World Obesity Day 2025: टेक्नोलॉजी वरदान या अभिशाप? बढ़ते मोटापे के लिए ये कैसे जिम्मेदार
अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, खान-पान में गड़बड़ी, तनाव का बढ़ता स्तर और आनुवंशिकी जैसे बहुत से कारक हैं जिन्हें मोटापे के लिए जिम्मेदार माना जाता रहा है। इन सबसे इतर मोटापे को बढ़ाने वाली एक और स्थिति है जिसपर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता है। वह है- टेक्नोलॉजी पर बढ़ती हमारी निर्भरता। टेक्नोलॉजी और मोटापे का क्या संबंध है, आइए जानते हैं।
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विस्तार
World Obesity Day: अधिक वजन और मोटापे की स्थिति वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौतियां बढ़ाती जा रही है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी इसका शिकार हो रहे हैं। भारतीय आबादी भी तेजी से मोटापे की चपेट में आ रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में 100 मिलियन (10 करोड़) से ज्यादा लोग मोटापे से जूझ रहे हैं। पेट की बढ़ती चर्बी (बेली फैट) से सबसे ज्यादा लोग परेशान हैं। भारत में 12% पुरुष और 40% महिलाएं बेली फैट से ग्रस्त हैं। केरल (65.4%), तमिलनाडु (57.9%), पंजाब (62.5%) और दिल्ली (59%) सभी में मोटापे की दर बहुत ज्यादा है।
देश में तेजी से बढ़ती इस समस्या पर हाल ही में अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिंता व्यक्त करते हुए सभी लोगों से मोटापे को कंट्रोल करने के लिए प्रयास करने की सलाह दी है।
आंकड़ों के अनुसार, साल 1975 से दुनियाभर में मोटापे की दर लगभग तीन गुना हो गई है। दुनियाभर में तेजी से बढ़ती मोटापे की समस्या और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने और मोटापा कम करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हर 4 मार्च को विश्व मोटापा दिवस मनाया जाता है।
अब सवाल ये उठाता है कि हम यहां कैसे पहुंचे? आइए इस बारे में विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।
बढ़ता मोटापा एक बड़ा खतरा
बेशक, अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, खान-पान में गड़बड़ी, तनाव का बढ़ता स्तर और आनुवंशिकी जैसे बहुत से कारक हैं जिन्हें मोटापे के लिए जिम्मेदार माना जाता रहा है। इन सबसे इतर मोटापे को बढ़ाने वाली एक और स्थिति है जिसपर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता है। वह है- टेक्नोलॉजी पर बढ़ती हमारी निर्भरता। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये दुनियाभर में मोटापे की संख्या में भारी वृद्धि के प्रमुख कारणों में से एक है।
मानव शरीर का वजन चार तत्वों मांसपेशी, हड्डी, पानी और वसा पर निर्भर करता है। हड्डियों के घनत्व के अलावा, अन्य सभी तत्व आपके शरीर की स्थिति के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए इन सभी का संतुलन बहुत आवश्यक होता है।
अब विषय पर लौटते हैं। जहां तकनीक में उन्नति ने हमें ढेर सारी नई सुविधाएं दी हैं, वहीं इसने हमारे जीवन को शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों तरह से काफी हद तक प्रभावित भी किया है। हम सभी टेक्नोलॉजी और डिजिटल उपकरणों से इस कदर बंध गए हैं कि खाना खाते समय भी स्क्रीन पर नजर बनी रहती है।
डिजिटल उपकरणों पर हमारा ज्यादा समय बीतना स्क्रीन टाइम को बढ़ा रहा है, जिसे अध्ययनों में संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया जाता रहा है। स्क्रीन टाइम यानी मोबाइल-लैपटॉप, टीवी जैसे उपकरणों पर बीतने वाला समय, हमें शारीरिक रूप से निष्क्रिय बनाता जा रहा है। ऐसे में शारीरिक सक्रियता, व्यायाम में कमी जैसी दिक्कतें बढ़ रही हैं जो सीधे तौर पर मोटापे के खतरे को बढ़ाने वाली मानी जाती हैं।
टेक्नोलॉजी और बढ़ते मोटापे का संबंध
