आत्मा को छूता है चुंबन, अवसाद करता है दूर
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शायर काविश बद्री ने लिखा है- 'एक बोसा होंट पर फैला तबस्सुम बन गया'। यह बोसा ही है जो किसी के प्रति लगाव को दर्शाता है। घरों में छोटे बच्चों के प्रति प्यार दर्शाने के लिए उनके गालों को चूमा जाता है। विभिन्न संस्कृतियों में प्यार के भाव और रिश्ते में नजदीकी के लिए चुंबन लिया जाता है। शोधों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि चुंबन न सिर्फ किसी के प्रति आकर्षण और प्यार को दर्शाता है, बल्कि अवसाद को भी दूर करता है।
चुंबन पर शोध क्या कहते हैं इसे जानने से पहले काविश बद्री की पूरी शेर पढ़ लेते हैं-
एक बोसा होंट पर फैला तबस्सुम बन गया
जो हरारत थी मिरी उस के बदन में आ गई
कहा जाता है कि चुंबन आदम सभ्यता से ही इंसानी जज्बातों, लगाव और भावनाओं के संप्रेषण का सबसे बेहतरीन जरिया है। यह मनुष्य के बीच के संबंध को और ज्यादा मजबूत करता है। घरों में भी बड़े-बुजुर्ग जब लंबे अर्से बाद किसी अजीज, प्रिय और दिल के करीब व्यक्ति से मिलते हैं तो उसे प्यार से चुंबन देते हैं। गले मिलते हैं। ऐसा करके वह अपने दिल की भावनाओं और प्रेम को व्यक्त करते हैं। विज्ञान चुंबन के कई स्वास्थ्य लाभ बताता है।
मशहूर शायर मिर्जा गालिब ने चुंबन पर शेर लिखा है-
बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहजा निगाह
जी में कहते हैं कि मुफ्त आए तो माल अच्छा है
अवसाद के दूर होने से हमारा लोअर कोलेस्ट्रोल स्तर भी कम रहता है। साल 2014 में हुए एक शोध में बताया गया है कि चुंबन से हमारे शरीर में बैक्टिरिया का आदान-प्रदान होता है। यह या तो आपको बीमार कर सकता है या फिर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकता है।