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क्या हर वक्त थकान रहती है, तो हो सकती है यह वजह

Tue, 21 Apr 2015 01:23 PM IST
Updated Tue, 21 Apr 2015 01:23 PM IST
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causes of excessisive fatigue

क्या आपको हर समय थकान महसूस होती है? ऑफिस पहुंचने के तीन-चार घंटे में ही महसूस होता है कि कोई एनर्जी ड्रिंक ली जाए। घर पर रहते हैं, तो घर के दो-चार काम निपटाने के बाद गहरी सांस लेते हुए अमूमन कह बैठते हैं कि मैं आज बहुत थक गया हूं। ये सारे लक्षण थकान के हैं।

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थकान आज की तेज भागती जीवनशैली की सबसे बड़ी समस्या है, जिसका इलाज समय पर करना बहुत जरूरी है। 40 के पास पहुंच रहे पुरुषों व महिलाओं दोनों के लिए जिंदगी कठिन हो सकती है।
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कारण
यह संभव है कि पोषण की कमी, लंबे घंटों तक निरंतर काम करने, दिमाग पर हमेशा दबाव या पूरी नींद न ले पाने के कारण भी हमेशा व्यक्ति थका महसूस करता है। यह भी हो सकता है कि शरीर के भीतर कोशिकाओं की क्षति हो रही हो।
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अगर इस किस्म की थकान पर ध्यान न देकर इसका हल न किया गया, तो आपके काम पर असर पड़ना तय है। फ्री रैडिकल्स कोशिकाओं के सामान्य कामकाज में बाधा डालते हैं और उन्हें कमजोर बना देते हैं। नतीजतन वक्त से पहले उम्र बढ़ने लगती है, सूजन व डिजेनरेटिव रोग घेरने लगते हैं। वक्त के साथ-साथ शारीरिक ताकत में कमी आना ही बुढ़ापे की प्रक्रिया है।

बचाव और उपचार

causes of excessisive fatigue

कोशिकाओं की अच्छी तरह से मरम्मत के लिए जरूरी है पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, अमीनो एसिड, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट का सेवन करना। जंक फूड, पैक्ड फूड का सेवन और रहन-सहन हमारी जरूरत पूरी करने के लिए काफी नहीं है। भोजन संबंधी अस्वास्थ्यकर आदतों में रिफाइंड और प्रोसेस किया खाना शामिल है।

ये थकान और रक्त में विषैलापन पैदा करने के लिए जिम्मेदार होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप खून में ऊर्जा और कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।

इलाज
संतुलित पोषण, पूरक आहार और व्यायाम का बेहतर संयोजन उम्र बढ़ने की गति को कम करने में कारगर है। इनके साथ ही विटामिन, खनिज व एंटीऑक्सीडेंट भी बहुत जरूरी है, जो हमें सक्रिय व स्वस्थ बनाए रखें। जरूरत पड़ने पर इनके सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं।

30 साल की उम्र तक हमारा शरीर सब काम अच्छी तरह से करता है। हर रोज 300 बिलियन कोशिकाएं क्षतिग्रस्त कोशिकाओं का स्थान लेती हैं और ये सब नई और स्वस्थ कोशिकाएं होती हैं। लेकिन जैसे-जैसे हम 35 के करीब पहुंचते हैं, फ्री-रैडिकल्स की वजह से हमारा सेल्यूलर मेटाबॉलिज्म बदलने लगता है और संचित ऊर्जा का क्षय होने लगता है।

फ्री-रैडिकल्स की उत्पत्ति आधुनिक जीवनशैली, तनाव, प्रदूषण से होता है।

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