विश्व साहित्य का आकाश: सेलेस्टियल बॉडीज- अरब दुनिया की झांकी
जोखा अल्हार्थी की किताब ‘सेलेस्टियल बॉडीज’ को 2019 के लिए इंटरनेशनल बुकर अवॉर्ड मिला। पहली बार यह पुरस्कार किसी अरबी भाषा के साहित्य को मिला था। यह उपन्यास एक कमरे में शुरू होता है और एक दुनिया में समाप्त होता है। इंग्लिश में हम सामान्यत: जिन आदर्शों तथा विचारों एवं अनुभवों को नहीं पाते हैं, ऐसी बातों के बारे में इससे पता चलता है।
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गुलामी मनुष्यता का अभिशाप है, पर यह प्रथा तकरीबन सब देशों में रही है, खाड़ी के देशों में यह हाल तक जारी थी। ओमान में 1970 में इसे गैर कानूनी करार दिया गया। दास प्रथा एक बहुत जटिल प्रणाली है। इसका प्रभाव व्यक्ति, परिवार और समाज तथा देश सब पर पड़ता है। गुलामी प्रथा और इसके व्यक्ति-परिवार पर पड़े जटिल प्रभाव को ओमान की लेखिका जोखा अल्हार्थी ने उपन्यास ‘लेडीज ऑफ द मून’ में अरबी भाषा में दिखाया है। उनके दो और उपन्यास, दो कहानी संग्रह तथा एक बच्चों की किताब भी प्रकाशित है।
उपन्यास ‘लेडीज ऑफ द मून’ का मेरीलिन बूथ ने इंग्लिश में ‘सेलेस्टियल बॉडीज’ नाम से अनुवाद किया जो इंग्लैंद में सैंडस्टोन प्रेस से प्रकाशित हुआ। मैन बुकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार की दौड़ में यह शामिल हुआ और पांच अन्य किताबों के साथ इसे शॉर्ट लिस्ट में स्थान मिला।
जोखा अल्हार्थी की किताब ‘सेलेस्टियल बॉडीज’ को 2019 के लिए इंटरनेशनल बुकर अवॉर्ड मिला। पहली बार यह पुरस्कार किसी अरबी भाषा के साहित्य को मिला था। इस वर्ष के निर्णायक मंडल में फिलॉसफर एन्जी ह्यूज, लेखक, अनुवादक मौरीन फ्रीली, उपन्यासकार-व्यंग्यकार एल्नाथन जॉन तथा उपन्यासकार पंकज मिश्रा शामिल थे। इतिहासकार बेटनी ह्यूज इस मंडल की अध्यक्ष थीं।
पुरस्कार राशि लेखिका जोखा अल्हार्थी तथा अनुवादक मेरीलिन बूथ में बराबर-बराबर बांटी जाएगी। जब किताब लॉन्ग लिस्ट में शामिल हुई थी तभी अनुवादक बूथ ने हर्षित होते हुए कहा था कि यह पुरस्कार वृहतर पाठकों का ध्यान ओमान के साहित्य की ओर आकर्षित करेगा। लेकिन उन्होंने अपने साक्षात्कार में यह भी कहा कि ‘अरबी साहित्य की यह प्रवृति रही है कि वह अरब दुनिया के रोड मैप के रूप में देखा जाता है, कला के रूप में नहीं, काल्पनिक लेखन के रूप में नहीं।’
वैसे इस उपन्यास का अनुवाद आसान कार्य नहीं था। अनुवादिका कहती हैं स्थानीय अभिव्यक्तियों के सघन प्रयोग और क्लासिक अरबी काव्य ने उपन्यास के अनुवाद को खासा घना चुनौतीपूर्ण बना दिया था, लेकिन आज वे अपनी मेहन को ले कर बहुत प्रसन्न हैं।
पुरस्कार प्राप्ति के बाद अपने साक्षात्कार में जोखा अल्हार्थी ने कहा, ओमान के लेखक चाहते हैं, विदेशी पाठक उनके देश को खुले मन और हृदय से देखें। उन्होंने कहा,
फर्क नहीं पड़ता कि आप कहां रहते हैं, प्रेम, हानि, मैत्री, दु:ख-दर्द और आशा की भावनाएं समान होती हैं। मनुष्यता को इस सत्य में विश्वास करने के लिए अभी बहुत काम करना है, ऐसा उन्होंने कहा। अन्य देशों के लेखकों की भांति ओमान के लेखक भी संघर्ष करते हैं और अपने लेखन या कला में प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। यह बात सारे विश्व में साझा है।
निर्णायक मंडल की अध्यक्ष ह्यूज के अनुसार निर्णायकों को अल्हार्थी के उपन्यास की सूक्ष्म कलात्मकता पसंद आई। इसमें दूसरी किताबों की बनिस्बत कम दिखावा है, एक तरह की काव्यात्मक है। यह आकर्षक दुनिया में पारिवारिक ड्रामा के रूप में प्रारंभ होता है, लेकिन फिलॉसफी की परतों, मनोविज्ञान तथा काव्यात्मक गद्य के साथ आप चरित्रों के संबंधों में डूब जाते हैं।
