था। वहीं दूसरी श्रेणी के यात्रियों ने भी टेन कोर्स तो न सही, परंतु खूबसूरती से सर्व किया गया लजीज डिनर किया। इसके बाद एफ डेक जिसे स्टीरेज कहा जाता था, के यात्रियों ने भी फैंसी नहीं, लेकिन पौष्टिक भोजन किया।
यदि इस डिनर के बारे में पता लगने के बाद आपकी उत्सुकता बढ़ गई है कि आखिर इस डिनर का स्वाद होता कैसा होगा, तो आपको बता दें कि टाइटैनिक के दीवानों के लिए हर साल इस डिनर का आयोजन भी किया जाता है।
'डिनर पार्टी मनुष्य के मनोविज्ञान से जुड़ा है'
सीनियर साइकोलॉजिस्ट, भावना बर्मी कहती हैं कि डिनर पार्टी दरअसल मनुष्य के मनोविज्ञान से जुड़ा है। इसका कारण है, सामाजिक रिश्ता यानी हम सब लोगों से जुड़ा रहना चाहते हैं। इससे जिंदगी में खुशी आती है। हम सकारात्मक ऊर्जा महसूस करते हैं। दूसरा कारण है सामाजिक लाभ।
तीसरा सुपीरियॉरिटी ईगो बनाने के लिए। यानी अपना वजूद मजबूत बनाने के लिए लोगों को खिलाना-पिलाना शुरू कर देना, ताकि लोग आपको बड़ा समझें और वाहवाही करें।
वरिष्ठ समाजशास्त्री, मणींद्र नाथ ठाकुर कहते हैं कि डिनर पार्टी सहजता से मेहमान और मेजबान के सामने एक औपचारिक माहौल बना देता है, जिसमें कई तरह के मानवीय पहलू भी जुड़े हुए हैं। खासकर, राजनीति में जो डिनर पार्टी का चलन है, उसमें एक किस्म की व्यक्तिगत आत्मीयता उपजती है। ऐसे में अगर सामने वाला व्यक्ति राजी है, तो ठीक। बात को अस्वीकार करने के मूड में है, तो वहां फिर से बात करने की गुंजाइश बची रहती है। यही वजह है कि कई बार इन पार्टियों में बड़ी आसानी से कठिन फैसले ले लिए जाते हैं। ऐसा निजी जिंदगी में भी होता है।