फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Health & Fitness ›   Why Did a Stroke Strike after 30 what jobs that put you more at risk know warning signs

हेल्थ अलर्ट: न हाई बीपी-न धूम्रपान, स्ट्रोक ने छीन ली फिटनेस कोच के शरीर की ताकत; पता ही नहीं चल पाया कारण

Mon, 14 Sep 2026 01:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 14 Sep 2026 01:52 PM IST
सार

33 वर्षीय फिटनेस कोच बेक्की बराट को बच्चे के जन्म के कुछ ही हफ्ते बाद अचानक स्ट्रोक आया। उन्हें न तो हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत थी, न कोई अन्य जोखिम कारक। गनीमत रही कि समय पर इलाज मिलने से जान बच गई, लेकिन शरीर का बायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। विशेषज्ञ युवाओं और प्रसव के बाद महिलाओं को अपने जोखिमों को लेकर सावधान रहने की सलाह दे रहे हैं।

विज्ञापन
Why Did a Stroke Strike after 30 what jobs that put you more at risk know warning signs
ब्रेन स्ट्रोक की घटना - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

आज के समय में स्वस्थ दिखना, क्या स्वस्थ होने की गारंटी है? जवाब है- नहीं। जिस तरह से लोगों की दिनचर्या और खानपान की गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, इसने कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ा दिया है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में 30 से कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक-कार्डियक अरेस्ट से मौत की खबरें काफी सुर्खियों में रही हैं। हार्ट अटैक की तो चर्चा अक्सर होती ही रहती है पर क्या आप जानते हैं कि इसी तरह से स्ट्रोक के मामलों में भी काफी तेजी से वृद्धि हो रही है।

विज्ञापन


स्ट्रोक एक जानलेवा स्थिति है, मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह रुक जाने या फिर कम हो जाने के कारण ये दिक्कत होती है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषण मिलना बंद हो जाता है और कोशिकाएं डेड होने लग जाती हैं।
विज्ञापन


स्ट्रोक से अगर जान बच भी जाए तो कुछ लोगों को लकवा की समस्या हो सकती है। हार्ट अटैक की ही तरह स्ट्रोक के लिए भी मुख्यरूप से हाई ब्लड प्रेशर को कारण माना जाता रहा है। आप भले ही देखने में बिल्कुल स्वस्थ और फिट हों फिर भी स्ट्रोक का खतरा हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


33 वर्षीय बेक्की बराट की कहानी भी ऐसी ही है। तीन हफ्ते पहले ही वह मां बनी थीं, फिटनेस कोच थी और खुद को पूरी तरह फिट महसूस कर रही थीं। शायद ही किसी को यह ख्याल आया होगी कि अगले कुछ दिनों में उनकी जिंदगी पूरी तरह बदलने वाली है। उन्हें पहले से न कोई ब्लड प्रेशर की दिक्कत थी, न धूम्रपान की आदत और न ही ऐसी कोई बीमारी। फिर भी अचानक आए स्ट्रोक ने सबकुछ तबाह कर दिया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बेक्की बराट के साथ घटी इस घटना से सभी लोगों को सीख लेने की जरूरत है, हर बार बीमारियां बता कर नहीं आती हैं।

Why Did a Stroke Strike after 30 what jobs that put you more at risk know warning signs
ब्रेन स्ट्रोक में समय पर इलाज जरूरी - फोटो : Adobe Stock

क्या है पूरा मामला?

ब्रिटेन की स्थानीय मीडिया में प्रकाशित में 33 साल की बेक्की बराट का जिक्र मिलता है।

इसी साल अप्रैल में एक रविवार की सुबह बेक्की बराट अपने सोफे पर बैठी थीं। उनकी गोद में तीन हफ्ते का बेटा ब्यूडेन था और पास ही उनकी दो साल की बेटी अराया खेल रही थी। उस वक्त बेक्की को जिंदगी बेहद खूबसूरत और सुकून भरी लग रही थी।

बेक्की स्वास्थ्य और फिटनेस कोच हैं। कुछ ही देर पहले उन्होंने अपने पति जेम्स से कहा था कि प्रसव को कुछ ही हफ्ते हुए हैं, फिर भी अब वह खुद को बेहद अच्छा महसूस कर रही हैं।लेकिन अगले ही कुछ मिनटों में सबकुछ बदल गया।