टेक्नोलॉजी और बढ़ते मोटापे के संबंधों के बारे में समझने के लिए हमने एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ संदीप खरब से संपर्क किया। डॉ संदीप बताते हैं, टेक्नोलॉजी ने निश्चिच ही हमारे जीवन को काफी सरल कर दिया है, पर जिस तरह से इसपर हमारी निर्भरता बहुत ज्यादा बढ़ गई है इसके कई नुकसान भी देखे जा रहे हैं।
बढ़ते मोटापे के लिए भी इसे एक बड़ा कारण माना जा रहा है। सीधा संबंध ये है कि जितना ज्यादा हम मोबाइल-लैपटॉप या अन्य स्क्रीन के संपर्क में रहते हैं, उतनी ही हमारी फिजिकल एक्टिविटी कम होती जाती है। ऐसे में बाहर खेलने, वॉक करने, व्यायाम के लिए हमें जितना समय चाहिए होता है वह नहीं मिल पाता, जिससे वजन बढ़ने का जोखिम अधिक हो जाता है।
स्क्रीन टाइम का बढ़ना खतरनाक
इसका एक दूसरा भी पहलू है। स्क्रीन टाइम जैसे मूवी देखते समय, हम अनावश्यक रूप से स्नैक्स, सॉफ ड्रिक्स का सेवन अधिक करने लगते हैं, जिससे हमारा कैलोरी इंटेक बढ़ जाता है जिसके परिणास्वरूप वजन बढ़ने का खतरा भी अधिक हो जाता है। बच्चों की सेहत पर भी इसका गंभीर असर हो रहा है।
स्क्रीन टाइम बढ़ने का एक दुष्प्रभाव ये भी है कि ये हमारे शरीर में मेलाटॉनिन हार्मोन के स्तर को प्रभावित करने लगती है। ये हार्मोन अच्छी नींद के लिए बहुत जरूरी होता है। अगर आप अक्सर बहुत ज्यादा लाइट या स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट के संपर्क में रहते हैं तो इससे मेलाटॉनिन प्रभावित होने लगता है, जिससे शरीर में हार्मोनल असंतुलन की समस्या बढ़ने लगती है, इसका भी वेट पर असर होने लगता है।
फूड एप्स बढ़ते मोटापे के लिए कैसे जिम्मेदार?
टेक्नोलॉजी और मोटापे के संबंध में फूड एप्स की भी बड़ी भूमिका देखी जा रही है। इससे खाना ऑर्डर करना बहुत आसान हो गया है, आपको बस फोन उठाना है और ऑर्डर कर देना है, इसके कारण भी हमारा कैलोरी इंटेक बढ़ गया है जिसे मोटापा बढ़ाने वाला माना जाता है। लगभग सभी उम्र के लोगों में इसका असर देखा जा रहा है।
टेक्नोलॉजी से दूर हो पाना आज के समय में न तो आसान है और न ही संभव, पर हम इसपर अपनी निर्भरता को जरूर कम कर सकते हैं। विशेषतौर पर स्क्रीनटाइम को कम करना मोटापे की समस्या से बचाने में हमारे लिए मददगार हो सकता है।
बच्चों में मोटापे की स्थिति खतरनाक
बढ़ते मोटापे की स्थिति हमारी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली हो सकती है। हाल में अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में में हमने बताया कि किस तरह से बच्चों में बढ़ते मोटापे के कारण कम उम्र में ही डायबिटीज का खतरा काफी तेजी से बढ़ रहा है।
डायबेटोलॉजिस्ट डॉ आमिर शेख बताते हैं बच्चों में मोटापे के बढ़ते मामलों ने कम उम्र में ही डायबिटीज होने के जोखिमों को भी बढ़ा दिया है। अगर आपका बच्चा मोटापे का शिकार है, इसके साथ माता-पिता में से किसी को पहले से डायबिटीज की दिकक्त रही है तो ये खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यहां पढ़िए पूरी खबर
फिर आप मोटापे से कैसे बचें?
अमर उजाला से बातचीत में आहार विशेषज्ञ डॉ प्रतिमा सिंह बताती हैं, वजन को कंट्रोल रखने का सबसे आसान फार्मूला है-
''आप दिन भर में जितनी कैलोरी वाली चीजें खाते हैं, उससे अधिक कैलोरी बर्न करें।''
मोटापा कम करने के लिए लाइफस्टाइल को सबसे पहले ठीक करें। जो लोग दिनभर बैठे रहते हैं (ऑफिस में बैठे रहना या घर पर आराम), व्यायाम नहीं करते, उनमें कैलोरी बर्न रेट कम होती है जिससे वजन बढ़ने लगता है। अनियमित दिनचर्या जैसे देर रात तक जागना, गलत समय पर खाना-खाना और पर्याप्त नींद न लेना भी मोटापे को बढ़ावा देता है। जो लोग अधिक टेंशन में रहते हैं उनमें भी मोटापे का खतरा अधिक देखा गया है।
तनाव की स्थिति में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ने लगता है, जो वेट गेन का कारण बन सकता है। इन सबमें सुधार के साथ स्क्रीन टाइम को कम करना आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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