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तेज खुशबू वाले उत्पाद के लेबल में छिपा है राज
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 15 Apr 2013 04:58 PM IST
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वाले कॉस्मेटिक्स के शौकीन हैं तो सावधान हो जाइए। हो सकता है आप जिस परफ्यूम,
डियोड्रेंट या फिर किसी कॉस्मेटिक के शौकीन हैं, उसकी महक ही आपकी सेहत को नुकसान
पहुंचाए।
तेज महक वाले परफ्यूम, डियोड्रेंट, तेल, जेल, शैंपू या क्रीम जैसे उत्पादों में छपा 'फ्रेग्नेंस' या 'परफ्यूम' का लेबल अगर आपने गौर किया है तो जान लें कि इस 'फ्रेग्नेंस' के पीछे कई रसायन आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।
कई शोधों में यह प्रमाणित हो चुका है कि जिन उत्पादों के लेबल में 'फ्रेग्नेंस' या 'परफ्यूम' जैसे शब्दों का इस्तेमाल होता है, उनमें कई हानिकारक रसायनों का भी इस्तेमाल किया जाता है जिसका उल्लेख लेबल में नहीं होता है।
'द कैंपेन फॉर सेफ कॉस्मेटिक्स' की रिपोर्ट पर गौर करें तो पाएंगे कि कई बड़े ब्रांड्स यहां तक कि सेलिब्रिटी लेबल के उत्पादों में कई हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल होता है जिसे केवल 'फ्रेग्नेंस' या 'परफ्यूम' नाम से ही छाप दिया जाता है।
इस शोध में शोधकर्ताओं ने तेज महक वाले 17 उत्पादों का परीक्षण किया जिसमें उन्होंने पाया कि औसतन 17 ऐसे रसायन इन उत्पादों में उपयोग किए गए जिनका उल्लेख लेबल पर नहीं है और ये सेहत के लिए नुकसानदायक हैं।
शोधकर्ता हौलिहैन के अनुसार, 'हमने अपने शोध में पाया कि तेज महक वाले उत्पादों में अक्सर सभी केमिकल्स का उल्लेख करने के बजाय केवल 'फ्रेग्नेंस' या 'परफ्यूम' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।'
'हमने सैंपल को टेस्ट किया और पाया कि इनमें कई रसायनिक तत्व हो सकते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक हैं। जैसे- तेज महक के लिए अक्सर थैलेट्स का इस्तेमाल किया है जो शरीर में हार्मोनल समस्याएं पैदा कर और वीर्य कम कर सकता है।'
क्या है तेज महक का राज
उत्पादों को खुशबूदार बनाने के लिए उनमें दर्जनों से लेकर सैकड़ों किस्म के रसायनों का इस्तेमाल किया जता है। कई बार कोई एक महक अलग-अलग गुणों के कई रसायनों से तैयार होती है जिसका विवरण अक्सर ब्रांड अपने लेबल पर नहीं देते।
इन उत्पादों के लेबल पर छपे 'फ्रेग्नेंस' या 'परफ्यूम' जैसे शब्दों के अंतर्गत इन रसायनों को मान लिया जाता है जिसमें गेरानियॉल, युजेनॉल, सिट्रोनेलॉल जैसे रसायन होते हैं जो आपको एलर्जी का शिकार बना सकते हैं। इसी तरह, थैलेट्स से प्रजनन क्षमता घट सकती है, सिंथेटिक मस्क से हार्मोन का स्तर बिगड़ सकता है या फिर मिथाइन यूजेनॉल या स्टायरेन जैसे तत्व कैंसर तक की स्थिति ला सकते हैं।
रसायनों के नुकसान
एक इन्वॉयर्मेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी द्वारा करवाए गए परीक्षण में तेज महक वाले उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों का परीक्षण किया गया जिन्हें आमतौर पर उत्पादों पर 'फ्रेग्नेंस' या 'परफ्यूम' के लेबल से ही बेचा जाता है।
बेंजलडीहाइड, एसीटोन, बेंजाइलएसीटेट, बेंजाइल एल्कोहल, इथेनॉल, इथाइल एसीटेट जैसे रसायनों का इस्तेमाल उत्पादों को खुशबूदार बनाने या फिर रसायनों की दुर्गंध को दूर करने के लिए किया जाता है जो शरीर को एलर्जिक बना सकते हैं और श्वास, लिवर संबंधी समस्याओं और अवसाद का कारण हो सकते हैं।
बहुतेरे शोधों ने किया स्वीकार
- अमेरिका के कमेटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोध के अनुसार, तेज महक के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 95 प्रतिशत रसायन पेट्रोलियम से बनाए जाते हैं जो शरीर को एलर्जी, कैंसर, नर्वस सिस्टम से संबंधित समस्याओं का कारण हो सकते हैं।
