कार में बैठेंगे पिछली सीट पर तो बन जाएंगे सफल, जानिए कैसे?
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गाड़ियों से लंबी सड़क यात्राओं के दौरान बीच की सीट पर बैठना हमेशा से बेमन और मजबूरी का काम माना गया है। किसी को भी खिड़की वाली सीट छोड़ कर बीच की सीट पर बैठना पसंद नहीं होता। वहां पैर फैलाने की भी कम जगह रहती है।
लेकिन कभी छोटे भाई-बहनों की खुशी के लिए तो कभी मां-बाप के कहने पर ऐसा करना ही पड़ जाता है। एक नई खोज के मुताबिक यह सामने आया है कि जो बच्चे बीच की सीट पर बैठते हैं वे आगे जीवन में ज्यादा सफल होते हैं, खासकर बिजनेस के क्षेत्र में।
दो या दो से अधिक भाई बहनों वाले लोगों पर स्कौडा ऑकटेविया द्वारा की गई एक रिसर्च से पता चला है कि बड़ी कंपनियों में निदेशक पद पर आसीन लोग में से 90 प्रतिशत लोग कार में बीच की सीट पर ही बैठा करते थे। करीब 72 प्रतिशत बिजनेस मालिक और 62 प्रतिशत सीनियर मैनेजर भी अपने भाई-बहनों के साथ सड़क यात्राओं के समय बीच में ही बैठते थे।
इन नतीजों को बीच की सीट पर बैठने वाले बच्चों के व्यक्तित्व के साथ जोड़ कर देखा जा सकता है। बीच की सीट पर बैठने वाले बच्चों में से 80 प्रतिशत लोगों ने अपनी सफलता का श्रेय बचपन में कार में बैठने की अवस्था को दिया है। जो बच्चे बीच में बैठते हैं वे परिस्थियों में आराम से ढलने का गुण विकसित कर लेते हैं।
सकारात्मक व्यक्तिव बनाने में मददगार है बैकसीट
बाल मनोवैज्ञानिक लावर्न एंट्रोबस ने कहा,''पारिवारिक कार यात्राओं पर किया गया यह शोध काफी मजेदार है। कार अपने आप में ही एक खास तरह की परिस्थिति होती है और इसके माध्यम से कई चीजें सामने आ सकती हैं कि जब लोग एक सीमित जगह पर साथ बैठते हैं तो कैसे।''
उन्होंने यह भी कहा कि यह देखना काफी दिलचस्प है कि कैसे कई सालों के दौरान कार की पिछली सीट पर बैठना हमारे व्यक्तित्व पर असर डालता है।
बीच में बैठने वाले बच्चों को चाहे जबरदस्ती बीच में बिठाया गया हो या वे अपनी मर्जी से बैठे हों, उनमें सकारात्मक लक्षण देखने को मिलते हैं, जो आगे चल कर उनके करियर में काफी अहमियत रखते हैं।
हालांकि 43 प्रतिशत परिवारों में विवाद का कारण बैठने की यह अवस्था ही था लेकिन बीच में बैठने वाले 66 प्रतिशत बच्चों को यह मजेदार लगा। साथ ही दस में से एक व्यक्ति आज भी पारिवारिक सड़क यात्राओं के दौरान अपनी उसी अवस्था में बैठते हैं जिसमें पहले बैठा करते थे।