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Heart Disease: पिछले कुछ वर्षों में क्यों बढ़ गए हैं हृदय रोग-हार्ट अटैक के मामले? अध्ययन में हुआ बड़ा खुलासा

Tue, 22 Apr 2025 07:47 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 22 Apr 2025 07:47 PM IST
सार

अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिल्वेनिया के शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। इसमें विशेषज्ञों ने बताया है कि कोविड-19 रोग ने हृदय स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है, दुनियाभर में बढ़ते हार्ट अटैक और हृदय संबंधित बीमारियों के लिए इसे एक कारण माना जा सकता है। 

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study says COVID survivors more likely to have heart disease and heart attack
हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Adobe stock photos

विस्तार

हृदय रोगों के मामले दुनियाभर में जिस गति से बढ़ते जा रहे हैं, इसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को सोचने पर विवश कर दिया है। भारत में भी हार्ट अटैक-हार्ट फेलियर की घटनाएं न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ाती जा रही हैं, इसके कारण मृत्यु दर भी काफी बढ़ गया है। चिंताजनक बात ये है कि अब 20 से भी कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक और इससे मौत के मामले अधिक रिपोर्ट किए जा रहे हैं।

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पिछले एक दशक के डेटा पर नजर डालें तो पता चलता है कि कोविड-19 महामारी के बाद से हृदय संबंधी घटनाएं और भी बढ़ गई हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या महामारी ने हृदय रोगों को बढ़ा दिया है?
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कोविड-19 और हृदय रोगों का संबंध

इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिल्वेनिया के शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। इसमें विशेषज्ञों ने बताया है कि कोविड-19 रोग ने हृदय स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है, दुनियाभर में बढ़ते हार्ट अटैक और हृदय संबंधित बीमारियों के लिए इसे एक कारण माना जा सकता है। 
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शोधकर्ताओं ने अलर्ट किया है कि जिन लोगों को कोविड महामारी के दौरान संक्रमण हो चुका है उनमें हृदय संबंधित बीमारियों का खतरा भी अधिक हो सकता है। 

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हृदय रोग और हार्ट अटैक के मामले - फोटो : Freepik.com

कोविड महामारी ने बढ़ाया हृदय रोगों का खतरा

अमेरिका और पोलैंड में किए गए इन अध्ययनों में कोविड-19 के कारण हृदय स्वास्थ्य को हुए नुकसान के बारे में विस्तार से बताया गया है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि जो बच्चे कोविड-19 से संक्रमित रह चुके हैं उनमें उच्च रक्तचाप और हार्ट फेलियर जैसी समस्याओं की आशंका काफी देखी जा रही है। इसी तरह संक्रमण के बाद हृदय संबंधी लक्षण वयस्कों में अधिक आम हो गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि कोरोना महामारी ने हृदय रोगों के जोखिमों को काफी बढ़ा दिया है।


पेन्सिल्वेनिया विश्वविद्यालय के नेतृत्व वाली शोधकर्ताओं ने टीम ने मार्च 2020 से सितंबर 2023 तक कोविड-19 संक्रमण के एक से 6 महीने बाद हृदय रोग के जोखिम का अनुमान लगाने के लिए अध्ययन किया। इसके लिए 1.2 मिलियन (12 लाख) से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया। प्रतिभागियों में पुरुष-महिला और बच्चे सभी लोगों को शामिल किया गया था।

अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं की टीम ने जिन लोगों को कोविड का संक्रमण रहा है, भले ही किसी भी वैरिएंट का उनमें भविष्य में हृदय  संबंधित समस्याओं का खतरा अधिक देखा गया।  

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कोविड 19 ने बढ़ाए हृदय रोगों के मामले - फोटो : Freepik.com

पहले नहीं थी बीमारी पर कोविड के बाद सामने आए मामले

अध्ययन के लेखकों ने कहा, शोध में ये भी देखा गया है कि संक्रमण से पहले बिना किसी भी तरह के हृदय रोगों की हिस्ट्री वाले लोगों में बाद में हृदय रोग विकसित हुए हैं। पहले के अध्ययनों में भी कोविड-19 के कारण हृदय रोग के खतरों को लेकर सावधान किया जाता रहा है। इस अध्ययन से भी स्पष्ट होता है कि महामारी के दौरान संक्रमण के शिकार रह चुके लोगों को अपने हृदय स्वास्थ्य को लेकर अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। 

संक्रमण के बाद कार्डियोवैस्कुलर विकारों के बढ़ते जोखिम के बारे में सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए। बच्चों और किशोरों में दीर्घकालिक जोखिम हो सकते हैं, इसलिए समय पर इसका निदान और  जटिलताओं को कम करने के लिए डॉक्टरी सलाह जरूरी है।


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स्रोत और संदर्भ
Cardiovascular post-acute sequelae of SARS-CoV-2 in children and adolescents: cohort study using electronic health records


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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