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International yoga day 2019: जानिए योग मैट का दिलचस्प इतिहास

Fri, 21 Jun 2019 08:09 AM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क Published by: पंखुड़ी सिंह Updated Fri, 21 Jun 2019 08:09 AM IST
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history of yoga mats invented by BKS iyengar
साल 2016 की एक योग जर्नल रिपोर्ट के अनुसार लगभग 36.7 मिलियन लोग अमेरिका में योग का अभ्यास करते हैं। जबकि साल 2012 में केवल 20.4 मिलियन लोग ही योगा करते थे। बता दें, 'योग बाजार' की कीमत अमेरिका में 16 बिलियन डॉलर और वैश्विक स्तर पर 80 बिलियन डॉलर है। हम में से अधिकांश लोगों के लिए योग और उद्योग शब्द में काफी फर्क है। योग निश्चित रूप से व्यवसाय या उद्योग न होकर स्वयं के विकास के लिए किया हुआ एक अभ्यास है। हालांकि, हम योग जर्नल द्वारा प्राप्त किए गए आंकड़ों से भी इंकार नहीं कर सकते हैं। बता दें, लगभग 60 प्रतिशत व्यापार योग से जुड़े सामान की मदद से होता है। जिसमें योग मैट का निर्माण और बिक्री प्रमुख है। आखिरकार ये मैट कैसे और कहां से नोटिस में आए। निश्चित रूप से हमारे प्राचीन संतों और साधुओं ने तो इनका उपयोग नहीं किया था। 

 
history of yoga mats invented by BKS iyengar
 1970 के दशक तक, लोग योग करने के लिए 'दरी' या चटाई पर बैठते थे। हालांकि, आज दुनिया भर में, लोगों को रबर के योग मैट पर योग का अभ्यास करते हुए देखा जाता है। आखिरकार, योग करने के लिए इन मैट का उपयोग करने का विचार किसका था? लोगों ने कब दरी छोड़कर योग करने के लिए इन खास योगा मैट का उपयोग करना शुरू कर दिया। बता दें, योग मैट्स के निर्माण का श्रेय भी किसी और को नहीं बल्कि योग गुरु, बीकेएस अयंगर को जाता है। वह भी उस समय के अन्य योग चिकित्सकों की तरह फर्श पर कंबल बिछाकर योग का अभ्यास करते थे। 1960 के दशक में, जब उन्होंने यूरोप में सार्वजनिक कक्षाओं को पढ़ाना शुरू किया, तो उन्होंने पाया कि यूरोपियन छात्रों को खड़े होकर आसन करने में कठिनाई होती थी,उनके पैर फिसलते रहते थे। उनका दिमाग खुद को गिरने से बचाने में हमेशा फंसा रहता था। जिसकी वजह से वो आसन पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते थे। 
 
history of yoga mats invented by BKS iyengar
हालांकि उन्होंने भारत में छात्रों को पढ़ाने के दौरान इस तरह की किसी परेशानी का कभी कोई सामना नहीं किया। इसके पीछे जो कारण था वो यह था कि भारत में वो जिस फर्श पर छात्रों को पढ़ाते थे वह कुडप्पा नाम की चट्टान से बने पत्थर का बना हुआ था जबकि पश्चिमी फर्श अलग तरह के थे। समस्या यह थी कि उन्होंने इस बात का अनुमान नहीं लगाया था। उनकी आंखें और दिमाग इसका समाधान खोजने के लिए काफी उत्सुक थे। फिर, एक दिन जर्मनी में, उन्हें हरे रंग की रबड़ की चटाई कार्पेट के नीचे रखी मिली जिसने उन्हें फिसलने से बचाया। उन्होंने सोचा, "क्या यह मैट योग छात्रों को खड़े होकर आसन करने के दौरान फिसलने से रोकने में मदद करेंगे। इस विचार के साथ उन्होंने उस मैट को हटाकर उसका इस्तेमाल किया। खास बात यह कि जैसा कि उन्होंने अनुमान लगाया था उनके पैर चटाई पर नहीं फिसले। 
 
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उन्होंने इस हरी रबड़ की मैट को 'स्टिकी मैट' का नाम दिया। जिसके बाद ब्रिटेन के छात्रों ने जर्मनी से योगा मैट का पहला रबर मैट का सेट खरीदा। उन्हें उस समय ग्रीन मैट या स्टिकी मैट के नाम से फेमस हुए। कालीनों के नीचे मैट का उपयोग करने का ट्रेंड मर रहा था और कंपनी भी बंद हो गई।  लेकिन, योग के लिए इन रबड़ मैट के उपयोग ने इन मैट को पुनर्जीवित कर दिया। बाद में, इसी तरह की नीले मैट जर्मनी में ही बनाए गए। जिसके बाद जर्मनी ही योग मैट का मुख्य निर्माता बन गया था। यद्यपि, यूके, यूरोप और अमेरिका में अयंगर योग चिकित्सकों ने इन योग मैट का उपयोग करना शुरू कर दिया, मुंबई और पुणे के छात्र ऐसा नहीं कर पाए क्योंकि ये मैट फिलहाल भारत में उपलब्ध नहीं थे और उन्हें इसकी आवश्यकता भी नहीं थी। उनके पैर फर्श पर नहीं फिसलते थे। हालांकि, विदेशी छात्र जो स्रोत सीखने के लिए पुणे आए हुए थे उन्होंने अपने मैट वही छोड़ना शुरू कर दिए। जिसके बाद योग मैट के उत्प्रेरकों ने उन्हें अपने संस्थान में रखा।
 
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पिछले 20 वर्षों में कई देशों को ऐसे मैट्स का निर्माण और निर्यात करते हुए देखा गया है जैसे जर्मनी, यूएसए और अब चीन। अब इन मैटों को स्टिकी मैट नहीं बल्कि 'योग' मैट कहा जाता है। इतना ही नहीं अब इन मैट्स को नाइके और रीबॉक जैसी बड़ी स्पोर्टिंग कंपनियों द्वारा ब्रांडेड मैट के रूप में बेचा जाता है। जिससे योग मैट का निर्माण को एक बिलियन डॉलर का उद्योग बना दिया है। एक बार गुरुजी बीकेएस अयंगर से यह पूछा गया कि उन्होंने अपने इस आइडिया को 'पेटेंट' क्यों नहीं करवाया। जिसके जवाब में उन्होंने कहा, "क्या ऋषि मुनियों ने अपना ज्ञान पेटेंट किया था? "उनके अनुसार यदि उनके ज्ञान से लोगों की मदद होती है तो वो उन्हें मिलना चाहिए। और ऐसे विचारों को पेटेंट करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। इस प्रकार योग मैट सार्वभौमिक बन गया।
 
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