गर्मी में पथरी ना हो, इसके लिए जरूरी हैं ये उपाय
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गर्मियों में शरीर में पानी की कमी के चलते पेशाब गाढ़ा होने लगता है। ऐसे में छोटे-छोटे क्रिस्टल आपस में जुड़कर किडनी में जमा होकर पथरी का कारण बन जाते हैं।
गर्मियों के दिनों में शरीर से पसीना खूब आता है। ऐसे में शरीर से पानी की बहुत बड़ी मात्रा पसीने के ही रूप में बाहर निकल जाती है। शरीर में पानी की कमी के चलते पेशाब गाढ़ा होने लगता है। इसके कारण किडनी में छोटे-छोटे क्रिस्टल पेशाब के रास्ते बाहर आने के बजाय आपस में एक दूसरे से जुड़कर किडनी में जमा हो जाते हैं। इन क्रिस्टलों को ही आम बोलचाल में पथरी कहा जाता है।
किस उम्र में अधिक होती है पथरी
ये क्रिस्टल या तो किडनी में सूजन पैदा करते हैं या फिर यूरेटर (मूत्रवाहिनी) में फंसकर दर्द पैदा करते हैं। हालांकि, मेडिकल साइंस में इसका आसान और पुख्ता इलाज संभव है, ऐसे में स्टोन (पथरी) होने में घबराने की जरूरत नहीं है।
आमतौर पर 20-40 साल की उम्र में पथरी होती है, शरीर में पानी की कमी इसका सबसे बड़ा कारण होता है।
इस तरह से किया जा सकता है इलाज
किडनी में स्टोन जमने या यूरेटर में फंसने से रोगी को तेज दर्द होता है। ऐसे में डॉक्टर एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन कराकर पथरी होने की पुष्टि करते हैं।
इन रिपोर्ट्स के जरिये स्टोन का साइज पता चल जाता है और उसके आधार पर डॉक्टर इलाज करते हैं। यदि स्टोन का आकार 2-4 एमएम है, तो रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से यह पेशाब के रास्ते अपने आप ही बाहर आ जाता है। 4-6 एमएम के स्टोन को दवाइयों से गलाकर बाहर निकाला जा सकता है।
कब जरूरी हो जाता है ऑपरेशन
ज्यादा बड़ा स्टोन होने पर डॉक्टर ऑपरेशन के जरिये इसे शरीर से बाहर कर देते हैं। पथरी निकालने का ऑपरेशन तीन प्रकार से किया जाता है। इसमें यूआरएस (यूरेट्रोस्कोपी), पीसीएनएल (पर्क्युटेनीअस नेफ्रोलिथोटॉमी) या ईएसडब्लूएल (एक्स्ट्राकॉरपोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी) प्रक्रिया अपनाई जाती है। यूआरएस में दूरबीन द्वारा पथरी को बाहर निकाला जाता है।
पीसीएनएल प्रक्रिया में पीठ में छेद करके किडनी से स्टोन बाहर निकाला जाता है, तो वहीं ईएसडब्लूएल में शॉक देकर स्टोन को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है और फिर वह स्टोन पेशाब के रास्ते बाहर आ जाते हैं।
पथरी होने के पीछे खानपान को भी एक कारण माना जाता है। ऐसे में बहुत से लोग पालक, टमाटर, चावल या दालें खाने से परहेज करने लगते हैं, जबकि पथरी से इनका संबंध न के बराबर होता है।
घरेलू उपचार भी हैं मौजूद
शरीर में पानी का स्तर बनाए रखना बहुत जरूरी है, इससे दो से चार एमएम की पथरी खुद-ब-खुद बाहर आ जाती है। कुछ देसी दवाओं के निर्माता दवाओं के जरिये पथरी निकालने की गारंटी देते हैं, जबकि इन दवाओं से भी 2-4 एमएम की पथरी ही बाहर आती है, जो शरीर से अपने आप ही ही बाहर हो जाती है। बड़े साइज की पथरी इन दवाओं से बाहर नहीं आती।
इनपुट- डॉ. अमरेंद्र पाठक (यूरोलॉजिस्ट) गंगाराम हॉस्पिटल, दिल्ली