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शर्माएं नहीं, महिलाएं इस दिक्कत का इलाज कराएं

Sat, 20 Dec 2014 11:48 AM IST
Updated Sat, 20 Dec 2014 11:48 AM IST
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women should discuss urinary problems

स्वास्थ्य संबंधी कई ऐसी समस्याएं हैं, जिसे महिलाएं बताने में संकोच करती हैं, जैसे यूरिनरी इनकॉन्टीनेंस यानी अनियमित मूत्र प्रवाह। यह समस्या पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में होती है। महिलाओं में इस बीमारी को स्ट्रेस इनकॉन्टीनेंस कहा जाता है।

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इस बीमारी का इलाज संभव है, लेकिन महिलाएं इस समस्या को छिपाती हैं, जिससे समस्या गंभीर बन जाती है। अगर महिलाएं प्रॉपर एक्सरसाइज और वर्कआउट करें, तो 90 फीसदी तक फायदा हो सकता है। इस डिसीज के प्रति जागरूकता जरूरी है, क्योंकि महिलाएं इसका पता चलने के बहुत देर बाद ट्रीटमेंट शुरू करती हैं।
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क्या है यूरिनरी इनकॉन्टीनेंस
इस बीमारी में जोर से हंसने, छींकने या खांसने पर मूत्र का रिसाव हो जाता है। इस रोग से पीड़ित महिलाओं को बार-बार मूत्र जाने की जरूरत महसूस होती है या मूत्र को रोकने में दिक्कत होती है।
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एक अध्ययन के मुताबिक 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में यह बीमारी 35 प्रतिशत लोगों में पाई जाती है। 2007 में लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के एक सर्वे के मुताबिक 3000 महिलाओं में से 655 महिलाएं इस बीमारी से पीड़ित थीं। यह तथ्य भी सामने आया कि समाज में शर्म के कारण महिलाएं इस बीमारी के बारे में नहीं बताती हैं।

फायदेमंद है इंटरस्टिम सर्जरी

women should discuss urinary problems

फोर्टिस एस्कॉट हॉस्पिटल के चीफ कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट सर्जन डॉ. आशीष सब्बरवाल कहते हैं कि इस बीमारी का इलाज संभव हैं, लेकिन इसके उपचार के लिए रोगी की मानसिक स्थिति भी बहुत ज्यादा प्रभाव डालती है।

ज्यादातर महिलाएं इस बीमारी को लेकर स्‍त्रीरोग विशेषज्ञ या नेफ्रोलॉजिस्ट के पास जाती हैं, लेकिन यह बीमारी इन दोनों से ही संबंधित नहीं होती। यह दिमाग से संबंधित होती है। अगर दिमाग और सेक्रल तंत्रिकाओं का आपस में सही संपर्क नहीं होता, तो यह परेशानी सामने आती है।

इंटरस्टिम न्यूरो मॉडुलेशन थेरेपी के माध्यम से इसका उपचार किया जाता है। यह थेरेपी सेक्रल तंत्रिकाओं मूत्राशय थैली और मूत्र से संबंधित मांसपेशियों को नियंत्रित करती है। इंटरस्टिम थेरेपी में न्यूरो स्टिमुलेटर की मदद से सेक्रल तंत्रिकाओं को इलेक्ट्रिक वाइब्रेशन से निंयत्रित किया जाता है।

इससे दिमाग और तंत्रिकाओं को आपस में सही संपर्क करने में मदद मिलती है और समस्या का समाधान हो जाता है। जिन रोगियों को दवाई, योग, डाइट में बदलाव से लाभ नहीं मिलता, उनके लिए यह थेरेपी सही है।

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