33 वर्षीय बेक्की बताती हैं, जेम्स ऊपर टॉयलेट के लिए गए थे। तभी अचानक मेरे शरीर में एक अजीब और भारीपन जैसा एहसास हुआ। बाएं हाथ में अपने आप ऐंठन होने लगी। मैंने किसी तरह ब्यूडेन को फर्श पर सुलाया। लेकिन जैसे ही मैंने खड़े होने की कोशिश की, मेरा बांया पैर पूरी तरह सुन्न हो गया और मैं जमीन पर गिर गई। मैं हिल भी नहीं पा रही थी। मेरी आवाज लड़खड़ा रही थी लेकिन कोशिश करके मैंने जेम्स को आवाज लगाई।
 
आनन फानन में बेक्की को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने बताया कि ये स्ट्रोक था। बेक्की कहती हैं,  मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ये हुआ क्या है? मैं फिटनेस कोच थी, खान-पान अच्छा था, हाई ब्लड प्रेशर भी नहीं था ऐसे में उन्हें स्ट्रोक कैसे हो सकता था?

Why Did a Stroke Strike after 30 what jobs that put you more at risk know warning signs
स्ट्रोक की घटना ने बदल दी जिंदगी - फोटो : Freepik.com

स्ट्रोक का खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि स्ट्रोक का सबसे आम प्रकार इस्केमिक स्ट्रोक होता है। इसमें खून का थक्का किसी रक्त की नली को रोक देता है और दिमाग तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाती है। करीब 85 प्रतिशत स्ट्रोक इसी तरह के होते हैं।

रॉयल डेवॉन यूनिवर्सिटी हेल्थकेयर एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के स्ट्रोक विशेषज्ञ प्रोफेसर मार्टिन जेम्स कहते हैं, ज्यादातर स्ट्रोक 65 साल से अधिक उम्र के लोगों में होते हैं। लेकिन करीब हर चार में से एक स्ट्रोक कामकाजी उम्र के लोगों, यहां तक कि 35 से कम उम्र वालों में भी हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

 

 

 

 

 

View this post on Instagram

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

A post shared by OLAMIDE STONE (@olamidestone07)




घटना के करीब 15 मिनट के भीतर एंबुलेंस से बेक्की को अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने तक उनके शरीर का पूरा बायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो चुका था।
 
  • बेक्की कहती हैं, मैं शरीर को बिल्कुल भी हिला नहीं पा रही थी। मेरे चेहरे के भाव तक खत्म हो गए थे और मेरी आवाज लड़खड़ाई सी निकल रही थी। 
  • डॉक्टरों ने तुरंत सीटी स्कैन किया। इसमें दिमाग में ब्लीडिंग का कोई संकेत नहीं मिला। ब्लीडिंग वाले स्ट्रोक को हेमरेजिक स्ट्रोक कहा जाता है। 

बेक्की बताती हैं, मुझे पहले कभी-कभी माइग्रेन की समस्या होती थी। इसलिए डॉक्टरों को शुरुआत में लगा कि शायद उन्हें हेमिप्लेजिक माइग्रेन हुआ है। यह माइग्रेन का एक दुर्लभ प्रकार है, जिसमें दिमाग की असामान्य विद्युत गतिविधि के कारण शरीर के एक तरफ कुछ समय के लिए कमजोरी या लकवे जैसी स्थिति हो सकती है। इसके लक्षण स्ट्रोक जैसे दिखाई दे सकते हैं।

एमआरआई में स्ट्रोक का पता चला

दो दिन बाद एमआरआई से पुष्टि हो गई कि बेक्की के दिमाग के दाहिने हिस्से तक जाने वाली रक्त आपूर्ति एक थक्के के कारण रुक गई थी। समय पर इलाज शुरू होने से उनकी जान बचाने में मदद मिली, लेकिन दिमाग के की कोशिकाओं को काफी नुकसान पहुंच चुका था। इसी वजह से उनके शरीर का बायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था।

