{"_id":"59086adf4f1c1b5b35441821","slug":"world-asthma-day-know-the-symptoms-and-treatment-of-asthma","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विश्व अस्थमा दिवसः अगर आप में भी हैं ये लक्षण तो जरूर जानें ये बातें","category":{"title":"Health Classified","title_hn":"हेल्थ क्लासिफाइड","slug":"health-classified"}}
विश्व अस्थमा दिवसः अगर आप में भी हैं ये लक्षण तो जरूर जानें ये बातें
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Tue, 02 May 2017 04:47 PM IST
विज्ञापन
‘अस्थमा : बेटर एयर बेटर ब्रीदिंग’ है इस साल की थीम
- फोटो : ginasthama.org
विश्व में अस्थमा के बारे में जागरूकता प्रसारित करने के लिए समर्पित दिवस है। यह दिवस प्रतिवर्ष मई महीने के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। बढ़ते कल कारखाने, जंगलों की कटाई और प्रदूषण...। विश्व में बढ़ रहे दमा के रोगियों के लिए ये सबसे अहम वजह बनती जा रही है। इसके चलते हवा की शुद्धता कम होती जा रही है और लोगों का सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है।
इसका नतीजा सिर्फ ग्लोबल वार्मिंग के तौर पर हमारे सामने नहीं है, बल्कि विश्व में दमा के रोगी भी वायुमंडल में होने वाली ऑक्सीजन की कमी के चलते बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विश्व अस्थमा दिवस की थीम भी ‘अस्थमा : बेटर एयर बेटर ब्रीदिंग’ रखी है।
बीएचयू के चेस्ट विभाग के प्रो. जीएन श्रीवास्तव ने बताते हैं कि मौजूदा वक्त में 15-20 मीलियन दमा के मरीज हिंदुस्तान में है और इसमें 15 प्रतिशत मरीजों की संख्या बच्चों की है। इसके अलावा बदलती जीवन शैली भी युवाओं को इस बीमारी की ओर ढकेल रही है।
विज्ञापन
स्मोकिंग के चलते ही अस्थमा के मरीज बढ़ रहे हैं। एलर्जी के कारण ये बीमारी बढ़ती है। ठंडा गर्म, धूल, धुआं, तापमान में एकाएक बदलाव के कारण ये बीमारी बढ़ती है। मरीजों को इससे बचना चाहिए।
एक ओर जहां वायुमंडल में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है, वहीं घर में भी धूल और गर्द, पालतू जानवरों, पेंट वगैरह से भी एलर्जी होने के कारण ये बीमारी बढ़ रही है। हर सांस का फूलना दमा नहीं होता लेकिन अगर किसी को दमा रोग है तो उसकी सांस फूलती ही है।
सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी होना, ये इस बीमारी के आम लक्षण हैं। अस्थमा को नियंत्रित करने में दवा का नियमित सेवन जरूरी है। इसके अलावा इंहेलर थेरेपी सही ढंग से लेना भी जरूरी है।
विज्ञापन
इसका नतीजा सिर्फ ग्लोबल वार्मिंग के तौर पर हमारे सामने नहीं है, बल्कि विश्व में दमा के रोगी भी वायुमंडल में होने वाली ऑक्सीजन की कमी के चलते बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विश्व अस्थमा दिवस की थीम भी ‘अस्थमा : बेटर एयर बेटर ब्रीदिंग’ रखी है।
विज्ञापन
बीएचयू के चेस्ट विभाग के प्रो. जीएन श्रीवास्तव ने बताते हैं कि मौजूदा वक्त में 15-20 मीलियन दमा के मरीज हिंदुस्तान में है और इसमें 15 प्रतिशत मरीजों की संख्या बच्चों की है। इसके अलावा बदलती जीवन शैली भी युवाओं को इस बीमारी की ओर ढकेल रही है।
विज्ञापन
स्मोकिंग के चलते ही अस्थमा के मरीज बढ़ रहे हैं। एलर्जी के कारण ये बीमारी बढ़ती है। ठंडा गर्म, धूल, धुआं, तापमान में एकाएक बदलाव के कारण ये बीमारी बढ़ती है। मरीजों को इससे बचना चाहिए।
