बांझपन से लेकर सिरदर्द हर मर्ज की दवा है ये मालिश!
10 साल के एक अध्यन ने यह दावा किया है कि कुछ खास तरह की मालिश से बांझपन के कारणों को दूर किया जा सकता है। गर्भाशय नली में चोट होने के कारण जो महिलाएं गर्भवती नहीं हो सकती थी, उनकी यह समस्या पेल्विक फीजियोथेरेपी से दूर हो सकती है। ऐसी ही कई अन्य तरह की मालिशें हैं जो आपके लिए फायदेमंद हो सकती हैं।
स्वीडिश मालिश
हालांकि मालिश को पारंपरिक उपचार नहीं कहा जा सकता लेकिन इसे करने से दर्द, अकड़न, जोड़ों की समस्या को कम किया जा सकता है। गठिए के दर्द में स्वीडिश मालिश बहुत काम की है। इसमें शरीर पर तेल लगाया जाता है और अलग अलग तरह से हाथ फहराया जाता है। ऐसा करने से मांस पेशियों में गर्माहट जाती है जो तनाव दूर करती है और मांस पेशियों की गांठे भी खोलती है।
कमरदर्द में थाई मालिश
खेल कूद में चोटिल होने से हुआ कमर दर्द या स्लिप डिस्क की परेशानी होने पर मालिश करना शायद सही उपाय न हो लेकिन गलत ढंग से बैठने, तनाव और जकड़न से होने वाले दर्द में मालिश फायदेमंद है।
थाई मालिश में योगा के जैसे ही खिंचाव वाली तकनीक अपनाई जाती है। साथ ही प्रेशर बिंदुओं पर हाथ, बांह, तलवे और घुटने से भी दबाव डाला जाता है। मांस पेशियों में जितना ज्यादा तनाव बढ़ता है उतना ज्यादा वे छोटी होती जाती हैं जिसके कारण शरीर का आकार बिगड़ता है।
शियाट्सू मालिश
ऐसी ही एक मालिश है जिसका नाम है शियाट्सू। यह एक
जापानी शब्द है और इसका अर्थ है 'उंगलियों का दबाव'। इसमें अंगूठे,
उंगलियों और हथेली के इस्तेमाल से उन जगहों पर दबाव डाला जाते है जिन्हें
चीनी भाशा में उर्जा रेखा कहते हैं।
माना जाता है कि ऐसा करने से शरीर में
उर्जा का बहाव होता है जो जल्द दर्द ठीक करता है। इसे खास तौर पर मासिक
दर्द, प्रसव पीड़ा और कमर के निचले हिस्से में दर्द होने पर किया जा सकता
है और इसमें तेल की भी जरूरत नहीं होती।
चेहरे की मालिश
वहीं एक शोध से यह भी पता चला है कि माइग्रेन के
दर्द से ग्रसित जिन लोगों की हर हफ्ते मालिश की जाती थी उन्हें कम दर्द
होता था, नींद अच्छी आती थी और उनमें तनाव से लड़ने की भी क्षमता बढ़ती है
बजाय उनके जिनकी मालिश नहीं होती।
गर्दन और कंधों में दर्द के कारण सिर
दर्द हो सकता है इसलिए पूरे शरीर की मालिश एक अच्छा उपाय है। सिरदर्द के
मरीजों को चेहरे और जबड़े के आस पास मालिश दी जानी चाहिए।
पैरों के लिए रिफलैक्सोलॉजी
रिफलैक्सोलॉजी एक तरह की मालिश है जो इस बात पर आधारित है कि पैर के अलग
अलग बिंदू शरीर के अलग अलग हिस्सों से जुड़े होते हैं। चिकित्सक उंगली या
अंगूठे की मदद से पैर के अलग अलग हिस्सों को खींचते और छोड़ते हैं।
लोगों
जब तक यह मालिश नहीं करवा लेते तब तक उन्हें इस बात का आभास भी नहीं होता
कि वे अपने पैर में भी कितना तनाव लिए हुए हैं। मालिश हो जाने के बाद पैरों
में आराम मिलता है और भले ही इसमें पैरों का उपचार किया जा रहा हो लेकिन
असर पूरे शरीर पर पड़ता है।
डिप्रेशन में अरोमाथेरेपी मालिश
अरोमाथेरेपी में इंसान को अच्छा महसूस कराने के लिए खुशबुओं का इस्तेमाल
किया जाता है। इस मालिश से न केवल आराम मिलता है बल्कि शरीर में हमें खुश
करने वाले हार्मोन बढ़ते हैं और तनाव पैदा करने वाले हार्मोन घटते हैं।
यह डिप्रेशन भगाने में जरूर फासदेमंद होती है। यानी शारीरिक तनाव के साथ साथ
मानसिक तनाव भी दूर होता है। थेरेपी के समय कई तरह की खुशबुओं का प्रयोग किया जाता है जिससे इंसान को शांती महसूस होती है। इसमें फूल, सेंट, मोमबत्तियां काम आती हैं। सारी थकान भूल कर व्यक्ति ताजा महसूस करता है।
म्योफेशियल रिलीज
ज्यादातर मालिश मांस पेशियों पर केंद्रित होती हैं लेकिन म्योफेशियलस रिलीज
फेशिया यानी दो मांस पेशियों, हड्डियों या लिगामेंट को जोड़ने वाले टिशू
पर ध्यान देता है। इसमें कुहनी और उंगली के पोर से दबाव डाला जाता है।
शरीर में हड्डियों और लिगामेंट को जोड़ने वाले टिशुओं का खिंचाव किया जाता है। मांस पेशियों का खिंचाव करने का फायदा तब तक नहीं है जब तक इनको जोड़ने वाले टिशुओं को आराम न दिया जाए क्योंकि तनाव इसी से दूर होता है।