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कोविड-19: फिर दस्तक दे रहा कोरोना, अस्पतालों में बढ़ने लगे मरीज; जानिए इस बार कौन सा वैरिएंट बना खतरा

Sat, 03 Oct 2026 01:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 03 Oct 2026 01:06 PM IST
सार

Covid-19 Latest News: ब्रिटेन में कोविड संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में बढ़ोतरी के बीच XFG वैरिएंट चर्चा में है। यह ओमिक्रॉन के दो सब-वैरिएंट से बना है। आइए जानते हैं कि संक्रमितों में क्या लक्षण देखे जा रहे हैं और यह कोरोना वैरिएंट कितना खतरनाक हो सकता है?

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XFG Stratus Covid Variant Spreads in the UK know Symptoms, Severity and Who Is Most at Risk
कोरोना के मामलों को लेकर अलर्ट - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

साल 2020-23 का दौर आपको याद है न, हर तरफ कोरोनावायरस का खौफ देखा जा रहा था। संक्रमण के कारण अस्पतालों में मरीजों की भीड़ थी, लोगों की मौत हो रही थी। हालांकि बाद में वैक्सीनेशन और बचाव के उपायों ने संक्रमण को कंट्रोल करने में मदद की और दुनिया को इस खतरनाक दौर से बाहर निकाला। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार अलर्ट करते रहे हैं कि कोरोना वायरस खुद को जिंदा रखने के लिए म्यूटेट होता रहता है जिसके कारण वायरस के नए वैरिएंट्स के आने का खतरा भी लगातार बना रहता है। कोरोनावायरस अब भले ही बिल्कुल शांत हो गया है हालांकि समय-समय पर इसके मामले सामने आते रहते हैं।

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हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन के अस्पतालों में संक्रमण के मामले एक बार फिर से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। इस बार कोरोना का वैरिएंट एक्सएफजी (XFG) लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। इसे 'अमेरिकन कोविड' और 'स्ट्रेटस' के नाम से भी बताया जा रहा है।
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आइए कोरोना के बढ़ते खतरों और इस वैरिएंट के बारे में जान लेते हैं।

XFG Stratus Covid Variant Spreads in the UK know Symptoms, Severity and Who Is Most at Risk
कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : Adobe Stock Photos

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ब्रिटेन के अस्पतालों में कोविड पॉजिटिविटी बढ़ी है और मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की दर में भी इजाफा हुआ है। खास बात यह है कि 85 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की दर सबसे ज्यादा देखी जा रही है। 

लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। कोविड के आंकड़े बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि XFG पहले के कोरोना वैरिएंट्स से ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। अभी उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई सबूत नहीं है। ये वैरिएंट पहले भी देखा गया है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इसे ज्यादा जोखिमों वाला नहीं मानता है।

पॉजिटिविटी रेट और अस्पताल में भर्ती होने की दर बढ़ी

ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी (यूकेएचएसए) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अस्पतालों में कोविड टेस्ट पॉजिटिव आने की दर 5.9% से बढ़कर 7% हो गई है। यानी अस्पताल में जांच कराने वाले लोगों में अब पहले की तुलना में ज्यादा लोगों में कोविड संक्रमण मिल रहा है।
 

  • हर सप्ताह कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती होने की दर भी बढ़ी है। यह प्रति एक लाख लोगों पर 0.81 से बढ़कर 1.20 हो गई है। यानी इसमें करीब 48% की बढ़ोतरी हुई है।
  • सबसे ज्यादा बढ़ोतरी लंदन में दर्ज की गई। यहां कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती होने की दर में करीब 79% का इजाफा हुआ।
  • जिन कोविड पॉजिटिव सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग की गई, उनमें आधे से ज्यादा में XFG वैरिएंट पाया गया। जीनोम सीक्वेंसिंग का मतलब वायरस के आनुवंशिक ढांचे की जांच करना है, जिससे पता चलता है कि संक्रमण किस वैरिएंट से हुआ है?
  • मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि 85 साल से अधिक उम्र के लोग अस्पताल में ज्यादा भर्ती हो रहे है। यह प्रति एक लाख लोगों पर 7.08 से बढ़कर 12.43 हो गई। खबरों के मुताबिक संक्रमण की वास्तविक संख्या इससे ज्यादा हो सकती है।
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कोरोना के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com

कोरोना के इस वैरिएंट के बारे में जानिए

एक्सएफजी, कोरोनावायरस (सार्स-सीओवी-2) का एक रीकॉम्बिनेंट वैरिएंट है। रीकॉम्बिनेंट का मतलब है कि यह वायरस के दो अलग-अलग वैरिएंट के आनुवंशिक हिस्सों के आपस में मिलने से बना है।
 

  • XFG ओमिक्रॉन वैरिएंट के LF.7 और LP.8.1.2 नाम के दो सब-वैरिएंट से बना है। 
  • XFG का मामला सबसे पहले 27 जनवरी 2025 का है। डब्ल्यूएचओ ने जून 2025 में इसे वेरिएंट अंडर मॉनिटरिंग श्रेणी में रखा था।


क्या हो रहे हैं संक्रमितों में लक्षण?

XFG से होने वाले संक्रमण के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। फिलहाल ज्यादातर लोगों में खांसी, बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, नाक बहने और थकान की समस्या हो रही है।
 

  • कुछ लोगों को मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, पेट और आंत से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं। 
  • कुछ मामलों में आंखों या छाती से जुड़ा संक्रमण भी हो सकता है। 
  • कुछ लोगों में अब भी संक्रमण के मामले एसिम्टोमैटिक यानी बिना किसी खास लक्षण वाले हो सकते हैं।
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कोरोना का वैरिएंट कितना खतरनाक? - फोटो : Adobe Stock

क्या XFG गंभीर बीमारी का भी बनता है कारण?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं है कि ब्रिटेन में फैल रहा मौजूदा कोविड वैरिएंट्स पहले के वैरिएंट्स की तुलना में ज्यादा गंभीर बीमारी पैदा कर रहा है।

इम्युनिटी एंड इंफेक्शन बायोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. मैथ्यू सिगिंस कहते हैं, ब्रिटेन में फिलहाल फैल रहे वैरिएंट से ज्यादा गंभीर बीमारी होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। हालांकि अधिक जोखिम वाले समूहों में कोविड अब भी गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है। बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में कोविड के गंभीर होने का खतरा अभी भी ज्यादा रहता है।

हालांकि, अभी की स्थिति की तुलना कोरोना महामारी के दौरान समस्याओं से नहीं की जा सकती है। ज्यादातर लोगों को कोविड की वैक्सीन लग चुकी है जिससे अब गंभीर बीमारी होने का जोखिम कम देखा जा रहा है।





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स्रोत:
American Covid’ strain sees resurgence in England as hospitalisations rise


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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