एक ओर जहां वायुमंडल में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है, वहीं घर में भी धूल और गर्द, पालतू जानवरों, पेंट वगैरह से भी एलर्जी होने के कारण ये बीमारी बढ़ रही है। हर सांस का फूलना दमा नहीं होता लेकिन अगर किसी को दमा रोग है तो उसकी सांस फूलती ही है।
सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी होना, ये इस बीमारी के आम लक्षण हैं। अस्थमा को नियंत्रित करने में दवा का नियमित सेवन जरूरी है। इसके अलावा इंहेलर थेरेपी सही ढंग से लेना भी जरूरी है।
दमा के रोगी : क्या करें क्या ना करें
अस्थमा
दमा के मरीजों के लिए सबसे पहली और जरूरी चीज यह है कि बलगम को हटाकर उन्हें तुरंत आराम दिया जाए। इस मामले में खानपान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
क्या नहीं खाना चाहिए
दूध और उससे बने पदार्थ: दूध और दूध से बने पदार्थ दमा के साथ नहीं चल सकते। ज्यादातर लोगों में दमा की 60 फीसदी वजह दूध और दूध से बने पदार्थ ही होते हैं। अगर दमा के मरीज दूध और दूध से बने पदार्थों का सेवन करना बंद कर दें तो उनका आधा रोग तो तुरंत ही अपने आप ठीक हो सकता है। इसके अलावा केला, कटहल, पकाई हुई चुकंदर न लें। कच्ची चुकंदर ले सकते हैं। मौसमी सेम या फलियां, लोबिया आदि भी नुकसान दायक हैं।
क्या खाना चाहिए
शहद
शहद से शरीर को आवश्यक गर्मी मिलती है। शहद श्वसन नली में बलगम को खत्म कर देता है। शहद और काली मिर्च गर्म पानी के साथ लेने से दमा के दौरे को टाला जा सकता है। अगर यही प्रयोग लगातार किया जाए तो आपको दमा के दौरों से छुटकारा मिल सकता है। नीम के पत्ते को शहद में लपेटकर रोजाना सुबह ले सकते हैं।
भीगी हुई मूंगफली ः यह भी श्वसन नली से बलगम को हटा देती है।
तुलसी ः तुलसी के कुछ पत्ते शहद और काली मिर्च में भिगोकर रख दें। तीन से चार घंटे इन्हें भिगोया रहने दें और फिर पत्तों को चबा लें। इससे दमा का दौरा पड़ने की आशंका बेहद कम हो जाएगी। इसके अलावा रोजाना योगा और प्राणयाम करना चाहिए।
क्या नहीं खाना चाहिए
दूध और उससे बने पदार्थ: दूध और दूध से बने पदार्थ दमा के साथ नहीं चल सकते। ज्यादातर लोगों में दमा की 60 फीसदी वजह दूध और दूध से बने पदार्थ ही होते हैं। अगर दमा के मरीज दूध और दूध से बने पदार्थों का सेवन करना बंद कर दें तो उनका आधा रोग तो तुरंत ही अपने आप ठीक हो सकता है। इसके अलावा केला, कटहल, पकाई हुई चुकंदर न लें। कच्ची चुकंदर ले सकते हैं। मौसमी सेम या फलियां, लोबिया आदि भी नुकसान दायक हैं।
क्या खाना चाहिए
शहद
शहद से शरीर को आवश्यक गर्मी मिलती है। शहद श्वसन नली में बलगम को खत्म कर देता है। शहद और काली मिर्च गर्म पानी के साथ लेने से दमा के दौरे को टाला जा सकता है। अगर यही प्रयोग लगातार किया जाए तो आपको दमा के दौरों से छुटकारा मिल सकता है। नीम के पत्ते को शहद में लपेटकर रोजाना सुबह ले सकते हैं।
भीगी हुई मूंगफली ः यह भी श्वसन नली से बलगम को हटा देती है।
तुलसी ः तुलसी के कुछ पत्ते शहद और काली मिर्च में भिगोकर रख दें। तीन से चार घंटे इन्हें भिगोया रहने दें और फिर पत्तों को चबा लें। इससे दमा का दौरा पड़ने की आशंका बेहद कम हो जाएगी। इसके अलावा रोजाना योगा और प्राणयाम करना चाहिए।