यह हमें एक भिन्न तरीके से पढ़ने को प्रोत्साहित करता है। उनके अनुसार ‘सेलेस्टियल बॉडीज’ ऐसी किताब है जो दिमाग और दिल को बराबर-बराबर जीत लेती है।
‘सेलेस्टियल बॉडीज’ की कहानी
‘सेलेस्टियल बॉडीज’ की कहानी ओमान के एक गांव अल-अवाफी में प्रारंभ होती है। यह एक रेगिस्तानी देश ओमान की तीन बहनों की कहानी है। मय्या, आसमा तथा खावला तीन बहनें हैं। मय्या का दिल टूटता है इसके बाद वह एक रईस परिवार में शादी करती है। आसमा कर्तव्य पालन के लिए शादी करती है और खावला एक ऐसे आदमी का इंतजार कर रही है जो कनाडा में प्रवासी है।
बहनों के साथ-साथ यह इस रेगिस्तानी देश की भी कहानी है, जो दासता के अपने इतिहास से उबर कर आधुनिक जटिल दुनिया के साथ तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष कर रहा है। उपन्यास लोगों के जीवन के विभिन्न अंगों, प्रेम एवं हानियों के द्वारा इस समाज के बारे में बताता है। इसके समस्त स्तरों के लोगों, वहां काम करने वाले दास परिवारों के अत्यंत गरीब लोगों के और जो ओमान तथा मस्कट में पैसा बनाने आए हैं, उन अमीर लोगों के बारे में बताता है।
यह उपन्यास एक कमरे में शुरू होता है और एक दुनिया में समाप्त होता है। इंग्लिश में हम सामान्यत: जिन आदर्शों तथा विचारों एवं अनुभवों को नहीं पाते हैं, ऐसी बातों के बारे में इससे पता चलता है। अपने जेंडर, नस्ल तथा सामाजिक भिन्नता और दासता के विश्लेषण में यह प्रत्येक उस स्टीरियोटाइप को झुठलाता है जिनकी हम अपेक्षा करते हैं। यह आद्योपांत चकित करता है। पाठक इसके प्रेम में पढ़ जाता है।
मार्सिया लिंक्स क्वाले ने अपनी समीक्षा में लिखा है कि यह जटिल किताब ओमान के एक परिवार की तीन पीढ़ियों की 1880 से आज तक की कहानी है। प्रत्येक चरित्र- स्त्री या पुरुष, दास या स्वतंत्र खुद को फंसा हुआ पाता है, किसी-न-किसी तरह, इतिहास द्वारा जैसे उनके चारों ओर ओमान खुद परिवर्तित हो रहा है। उपन्यास ओमान के परम्परागत तथा आधुनिक जीवन का आकर्षक चित्र प्रस्तुत करता है।
एक चित्र देखिए-
‘जब वह और उसकी मां ओमान के पूर्वी तट पर पहुंचीं उन्हें बेच दिया गया। दास व्यापारियों ने उन्हें दूसरे दास व्यापारियों को बेच दिया, जब तक कि अंत में व्यापारी सुलेमान ने उन्हें नहीं खरीदा। हबीब की मां बरसों रोई।’ एक अन्य उदाहरण, ‘माया, प्रेम क्या है, क्या इसका तुमको कोई अहसास नहीं था?
क्या तुमने कुछ अनुभव नहीं किया कि मैं किस स्थिति से गुजर रहा था, जब मैं तुम्हारे पैतृक घर का काबा का चक्कर लगाते तीर्थयात्री की तरह एक बार, दो बार, सात बार चक्कर लगा रहा था? कभी भी घर मेरे पैशन को समाने के लिए काफी हो सकता है? माया, तब कैसे सिलाई मशीन पर झुकी तुम्हारी निगाहें प्रेम के मेरे विशाल और छटपटाते विस्तार तथा मेरे कैद स्व को कभी न देख सकीं?’
अब तो इस उपन्यास का अनुवाद जर्मन, इटैलियन, कोरियन, सर्बियन आदि अनेक भाषाओं में भी हो चुका है। उपन्यासकार आशा करती है कि अंतरराष्ट्रीय पाठकों को यह जानने में सहायता देगा कि ओमान में सक्रिय और प्रतिभावान लेखकों का एक समुदाय रहता है और जो अपनी कला के लिए काम करता है।
‘सेलेस्टियल बॉडीज’ दिखाता है कि अरब दुनिया में किस प्रकार का लेखन हो रहा है, ओमान जैसे देश में भी जो कम शिक्षित देश है। ये किताबें उस सीमा का विस्तार करती हैं जो बताती हैं कि क्या सोचा और कहा जा सकता है। हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में इसका अनुवाद आना चाहिए।
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