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Lohri 2026: 13 जनवरी को ही क्यों मनाई जाती है लोहड़ी? इतिहास जानकर चौंक जाएंगे
Tue, 06 Jan 2026 04:21 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Tue, 06 Jan 2026 04:21 PM IST
सार
Lohri 2026 Kab Hai: हर साल 13 जनवरी को लोहड़ी की पर्व मनाया जाता है। ये पर्व मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाते हैं। यह दिन प्रकृति, फसल और कृषक को समर्पित है। आइए जानते हैं लोहड़ी का महत्व और इतिहास।
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लोहड़ी क्यों मनाई जाती है
- फोटो : adobe stock
विस्तार
Lohri 2026: उत्तर भारत, खासकर पंजाब की सर्द रातों में जब आग की लपटें ठंड को चीरती हैं और लोकगीत हवा में घुल जाते हैं, तब समझिए लोहड़ी आ गई है। लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, यह प्रकृति, परिश्रम और परंपरा का उत्सव है। एक ऐसा त्योहार जो हमें हमारी कृषि-संस्कृति और सामूहिक जीवन की याद दिलाता है। हस साल लोहड़ी का पर्व जनवरी के महीने में मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। लेकिन लोहड़ी क्यों मनाई जाती है और इसकी एक खास तारीख क्यों तय है? लोहड़ी से जुड़े कुछ तथ्य हैं जो हर किसी को जानने चाहिए। आइए जानते हैं लोहड़ी का इतिहास, महत्व और कथा।
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2026 में लोहड़ी कब है?
साल 2026 में लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जाएगी। यह पर्व हर वर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पहले आता है और शीत ऋतु के विदा होने तथा रबी की फसल के स्वागत का प्रतीक माना जाता है।
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लोहड़ी क्यों मनाई जाती है?
लोहड़ी मूल रूप से सूर्य, अग्नि और फसल से जुड़ा पर्व है। यह दिन सूर्य के उत्तरायण होने से पहले की आखिरी रात का प्रतीक है। किसान समुदाय के लिए यह बेहद अहम है, क्योंकि इसी समय गेहूं की फसल लहलहाने लगती है। आग के चारों ओर परिक्रमा कर तिल, गुड़, मूंगफली और रेवड़ी अर्पित करना प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव दर्शाता है।
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लोहड़ी का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व
लोहड़ी का इतिहास लोकनायक दुल्ला भट्टी से जुड़ा है, जिन्हें पंजाब का रॉबिनहुड कहा जाता है। उन्होंने अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई और जरूरतमंद बेटियों के विवाह में सहायता की। आज भी लोहड़ी के गीतों में उनका नाम गूंजता है। यह पर्व न्याय, साहस और लोक-चेतना का स्मरण है।
लोहड़ी का सांस्कृतिक महत्व
नवविवाहितों और नवजात शिशु वाले परिवारों के लिए लोहड़ी विशेष होती है। भांगड़ा, गिद्धा, ढोल की थाप और सामूहिक नृत्य इस पर्व को जीवंत बनाते हैं। यह त्योहार सिखाता है कि खुशी व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक होती है। लोहड़ी हमें याद दिलाती है कि आधुनिकता की दौड़ में भी परंपराओं की आग बुझनी नहीं चाहिए। यही आग समाज को जोड़ती है, पीढ़ियों को जोड़ती है।