कामेच्छा से लेकर तेज दिमाग के लिए जरूरी है यह हार्मोन
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पुरुषों में पाया जाने वाला टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन मांशपेशियों के निर्माण, फैट बर्न और शरीर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत में अहम भूमिका निभाता है। अगर शरीर में इस हार्मोन का स्तर असंतुलित हो रहा है, तो सतर्क होने की जरूरत है।
इस हार्मोन की कमी से कॉलेस्ट्रोल बढ़ने, हार्ट अटैक, हड्डियां कमजोर होने, थकान, याददाश्त में कमी, बाल झड़ने, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, मोटापा और मसल डिस्ट्रोफी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इस समस्या की मुख्य वजह वसा युक्त भोजन है, जो लीवर और किडनी की क्षमता को प्रभावित करता है। इस कारण एड्रिनल ग्लेंड को सुचारु रूप से काम करने में परेशानी होती है। कामेच्छा में भी कमी आती है। अत्यधिक शुगर के सेवन से यह समस्या बढ़ने लगती है।
टेस्टोस्टेरोन घटने के नुकसान
समान्य तौर पर उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में गिरावट देखने को मिलती है। हालांकि अब 30 से ज्यादा उम्र के पुरुषों में भी टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में गिरावट देखने को मिल रही है।
इस हार्मोन की कमी की क्या वजह है, यह देखने के बाद ही इलाज के अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। अगर पिट्यूटरी ग्लेंड में ट्यूमर होने से हार्मोन नहीं बन रहा है, तो सर्जरी करनी होगी। ट्यूमर होने पर स्थिति गंभीर मानी जाती है।
डायबिटीज होने पर भी इस हार्मोन में कमी आती है, इसकी दवाएं अलग होती हैं। टेस्ट करके हार्मोन के कारणों का पता किया जाता है। इसके बाद इंजेक्शन, दवाएं या सर्जरी आदि से इलाज किया जाता है।
फास्ट फूड, तैलीय भोजन, शराब और प्रोसेस्ड फूड से दूर रहें। गाजर, पत्तागोभी, प्याज, शकरकंद आदि हरी सब्जियों का इस्तेमाल करें। चीनी के विकल्प के तौर पर जैगरी, शहद आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इससे ब्लड शुगर का स्तर सामान्य बना रहता है और एड्रेनल ग्लेंड पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता। अत्यधिक तनाव के कारण भी हार्मोन का स्तर गिरता है, इसीलिए काम के साथ पर्याप्त आराम पर भी ध्यान दें।