कहीं आप भी तो नहीं हो रहे अंडरएक्टिव थायरॉयड के शिकार, ऐसे पहचानें लक्षण और करें उपचार
बिस्तर में लेटने और करवटें बदलते रहने से नींद नहीं आती। सुबह का अलार्म ज्यादा थका होने का एहसास दिलाता है। प्रेरणा शून्य मन, मानसिक शिथिलता, एकाग्रचित्तता की कमी, याद्दाश्त की गड़बड़ी और इसके साथ जुड़ी धारणाएं और समस्या को सुलझाने का कौशल काफी भयावह और थकाने वाला है। यह उदासी कभी न खत्म होने वाले मैराथन की तरह है, जिसमें हम अपने बढ़े हुए वजन को कम करने के प्रयास में लगे रहते हैं। यह सबके लिए एक परिचित अनुभव या पहचान में न आए ‘अंडरएक्टिव थायरॉयड’ की समस्या है। गर्दन के निचले हिस्से में स्थित, एडम्स एप्पल के पीछे एक तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जिसे थायरॉयड ग्लैंड कहा जाता है।
यह कार में लगे एक्सीलरेटर पैडल जैसा होता है। इसके अंदर दो हार्मोन होते हैं एक थायरॉक्सिन और दूसरा ट्राईआयोडोथायरोनिन। ये हार्मोंस शरीर की उस मेटाबोलिक दर को नियंत्रित करते हैं, जिस दर पर हम ऊर्जा खर्च करते हैं। इसके साथ ही ये शरीर में होेने वाली प्रतिक्रियाओं की भी निगरानी करते हैं। ‘अंडरएक्टिव थायरॉयड’ एक ऐसी स्थिति है जिसमें थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोंस का उत्पादन नही करती हैं। अपर्याप्त थायरॉयड हार्मोन उत्पादन के कारण मेटाबोलिक ग्लैंड धीमा हो जाता है। इसके लक्षणों में थकान, मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन, सुस्ती, वजन बढ़ना, मासिक अनियमितता, मानसिक अवसाद, बालों का गिरना और नाखूनों का कमजोर हो जाना, शुष्क त्वचा, काम प्रवृति का कम हो जाना और मोटापा है।
भारत में 13 फीसदी महिलाएं हाइपोथायरॉयड की बीमारी से परेशान हैं। हाइपोथायरॉयड से पुरुषों के मुकाबले महिलाएं 10 गुना ज्यादा प्रभावित होती हैं। हालांकि जीवनशैली में बदलाव लाकर आप थायरॉयड को संतुलित कर सकती हैं। थायरॉयड ग्लैंड तनाव से ज्यादा प्रभावित होता है। सौभाग्य से, कुछ चीजें हैं, जिसे अपनाकर आप तनाव के चक्र को तोड़ सकती हैं, इसमें व्यायाम और गहरी नींद महत्वपूर्ण है। अगर अपनी दिनचर्या में मेडिटेशन, योग और श्वास से संबंधित व्यायाम को शामिल करें तो परिणाम चमत्कारिक होंगे।
अपनी नींद के मामले में रहें स्मार्ट
हाइपोथायरॉडिज्म या अंडरएक्टिव आपकी नींद को प्रभावित करता है। ऐसे में आप नियमित और निर्धारित समय पर सोएं। जब आप शांत और आरामदायक माहौल में एक नियमित समय पर सोती हैं, तो आपका शरीर चार्ज हो जाता है।
सही आहार
आहार में सही परिवर्तन थकान व मानसिक तनाव को कम कर सकता है और असंतुलन को दबाने में मदद करता है। अपने आहार में बिना प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के साथ संतुलित पौष्टिक आहार लें। प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ थायरॉयड हार्मोन को सभी ऊतकों तक पहुंचाते हैं।
व्यायाम करें
तनाव का प्रतिरक्षा प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एसे में व्यायाम हाइपोथायरॉयडिज्म से जुड़े लक्षणों को दूर कर सकता है। साथ ही हृदय को स्वस्थ और मांसपेशियों को बेहतर बनाने में भी मददगार साबित होता है।
हाइपोथायरॉयडिज्म और गर्भावस्था
अध्ययनों से अनुमान लगाया गया है कि भारत में गर्भवती महिलाओं में हाइपोथायरॉयडिज्म की परेशानी औसतन 4-6 फीसदी के बीच है। गर्भावस्था के दौरान अंडरएक्टिव थायरॉयड ग्रंथि गर्भाशय में भ्रूण के विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। गर्भावस्था के दौरान अनुपचारित हाइपोथायरॉयडिज्म की वजह से गर्भपात, समय से पहले जन्म, प्री-एक्लेम्पसिया (अविकसित) और मृत शिशु का जन्म हो सकता है। बुनियादी दवा के अलावा सरल जीवनशैली जैसे उपायों को अपनाकर तनाव में कमी और हाइपोथायरॉयडिज्म के लक्षणों को कम किया जा सकता है।