- इन्वॉयरमेंट प्रोटेक्शन एजेंसी के शोध के अनुसार, कमरे के एयर फ्रेशनर में पी-डाइक्लोरोबन्जीन और इथेनॉल का बहुत अधिक इस्तेमाल होता है जो कि कार्सिनोजेनिक रसायन हैं। यानी इनसे भी कैंसर का खतरा हो सकता है।
तेज महक वाले परफ्यूम, डियोड्रेंट, तेल, जेल, शैंपू या क्रीम जैसे उत्पादों में छपा 'फ्रेग्नेंस' या 'परफ्यूम' का लेबल अगर आपने गौर किया है तो जान लें कि इस 'फ्रेग्नेंस' के पीछे कई रसायन आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।
कई शोधों में यह प्रमाणित हो चुका है कि जिन उत्पादों के लेबल में 'फ्रेग्नेंस' या 'परफ्यूम' जैसे शब्दों का इस्तेमाल होता है, उनमें कई हानिकारक रसायनों का भी इस्तेमाल किया जाता है जिसका उल्लेख लेबल में नहीं होता है।
'द कैंपेन फॉर सेफ कॉस्मेटिक्स' की रिपोर्ट पर गौर करें तो पाएंगे कि कई बड़े ब्रांड्स यहां तक कि सेलिब्रिटी लेबल के उत्पादों में कई हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल होता है जिसे केवल 'फ्रेग्नेंस' या 'परफ्यूम' नाम से ही छाप दिया जाता है।
इस शोध में शोधकर्ताओं ने तेज महक वाले 17 उत्पादों का परीक्षण किया जिसमें उन्होंने पाया कि औसतन 17 ऐसे रसायन इन उत्पादों में उपयोग किए गए जिनका उल्लेख लेबल पर नहीं है और ये सेहत के लिए नुकसानदायक हैं।
शोधकर्ता हौलिहैन के अनुसार, 'हमने अपने शोध में पाया कि तेज महक वाले उत्पादों में अक्सर सभी केमिकल्स का उल्लेख करने के बजाय केवल 'फ्रेग्नेंस' या 'परफ्यूम' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।'
'हमने सैंपल को टेस्ट किया और पाया कि इनमें कई रसायनिक तत्व हो सकते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक हैं। जैसे- तेज महक के लिए अक्सर थैलेट्स का इस्तेमाल किया है जो शरीर में हार्मोनल समस्याएं पैदा कर और वीर्य कम कर सकता है।'
क्या है तेज महक का राज
उत्पादों को खुशबूदार बनाने के लिए उनमें दर्जनों से लेकर सैकड़ों किस्म के रसायनों का इस्तेमाल किया जता है। कई बार कोई एक महक अलग-अलग गुणों के कई रसायनों से तैयार होती है जिसका विवरण अक्सर ब्रांड अपने लेबल पर नहीं देते।
इन उत्पादों के लेबल पर छपे 'फ्रेग्नेंस' या 'परफ्यूम' जैसे शब्दों के अंतर्गत इन रसायनों को मान लिया जाता है जिसमें गेरानियॉल, युजेनॉल, सिट्रोनेलॉल जैसे रसायन होते हैं जो आपको एलर्जी का शिकार बना सकते हैं। इसी तरह, थैलेट्स से प्रजनन क्षमता घट सकती है, सिंथेटिक मस्क से हार्मोन का स्तर बिगड़ सकता है या फिर मिथाइन यूजेनॉल या स्टायरेन जैसे तत्व कैंसर तक की स्थिति ला सकते हैं।
रसायनों के नुकसान
एक इन्वॉयर्मेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी द्वारा करवाए गए परीक्षण में तेज महक वाले उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों का परीक्षण किया गया जिन्हें आमतौर पर उत्पादों पर 'फ्रेग्नेंस' या 'परफ्यूम' के लेबल से ही बेचा जाता है।
बेंजलडीहाइड, एसीटोन, बेंजाइलएसीटेट, बेंजाइल एल्कोहल, इथेनॉल, इथाइल एसीटेट जैसे रसायनों का इस्तेमाल उत्पादों को खुशबूदार बनाने या फिर रसायनों की दुर्गंध को दूर करने के लिए किया जाता है जो शरीर को एलर्जिक बना सकते हैं और श्वास, लिवर संबंधी समस्याओं और अवसाद का कारण हो सकते हैं।
बहुतेरे शोधों ने किया स्वीकार
- अमेरिका के कमेटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोध के अनुसार, तेज महक के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 95 प्रतिशत रसायन पेट्रोलियम से बनाए जाते हैं जो शरीर को एलर्जी, कैंसर, नर्वस सिस्टम से संबंधित समस्याओं का कारण हो सकते हैं।
- इन्वॉयरमेंट प्रोटेक्शन एजेंसी के शोध के अनुसार, कमरे के एयर फ्रेशनर में पी-डाइक्लोरोबन्जीन और इथेनॉल का बहुत अधिक इस्तेमाल होता है जो कि कार्सिनोजेनिक रसायन हैं। यानी इनसे भी कैंसर का खतरा हो सकता है।