अस्पताल में कुछ दिनों तक रिहैबिलिटेशन और थेरेपी की मदद से शरीर की खोई हुई गतिविधियों को दोबारा हासिल करने में मदद तो मिलने लगी, लेकिन घर लौटते समय वह वह व्हीलचेयर पर थीं और शरीर का बायां हिस्सा अब भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। 

अब भी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें स्ट्रोक क्यों आया? विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र के मरीजों में स्ट्रोक का सटीक कारण पता न चलना असामान्य नहीं है। बेक्की कहती हैं, मैं यह समझती हूं कि शायद मुझे कभी वह जवाब न मिले जिसकी मैं तलाश कर रही हूं। करीब 50 प्रतिशत स्ट्रोक के पीछे का कारण पता नहीं चल पाता। उन्हें यह भी पता है कि भविष्य में दोबारा स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। 

Why Did a Stroke Strike after 30 what jobs that put you more at risk know warning signs
गर्भधारण और प्रसव के बाद के जोखिम - फोटो : Adobe Stock

प्रसव के बाद बढ़ जाता है खतरा

बेक्की के हाल ही में मां बनने को भी उनके स्ट्रोक की एक संभावित वजह माना जा रहा है। विरल यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में स्ट्रोक विशेषज्ञ प्रोफेसर डेब लोवे कहते हैं, गर्भावस्था और बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद का समय स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाने वाला माना जाता है।
 

  • गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर पर काफी दबाव होता है।
  • इस दौरान हाई ब्लड प्रेशर और खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है।
  • इसी वजह से गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का ब्लड प्रेशर नियमित रूप से जांचा जाता है।


2017 में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित करीब 20 लाख महिलाओं पर हुए एक अध्ययन के अनुसार, बच्चे के जन्म के आसपास के दिनों में महिला को स्ट्रोक होने का जोखिम सामान्य समय की तुलना में करीब नौ गुना अधिक हो सकता है। प्रसव के बाद के छह हफ्तों में भी यह जोखिम सामान्य समय की तुलना में करीब तीन गुना अधिक रहता है। अनुमान है कि हर एक लाख गर्भावस्थाओं में करीब 30 स्ट्रोक हो सकते हैं।

जिन महिलाओं को प्री-एक्लेम्पसिया यानी गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की गंभीर समस्या होती है, उनमें खतरा काफी ज्यादा होता है। इस समूह में करीब 500 प्रसव में से एक में स्ट्रोक होने की बात सामने आई है।

Why Did a Stroke Strike after 30 what jobs that put you more at risk know warning signs
ब्रेन स्ट्रोक की घटनाएं - फोटो : Adobe Stock

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वोल्फसन सेंटर फॉर द प्रिवेंशन ऑफ स्ट्रोक एंड डिमेंशिया की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. लिनशिन ली कहती हैं, कम उम्र में स्ट्रोक बढ़ने के कई संभावित कारणों पर शोध चल रहा है।
 

  • साल 2022 में जामा न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि 55 साल से कम उम्र के लोगों में स्ट्रोक की घटनाएं 2002-2010 की अवधि की तुलना में 2010-2018 के बीच 67 प्रतिशत बढ़ गईं।
  • वहीं बुजुर्गों में स्ट्रोक की दर कम हुई। हाई ब्लड प्रेशर, अधिक वजन और धूम्रपान को इसका बड़ा कारण माना जाता रहा है। 


डॉ. लिनशिन ली के शोध में खास तौर पर उन युवा मरीजों में स्ट्रोक बढ़ने की दर अधिक देखी गई, जिनमें ये सामान्य जोखिम कारक मौजूद नहीं थे। इससे लंबे समय तक काम करना, ज्यादा तनाव और वायु प्रदूषण जैसे दूसरे कारणों पर ध्यान गया।

डॉ. ली के कहती हैं, लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा काम करने से दिल की धड़कन की सामान्य लय प्रभावित हो सकती है और इसके कारण भी  स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।  वायु प्रदूषण भी स्ट्रोक के संभावित कारणों में शामिल माना जा रहा है। प्रदूषित हवा शरीर में सूजन बढ़ा सकती है और इससे खून में थक्का बनने का खतरा बढ़ सकता है।

स्ट्रोक से बचाव के लिए एक आसान लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करवाना है।




--------------
स्रोत:
I was breastfeeding my baby — an hour later I was paralysed


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed