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जयंती विशेष: लाला लाजपत राय के बचपन की भावुक कर देने वाली कहानी, जिसे आज भी लोग करते हैं याद

Sun, 28 Jan 2024 10:52 AM IST
श्रुति गौड़ लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रुति गौड़ Updated Sun, 28 Jan 2024 10:52 AM IST
सार

लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी, 1865 को पंजाब के मोंगा जिले में हुआ था। उनका पिता का नाम मुंशी राधा कृष्ण आजाद था और उनकी माता का नाम गुलाब देवी था।

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lala lajpat rai birth anniversary untold story of his lifetime
लाला लाजपत राय - फोटो : social media

विस्तार

लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी, 1865 को पंजाब के मोंगा जिले में हुआ था। उनका पिता का नाम मुंशी राधा कृष्ण आजाद था और उनकी माता का नाम गुलाब देवी था। उनके पिता फारसी और उर्दू के महान विद्वान थे और उनकी मां एक धार्मिक महिला थीं। लालाजी के पिता राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रेवाड़ी में शिक्षक थे। उन्होंने वहीं से अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी की।

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इसके बाद वह लॉ की पढ़ाई के लिए लाहौर के एक सरकारी स्कूल में दाखिला लिया। लाला लाजपत राय का परिवर 1886 में हिसार चला आया। यहीं से उन्होंने वकालत की शुरुआत की। 1888 और 1889 के नेशनल कांग्रेस के वार्षिक सत्रों के दौरान वह प्रतिनिधि के तौर पर शामिल हुए।

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बचपन से था देश सेवा का शौक

उनके मन में बचपन से ही राष्ट्र सेवा का शौक था। उन्होंने देश को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने के प्रण लिया। कॉलेज के दिनों में वह राष्ट्रभक्त शख्सियत और स्वतंत्रता सेनानियों लाल हंस राज और पंडित गुरु दत्त के संपर्क में आए। वह देश को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए क्रांतिकारी रास्ता अपनाने पक्षधर थे। उनकी नीति भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के खिलाफ थी। बिपिन चंद्र पाल, अरबिंदो घोष और बाल गंगाधर तिलक के साथ उनका भी मानना था कि कांग्रेस की पॉलिसी का नकारात्मक असर हो रहा है। उन्होंने पूर्ण स्वराज की वकालत की।

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वकालत छोड़कर राजनीति में आ गए

लाजपत राय ने वकालत छोड़ दी और भारत को आजाद कराने के लिए पूरी ताकत लगा दी। उन्होंने महसूस किया कि ब्रिटिश शासन के अत्याचारों को दुनिया के सामने रखना चाहिए। इससे भारत के स्वतंत्रता संग्राम में दूसरे देशों से मदद मिल सकेगी। इस सिलसिले में लाला लाजपत राय 1914 में ब्रिटेन गए और इसके बाद 1917 में अमेरिका गए। अक्टूबर, 1917 में उन्होंने न्यूयॉर्क में इंडियन होम रूल लीग की स्थापना की। इसके बाद वह 1917 से 1920 तक अमेरिका में रहे।

बनाई कांग्रेस इंडिपेंडेंस पार्टी

साल 1920 में जब वह अमेरिका से वापस आए, तो उन्हें कलकत्ता में कांग्रेस के विशेष सत्र की अध्यक्षता करने के लिए बुलाया। उन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के खिलाफ ब्रिटिश शासन के खिलाफ उग्र विरोध किया। गांधीजी ने 1920 में असहयोग आंदोलन की शुरुआत की, तब उन्होंने पंजाब में आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने गांधीजी के चौरी चौरा घटना के बाद आंदोलन वापस लेने के फैसले का विरोध किया। इसके बाद उन्होंने अपनी कांग्रेस इंडिपेंडेंस पार्टी बना ली। लाहौर में साइमन कमिशन के खिलाफ विरोध के दौरान लाठी चार्ज में वह घायल हो गए, जिसके बाद उनका निधन हो गया।


बचपन की दिल छूने लेने वाली कहानी

एक बार स्कूल की तरफ पिकनिक का आयोजन किया गया। इसमें लाला लाजपत राय को भी जाना था। लेकिन न उनके पास पैसे थे और न घर में सामान, ताकि उनकी मां पिकनिक पर ले जाने के लिए कुछ बना सकें। उनके पिता बेटे का दिल न टूटे, इसके लिए पड़ोसी के घर उधार मांगने जा रहे थे, तो उन्हें यह पता चल गई। उन्होंने कहा, पिताजी! उधार के लिए मत जाइए, मैं वैसे भी पिकनिक पर नहीं जाना चाहता था। अगर मुझे जाना भी होगा, तो घर में खजूर है, तो वही लेकर चला जाऊंगा।

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