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तंबाकू के चार प्रकारः सेहत पर अलग-अलग वार
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 31 May 2013 12:08 PM IST
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रमेश, उम्र 34 वर्ष, मौत की वजह - फेफड़ों का कैंसर और दोषी 15 साल की उम्र से सिगरेट पीने और 30 साल की उम्र से तंबाकू खाने की लत।
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हो सकता है आपका रमेश की जिंदगी, उसकी लत और उसकी मौत से कोई संबंध न हो, लेकिन उसे होने वाली फेफड़े की बीमारी, सिगरेट और तंबाकू की लत और शरीर पर पड़ने वाला प्रभावों से हम खुद को चाहकर भी अलग नहीं कर सकते।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जानिए तंबाकू से जुड़े उन रूपों के बारे में जिनका सेवन आप तो अपना शौक समझकर करते हैं, लेकिन ये आपके शरीर पर अलग-अलग तरह से वार करते हैं।
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1. सिगरेट
हो सकता है सिगरेट का एक कश लगाकर आप दिन भर कामकाज के तनाव को भले ही कुछ पल भूल जाएं पर धूम्रपान की आपकी आदत शरीर के कई हिस्सों के लिए खतरे की घंटी है। इसमें मौजूद बेनजीन, टार, फोर्मलडीहाइड, आर्सेनिक, निकोटिन जैसे तत्व शरीर के लिए कई रोगों का आमंत्रण हो सकते हैं।
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- कई शोधों में यह प्रमाणित हो चुका है कि धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर, गले का कैंसर, मुंह, किडनी, ब्लैडर, पैंक्रियाज और पेट में कैंसर का रिस्क अधिक होता है।
- इसके अलावा अधिक धूम्रपान करने वालों को दिल के रोगों और स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है।
- कार्बन और निकोटिन का मिश्रण शरीर में हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ाता है।
- सिगरेट में पाया जाने वाला टार फेफड़ों के कैंसर की बड़ी वजह है।
- धुएं से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस मांसपेशियों, दिमाग और कोशिकाओं में पहुंचने वाली ऑक्सीजन को रोकती है जिससे हृदय, फेफड़ों और मस्तिष्क के काम करने में दिक्कत हो सकती है।
- गर्भावस्था में धूम्रपान या पैसिव स्मोकिंग (धूम्रपान करने वालों की संगत) गर्भपात, समय से पहले डिलिवरी, बच्चे का कम वजन आदि का कारण हो सकता है।
2. तंबाकू
जर्दा, सुर्ती और पान मसाले के नाम पर तंबाकू खाना अगर आपकी आदत का हिस्सा हो चुका है तो आपकी इस आदत को बदलने की कुछ बेहद जरूरी वजहें हो सकती हैं। तंबाकू में 28 किस्म के कार्सिनोजेनिक तत्व होते हैं जिनसे कैंसर हो सकता है। जानिए तंबाकू आपके शरीर को कैसे प्रभावित करता है।
- तंबाकू से ल्यूकोप्लाकिया का रिस्क अधिक रहता है जिसमें दांत और मसूड़े तेजी से सड़ते हैं।
- मुंह के कैंसर का यह बहुत बड़ा कारण है।
- गले का कैंसर का रिस्क अधिक रहता है।
- तंबाकू में मौजूद निकोटिन हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है जिससे दिल के रोगों की आशंका अधिक रहती है।
- भोजन करने की इच्छा खत्म कर देता है।
3. हुक्का
आज हुक्का न सिर्फ गांवों तक सीमित है बल्कि तमाम पब, होटलों और रेस्तरां में हुक्के (तंबाकू युक्त हुक्के) का चलन बढ़ा है। अगर आप इसे सिगरेट के विकल्प के रूप में देखते हैं तो सेहत पर इसका प्रभाव जान लें।
- हुक्का में सिगरेट की तरह ही टार, कार्बन मोनोऑक्साइड, हेवी मेटल्स और कार्सिनोजेनिक तत्व हैं जो कैंसर का रिस्क बढ़ाते हैं।
- इससे मुंह का कैंसर, दिल के रोग और फेफड़ों के कैंसर की आशंका सबसे अधिक होती है।
- सिगरेट की तरह ही हुक्के का निकोटिन भी हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है।
- गर्भावस्था के दौरान हुक्का पीने या हुक्का पीने वालों के दौरान मौजूद रहने से गर्भवती महिलाओं के गर्भ को नुकसान हो सकता है।
- हुक्का के पाइप से कई प्रकार के संक्रमणों का रिस्क अधिक रहता है।
4. सिगार
हालांकि सिगार का प्रचलन हमारे यहां अपेक्षाकृत कम है पर कुछ लोग सिगार को सिगरेट की अपेक्षा बेहतर विकल्प मानते हैं। अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो जान लें कि तंबाकू का सेवन हर रूप में सेहत के लिए नुकसानदायक ही है।
- सिगार में मौजूद निकोटिन भले ही फेफड़ों में कम जाए लेकिन यह मुंह को सीधा प्रभावित करता है जिससे मुंह और गले के कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है।
- इसमें बहुत अधिक मात्रा में कार्सिनोजेनिक तत्व होते हैं। शोधों की मानें तो सिगार में 60 से भी अधिक कार्सिनोजेनिक तत्व पाए जाते हैं।
- दिल के रोगों का खतरा इससे अधिक होता है। इसके सेवन से धमनियों के ब्लॉकेज और दिल के दौरे का रिस्क बढ़ जाता है।
- कम समय में ही दांत गिरने लगते हैं।