चॉइस होती तो आज जॉब छोड़ देता: 'मेरा बस चलता तो आज ही नौकरी से इस्तीफा देकर घर की जिम्मेदारी संभाल लेता।' ये कहना है एक सरकारी दफ्तर में 10-5 की नौकरी करने वाले अभिजीत का। अभिजीत कहते हैं-'मेरी वाईफ ने पढ़ाई पूरी करने के बाद घर और बच्चों को संभालने का निर्णय लिया। उसको जॉब नहीं करना था। मैंने उसकी इच्छा का मान रखा। अगर मेरे पास ये ऑप्शन होता तो मैं भी इसको ही चुनता। मैं 19 साल की उम्र से जॉब कर रहा हूँ। आज 45 प्लस हूँ।
आसान शब्दों में यहां समझें क्या है हाउस हस्बैंड टैग, जो समाज में लेकर आ रहा है सकारात्मक बदलाव
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यह बात केवल एक अभिजीत की नहीं है। कई ऐसे पुरुष हैं जो खुशी से घर में रहकर गृहस्थी सम्भालने को तैयार हैं लेकिन अधिकांश मामलों में अब भी पुरुषों का घर सम्भालना समाज मे अच्छा नहीं माना जाता। अच्छी बात यह है कि अब धीरे धीरे खुद पुरुषों ने ही इस सोच से खुद को आज़ाद करना शुरू कर दिया है। वे इस नई भूमिका में सन्तुष्ट भी हैं और आत्मविश्वासी भी।
हम दोनों खुश तो दूसरों से क्या लेना: पिछले 10 सालों से भी ज्यादा समय से बतौर फ्रीलांस इंटीरियर डिजाइनर काम कर रहे मुक्तेश कहते हैं-'मेरी वाईफ अवनी एक डेंटिस्ट है। हम स्कूल के समय से एक-दूसरे के पड़ोसी रहे हैं। कॉलेज में आते आते हमारे परिवारों में भी हमारे रिश्ते को स्वीकृति मिल गई। अवनी शुरू से जानती थी कि मुझे कोई जॉब करने में इंटरेस्ट नहीं है न ही मैं अपना फैमिली बिजनेस संभालूंगा। मुझे किसी के अंडर बंधकर काम करने की बिल्कुल भी आदत नहीं है।